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अकुला-2 सबमरीन पर रूस से समझौता, और ताकतवर होगी Ind नेवी

Updated: IST submarine
रूसी जर्नल वेदोमोस्ती के मुताबिक ब्रिक्स सम्मेलन से इतर ये समझौता किया गया हालांकि इसकी घोषणा नहीं की गई

नई दिल्ली। नौसेना को और भी ताकतवर बनाने के लिए भारत ने रूस के साथ अकुला-2 न्यूक्लियर पनडुब्बी समझौता किया है। रूसी जर्नल वेदोमोस्ती के मुताबिक ब्रिक्स सम्मेलन से इतर ये समझौता किया गया हालांकि इसकी घोषणा नहीं की गई। हालांकि भारत पहले से ही अकुला.2 न्यूक्लियर सबमरीन को 2011 से लीज पर इस्तेमाल कर रहा है। इस पनडुब्बी के भारतीय बेडे में आने से नौसेना और ताकतवर होगी।

वेदोमोस्ती के लिए कॉलम लिखने वाले एलेक्सी निकोलस्की ने बताया कि इस दिशा में दोनों देशों के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही थी। करीब पांच साल बाद रूसी सरकार ने बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट 971 पर आगे बढऩे का फैसला किया। अकुला-2 को भारतीय सेना ने 10 साल के लिए लीज पर लिया था, जिसकी अवधि कुछ सालों के बाद समाप्त हो जाएगी। लिहाजा भारत सरकार भी अकुला-2 को खरीदने की योजना पर काम कर रही थी।

रूस से अकुला-2 वर्ग की परमाणु पनडुब्बी चक्र को 2011 में भारतीय नौसेना में औपचारिक तौर पर शामिल किया गया था। यह पनडुब्बी जनवरी के अंतिम सप्ताह में रूस के नौसैनिक बंदरगाह से रवाना हुई थी। इस पनडुब्बी को नौसेना में शामिल करने के बाद परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी रखने वाली दुनिया की चुनिंदा छह नौसेनाओं में भारतीय नौसेना शामिल हो जाएगी। भारत के अलावा अमरीका, रूस ब्रिटेन, चीन और फ्रांस की नौसेनाएं परमाणु पनडुब्बी से लैस हैं।

अकुला-2 की क्षमता

इस पनडुब्बी का वजन 8140 टन है।

यह पनडुब्बी 100 दिनों तक लगातार समुद्र के भीतर छिपी रह सकती है।

आम डीजल पनडुब्बियां अधिकतम दो.तीन दिनों तक ही पानी के भीतर रह सकती हैं।

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