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SC में सिर्फ ट्रिपल तलाक पर सुनवाई, यदि तीन तलाक खत्म हुआ तो आएगा नया कानून: AG

Updated: IST tripal talaq hearing in supreme court
तीन तलाक की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखा। केंद्र सरकार ने कहा कि शीर्ष अदालत अगर तीन तलाक को अमान्य या असंवैधानिक करार देता है तो केंद्र सरकार तलाक के नियमन के लिए नया कानून लाएगी।

नई दिल्ली। तीन तलाक की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखा। केंद्र सरकार ने कहा कि शीर्ष अदालत अगर तीन तलाक को अमान्य या असंवैधानिक करार देता है तो केंद्र सरकार तलाक के नियमन के लिए नया कानून लाएगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने समय की कमी के चलते सिर्फ तीन तलाक पर सुनवाई करने की बात कही। केंद्र सरकार की ओर से एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट से निकाह, हलाला और बहुविवाह पर भी सुनवाई का आग्रह किया। लेकिन शीर्ष कोर्ट ने तीन तलाक पर ही सुनवाई करने की बात कही।

सभी ने तीन तलाक खत्म करने की पैरवी की
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोमवार को अपना पक्ष रखने को कहा था। अभी तक कोर्ट में दलीलें रखने वाले सभी पक्षों ने एक साथ तीन तलाक बोलने की व्यवस्था को खत्म करने की पैरवी की है। सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ तीन तलाक की वैधानिकता पर विचार कर रही है।

केंद्र सरकार ने किया विरोध
इससे पहले 11 मई को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वह तीन तलाक की प्रथा का विरोध करती है और महिला समानता व लैंगिग न्‍याय के लिए लड़ना चाहती है। हालांकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील कपिल सिब्‍बल ने कहा कि तीन तलाक का मामला मुस्लिम बोर्ड के अंतर्गत आता है और इसलिए उनकी राय में सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में हस्‍तक्षेप नहीं करना चाहिए।

SC ने उठाए थे सवाल
वहीं पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कई बड़े सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि तीन तलाक इस्लाम में शादी खत्म करने का सबसे बुरा और अवांछनीय तरीका है, लेकिन कुछ विचारधाराएं उसे सही मानती हैं। वहीं तीन तलाक को पाप के सामान बताए जाने पर कोर्ट ने सहज सवाल किया कि जो चीज ईश्वर की निगाह में पाप है, उसे इंसान द्वारा बनाए गए कानून में सही कैसे कहा जा सकता है।

ईश्वर की नजर में पाप तो इंसान के लिए पुण्य कैसे? : SC
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने तीन तलाक का विरोध करते हुए कहा था कि उनकी निजी राय में यह पाप है लेकिन आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड इसे वैध मानता है। पीठ ने कहा कि कुछ लोग मौत की सजा को भी पाप मानते हैं, लेकिन ये वैध है। तभी जस्टिस कुरियन जोसेफ ने सवाल किया कि जो चीज ईश्वर की निगाह में पाप है वो क्या इंसान के बनाए कानून में सही हो सकती है। इस पर खुर्शीद ने कहा कि वह भी यही कह रहे हैं कि ये सही नहीं है।

पांच जजों की बेंच कर रही सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधन पीठ तीन तलाक के मामले की सुनवाई कर रही है। इसमें चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं। खास बात यह है कि इस बेंच में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी धर्म मानने वाले जज शामिल हैं।

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