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भूमि अधिग्रहण विधेयक: शिवसेना ने भी छोड़ा BJP का साथ

Updated: IST
भूमि अधिग्रहण विधायक को लेकर संकट में पड़ी भाजपा, सहयोगी पार्टी शिवसेना ने भी छोड़ा साथ

नई दिल्ली। भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना भी भूमि अधिग्रहण बिल पर भाजपा का साथ छोड़ती नजर आ रही है। शिवसेना ने असहमति जाहिर करते हुए एनडीए की बैठक में हिस्सा नहीं लिया है। वहीं इस मामले पर शिवसेना का कहना है कि बैठक में शामिल होने का ये मतलब नहीं है कि मुद्दे को लेकर वे सरकार के खिलाफ है।

हम किसानों के खिलाफ नहीं

शिवसेना के प्रवक्ता संयज रौत ने कहा, "शिव सेना किसानों के खिलाफ भी नहीं है। हम पार्टी में चर्चा करने के बाद ही अपना पक्ष रखेंगे।" वहीं सभी विपक्षी दलों और पहले नरेंद्र मोदी सरकार का समर्थन करने वाली पार्टियों ने भी आरोप लगाया है कि भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव किसानों के खिलाफ है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी संसद के बाहर भू्मि अधिग्रहण अध्यादेश को लेकर आंदोलन किया। अन्ना का कहना है कि बिल में बदलाव करने से सिर्फ उद्दयोगपतियों को ही फायदा होगा।

अन्ना-केजरीवाल आए साथ-साथ

वहीं अन्ना का साथ देने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी आज आंदोलन में हिस्सा लिया और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। इससे पहले केंद्र सरकार ने मंगलवार को विपक्ष के हंगामे व विरोध के बीच लोकसभा में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक पेश कर दिया। उचित मुआवजा और भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन में पारदर्शिता का अधिकार (संशोधन) विधेयक 2015 उस अध्यादेश की जगह लेगा, जिसे केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने पिछले साल 30 दिसंबर को जारी किया था।

विपक्षी दलों ने किया विरोध

कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने सदन में भूमि अधिग्रहण विधेयक का पुरजोर विरोध किया। कांग्रेस सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए। लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बीरेंद्र सिंह ने कहा, मुझे सदस्यों की ओर से आपत्ति मिली है, लेकिन इस पर चर्चा की जा सकती है।

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