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भारत सरकार ने एक साल के लिए बढ़ाया तसलीमा नसरीन का वीजा, 23 जुलाई से होगा प्रभावी

Updated: IST Taslima Nasreen
1994 में तसलीमा नसरीन के एक उपन्यास लज्जा के प्रकाशन पर कट्टरपंथी भड़क गए थे, जिसकी वजह से उनको देश छोडऩा पड़ा था।

नई दिल्ली। भारत सरकार की ओर से निर्वासित बांग्ला लेखिका तसलीमा नसरीन का वीजा एक साल के लिए बढ़ा गया है। मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली चर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन के खिलाफ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने फतवा जारी किया था, जिसकी वजह से उनको भारत में रहना पड़ रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार तसलीमा का नया वीजा 23 जुलाई 2017 से प्रभावी होगा और एक साल तक के लिए मान्य होगा।

Taslima Nasreen

क्या है मामला
दरअसल, 1994 में तसलीमा नसरीन के एक उपन्यास लज्जा के प्रकाशन पर कट्टरपंथी भड़क गए थे, जिसकी वजह से उनको देश छोडऩा पड़ा था। उनका यह उपन्यास भारत में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद बांग्लादेश में हुए दंगों की घटना पर आधारित था। बांग्लादेश छोड़ने के बाद तस्लीमा कुछ समय तक अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों में भी रही। जिसके बाद उन्होंने भारत के वेस्ट बंगाल में रहने की इच्छा जताई थी। तसलीमा के पास स्वीडन की नागरिकता है लेकिन वह 2004 से भारत में निर्वासित जीवन जी रही हैं। तसलीमा कुछ सालों तक कोलकाता में रहीं लेकिन 2007 में कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद उन्हें राज्य छोडऩा पड़ा था।

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रही हैं विवादों में
तसलीमा का जन्म 25 अगस्त 1996 को बांग्लादेश के मयमनसिंह शहर में हुआ था। छात्र जीवन से ही उन्होंने लेख व कविताएं लिखनी शुरू कर दी थीं। उनकी पांच खंडों में प्रकाशित आत्मकथा भी काफी विवादित रही थी। कट्टरपंथी समहूों के विरोध के बाद उन्हें अपनी आत्मकथा से इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद से जुड़ा एक प्रसंग हटाने पर सहमत होना पड़ा था।

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