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सेना को राजनीति में घसीटा जाना तृणमूल की हताशा को दर्शाता है: पर्रिकर 

Updated: IST manohar parrikar
उन्होंने कहा कि यह एक नियमित प्रक्रिया है जो पिछले 15 वर्षों से चली आ रही है इसमें नया कुछ नहीं है

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सेना को राजनीतिक विवाद में घसीटे जाने पर तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए आज कहा कि यह पार्टी की हताशा को दर्शााता है। कोलकाता में टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती राज्य पुलिस को विश्वास में लेकर की गई थी। पर्रिकर ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदन में तृणमूल के नेता सुदीप बंदोपाध्याय द्वारा टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती को लेकर उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सेना के खिलाफ जिस तरह का आरोप एक मुख्यमंत्री की ओर से लगाया गया है उसे देखकर मुझे बड़ा आघात लगा है।

उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि जो भी किया गया वह पुलिस के सहयोग से किया गया था। सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही नहीं बल्कि पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती की गई। उन्होंने कहा कि यह एक नियमित प्रक्रिया है जो पिछले 15 वर्षों से चली आ रही है इसमें नया कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि कोलकाता में पिछले साल भी ऐसी व्यवस्था की गई थी। झारखंड,उत्तरप्रदेश और बिहार में ऐसा किया जा चुका है।

पश्चिम बंगाल में सेना की तैनाती स्थानीय प्रशासन को विश्वास में लेकर की गई थी इतना जरुर है कि पहले इसकी तिथि 28,29 और 30 नवंबर तय की गई थी लेकिन 28 को भारत बंद के आयोजन के कारण पुलिस के अनुरोध पर इसका समय बदलकर 1 और 2 दिसंबर कर दिया गया। जिन स्थानों पर सेना की तैनाती की गई उसका पुलिस के साथ संयुक्त निरीक्षण किया गया था। ऐसे में सेना पर बेवजह आरोप लगाना तृणमूल पार्टी की हताशा को दर्शाता है।

इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज सुबह सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरु की बंदोपाध्याय ने कोलकाता में टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कोलकाता में मुख्यमंत्री सचिवालय से कुछ ही दूरी पर स्थित विद्यासागर टोल प्लाजा सहित पूरे राज्य में 19 स्थानों पर सेना को तैनात किया गया। यह गलत मंशा से की गई कार्रवाई थी। उनके सवाल उठाने के साथ ही तृणमूल के सारे सदस्य सरकार विरोधी नारे लगाते हुए अध्यक्ष के आसन के सपीम पहुंच गए और शोर शराबा करने लगे। इस बीच संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सेना को इस तरह राजनीतिक विवाद में घसीटा जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आप लोग संसद के बाहर सवाल उठाते हैं और अदंर बवाल करते हैं।

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