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सीमा ही नहीं, घर और बाजार तक चीन की घुसपैठ

Updated: IST China Business
चीन एशिया पर एकाधिकार स्थापित करना चाहता है कि इसके लिए वह अपनी हर क्षमता का इस्तेमाल कर रहा है।

नई दिल्ली। भारत समेत दुनिया भर के बड़े बाजारों में चीनी सामान के बहिष्कार की मांग उठती रहती है। भारत में भी कई समूह इस मांग को दोहराते रहते हैं। चीन के साथ भारत के संबंधों में आई हालिया खटास के बाद एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में है। चीनी माल के बहिष्कार की मांग करने वाले वर्ग का मानना होता है कि इससे पड़ोसी देश पर दबाव बनाया जा सकता है।

क्या है चीन की मंशा
चीन एशिया पर एकाधिकार स्थापित करना चाहता है कि इसके लिए वह अपनी हर क्षमता (आर्थिक, राजनीतिक और राजनयिक) का इस्तेमाल कर रहा है।

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द्विपक्षीय व्यापार चीन के पक्ष में
चीन और भारत के बीच 4648 अरब रुपए का द्विपक्षीय व्यापार है और वह भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। भारत 3985 अरब रुपए के चीनी उत्पाद आयात करता है, जबकि चीन में सिर्फ 663 अरब का सामान निर्यात होता है। छह सालों में यह व्यापार घाटा 2418 अरब रुपए से बढक़र 3322 अरब रुपए हो गया है।

बाद के दिनों में बढ़ी गुणवत्ता
शुरुआती झटकों से उबरते हुए चीन ने भारत आने वाले उत्पादों की गुणवत्ता सुधारी है। नतीजतन विश्वास किफायती दाम के कारण फिर बहाल होने लगा।

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10 गुना तक सस्ता
आम बाजार में ब्रांडेड कंपनियों के 20 से 40 हजार रुपए के उत्पाद चीनी ब्रांड में चार हजार में उपलब्ध हैं। आम ग्राहक की क्रय शक्ति कम है, इसलिए वह सस्ते उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं।

हर चीज है मौजूद
खिलौना, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं से लेकर, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं तक के चीनी उत्पाद भारत में उपलब्ध हैं।

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सब्सिडी का है खेल
चीनी कंपनियों को बड़ी मात्रा में सब्सिडी मिलती है और भारतीय कंपनी को कम। यही वजह है कि चीनी उत्पाद सस्ते होते हैं। वहीं चीनी कंपनियां अपने बड़े पैमाने पर उत्पाद निर्माण और बिक्री करती हैं। इससे लागत कमी रहती है और अधिक माल बिकने से मुनाफा बड़ी मात्रा में होता है।

गिरा भारतीय कंपनियों का मनोबल
एक दशक पहले तक घरेलू उत्पादों में खिलौने, प्लास्टिक की बाल्टी, देवताओं की मूर्तियां व अन्य घरेलू सामान का ज्यादा हिस्सा भारतीय होता था। इनमें से प्रत्येक भारतीय कंपनी 500 से ज्यादा लोगों को रोजगार देती थी, जो अब बंद पड़ी हैं। अब इस बाजार पर चीन का कब्जा है। सस्ते और बेहतर चीनी आयात ने घरेलू उद्योग को मिटा दिया है।

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