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राष्ट्रकुल देशों में मानवाधिकार उल्लंघनों का बोलबाला : सीएचआरआई

Updated: IST Human Rights
संस्था ने कहा है, दुर्भाग्यवश वास्तविकता यह है कि प्रमुख मूल्य मौजूदा समय में गंभीर संकट में हैं

नई दिल्ली। राष्ट्रकुल मानवाधिकार पहल (सीएचआरआई) ने राष्ट्रकुल दिवस पर सोमवार को अंतरसरकारी संगठनों से आग्रह किया कि उन्हें सदस्य देशों में आजादी और कानून के शासन को सुनिश्चित करना चाहिए, क्योंकि इनमें से कई देशों में सत्ता के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघनों का बोलबाला है। सीएचआरआई ने कहा, इस अवसर पर एक बार फिर सदस्य देश राष्ट्रकुल चार्टर के मौलिक सिद्धांतों -लोकतंत्र, कानून का शासन और मानवाधिकारों के प्रति दृढ़ता दोहराएंगे।

संस्था ने कहा है, दुर्भाग्यवश वास्तविकता यह है कि प्रमुख मूल्य मौजूदा समय में गंभीर संकट में हैं। राष्ट्रमंडल देशों में निवास करने वाले 2.4 अरब लोगों में से एक बहुसंख्यक आबादी गरीबी में जी रही है और अधिकारों से वंचित है।

राष्ट्रकुल देशों में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाले स्वतंत्र संगठन, सीएचआरआई ने एक बयान में कहा, कई सारे देशों के शासन में सत्ता का दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और राजकीय हिंसा के साथ ही धार्मिक असहिष्णुता, बोलने की आजादी पर हमले, घृणास्पद भाषण, नस्ल और लिंग के आधार पर जोडऩे और भेदभाव करने के अधिकार का बोलबाला है। बयान में आर्थिक वृद्धि और प्रगति के नाम पर लोगोंं के अधिकार सुनिश्चित करने के बदले उनकी आजादी पर नियंत्रण करने में सरकारों की भूमिका पर सवाल उठाया गया है।

संस्था ने कहा है, अधिकारों पर नियंत्रण करने के लिए अक्सर बाजार में आगे निकलने की दौड़ और आर्थिक वृद्धि की दुहाई दी जाती है। लेकिन ये एक-दूसरे के विपरीत नहीं हैं और आर्थिक वृद्धि में बुनियादी अधिकारों की हर हाल में सुरक्षा होनी चाहिए।

राष्ट्रकुल दिवस इसके 52 सदस्य देश मनाते हैं, जिनमें भारत भी शामिल है। ये सभी देश मिलकर राष्ट्रकुल और पूर्व की ब्रिटिश कॉलोनी का निर्माण करते हैं। यह दिवस औपचारिक रूप से नहीं मनाया जाता और कई सारे इससे परिचित भी नहीं हैं। वैसे यह दिवस मार्च महीने के दूसरे सोमवार को प्रति वर्ष मनाया जाता है।

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