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JNU में बंधक संकट खत्म, दफ्तर से बाहर आए वीसी

Updated: IST JNU
जेएनयू में लापता छात्र नजीब अहमद को लेकर बुधवार रात से चल रहा बंधक संकट 22 घंटे बाद समाप्त

नई दिल्ली। जेएनयू में लापता छात्र नजीब अहमद को लेकर बुधवार रात से चल रहा बंधक संकट 22 घंटे बाद समाप्त हो गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति और अन्य अधिकारी अपने दफ्तर से आ गए हैं। इसके पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों के खिलाफ कड़ा रवैया अख्तियार करते हुए पुलिस बुलाने की चेतावनी दी थी। जेनएयू के वीसी एम जगदीश कुमार ने कहा कि अभी तक पुलिस को नहीं बुलाया गया है पर अगर उन्हें काम करने से रोका गया तो पुलिस बुलाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीसी ने कहा कि वह लगातार दिल्ली पुलिस के संपर्क में हैं।

लापता जेएनयू छात्र के लिए 50,000 रुपए इनाम की घोषणा

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने पिछले पांच दिनों से लापता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र नजीब अहमद के बारे में सूचना देने वाले को 50,000 रुपए का इनाम देने की घोषणा की। पुलिस ने बुधवार देर रात जारी घोषणा में कहा है कि लापता/अपहृत जेएनयू के छात्र के बारे में कोई भी जानकारी या सुराग वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) को दी जा सकती है।

इसमें कहा गया है कि अहमद के बारे में जानकारी देने वाले को 50,000 रुपए का नकद इनाम दिया जाएगा। अहमद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के छात्रों के साथ हुए एक विवाद के बाद 14 अक्टूबर की रात विश्वविद्यालय छात्रावास माही-मांडवी से लापता हो गया था।

पुलिस में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 365 के तहत अपहरण की शिकायत दर्ज कराई गई है। इस मामले की विश्वविद्यालय ने भी जांच शुरू कर दी है।

कैंपस में ही छिपा है नजीबः एबीवीपी

इस बीच एबीवीपी की ओर से बयान सामने आया है। इसमें दावा किया गया है कि नजीब जेएनयू में ही कहीं छिपा है। एबीवीपी की ओर से वीसी जगदीश कुमार से डिमांड भी की गई है कि कैंपस की जांच कराई जाए जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के पूर्व सह सचिव और एबीवीपी नेता सौरभ शर्मा का कहना है कि हम पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं, जिस दिन झगड़ा हुआ था उसके अगले दिन वह अपने साथियों के साथ था। हमारी जेएनयू प्रशासन और पुलिस से यह भी मांग है कि कैंपस के अंदर प्रोफेसर के घरों में भी ढूंढा जाए, क्योंकि उमर और अनिर्बान भी इनके ही घरों में पाए गए थे।

जेएनयू में पढ़ाई नहीं राजनीति हो रही हैः तिवारी

अभिनेता और बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने जेएनयू में वाइस चांसलर को बंधक बनाए जाने का विरोध किया हैण् मनोज तिवारी ने कहा कि ये ठीक नहीं कि स्टूडेंट्स ने अपने वीसी और रजिस्ट्रार को बंदी बना लिया, जो छात्र लापता है उसकी भी जांच होनी चाहिए, लेकिन जेएनयू में अब लगता है कि पढ़ाई की जगह राजनीति हो रही है। मनोज तिवारी ने आगे कहा कि कुछ लोग यूनिवर्सिटी में माहौल को खराब कर रहे हैं। चाहे भारत विरोधी नारे लगाने का मामला हो या फिर वीसी और अन्य स्टाफ को बंधक बनाया जाना हो। इस पर पुलिस और मानव संसाधन मंत्रालय एक्शन लेगा।

केंद्रीय मंत्री ने मांगी रिपोर्ट

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को दिल्ली के पुलिस से रिपोर्ट तलब की। गृह मंत्रालय के अनुसार, राजनाथ ने दिल्ली पुलिस के आयुक्त आलोक कुमार वर्मा से मामले की विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के. एस. धतवालिया ने कहा कि गृह मंत्री ने शहर के पुलिस आयुक्त से बातचीत की है और मामले में एक रिपोर्ट देने के लिए कहा है। प्रदर्शनकारी छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से लापता छात्र नजीब अहमद के बारे में जानकारी पर ठोस जवाब की मांग कर रहा है।

ये था पूरा मामला

बता दें कि लापता छात्र के नहीं मिलने से नाराज छात्रों ने बुधवार रात को 'गैरकानूनी' तरीके से वाइस चांसलर सहित जेएनयू के वरिष्ठ अधिकारियों को बंधक बना लिया था हालांकि, बाद में डायबिटीज के मरीज रजिस्ट्रार को छोड़ दिया गया। वीसी ने सुबह बयान में बताया कि बंधक बनाए गए सभी अफसरों को रातभर खाना-पानी नहीं दिया गया। सभी फर्श पर सोए। उन्हें पत्नियों से भी नहीं मिलने दिया गया।

राजनाथ सिंह ने ली पूरे मामले की जानकारी

होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने पुलिस कमिश्नर आलोक वर्मा से फोन पर पूरे मामले की जानकारी ली थी। उधर, दिल्ली पुलिस ने भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए छात्र का पता बताने वाले के लिए 50 हजार का इनाम घोषित कर दिया है। पुलिस ने नजीब अहमद को ढूंढ़ने के लिए बाकायदा पोस्टर भी लगाए हैं।

उधर, सैकड़ों प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स को अलग-थलग करने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर मौजूद थी और अंदर दाखिल होने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन की अनुमति का इंतजार करती रही। कैंपस पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी। भारी संख्या में छात्रों ने वीसी के खिलाफ नारेबाजी की। यूनिवर्सिटी के एक वरिष्ठ अधिकारी चिंतामनी महापत्रा ने बताया था कि यूनिवर्सिटी में बिजली नहीं है। वीसी और अन्य अधिकारी अंदर बंद है और उन्हें घुटन महसूस हो रही है।

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष ने ये कहा

दोपहर में यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के अध्यक्ष मोहित पांडे ने बताया कि उन्होंने प्रशासनिक भवन को बंद कर दिया है क्योंकि प्रशासन असंवेदनशीलता दिखा रहा है। हालांकि, रात को अपनी बात से पलटते हुए पांडे ने कहा कि उन्होंने गेट बंद नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि हमने उनपर ताले नहीं लगाए। हम भवन के बाहर लेटे हुए हैं और उनसे कह दिया है कि अगर उन्हें जाना है तो हमारे ऊपर से होकर जा सकते हैं। इसके लिए वे आजाद हैं। भवन के बाहर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं लेटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों ने किसी को भी बंधक नहीं बनाया है। प्रॉक्टर बाहर हैं और वह आजादी से घूम सकते हैं। बिजली और सभी तरह की सप्लाई उपलब्ध हैं। पाण्डेय के मुताबिक उन लोगों ने नजीब से बिना किसी डर के कैंपस में लौट आने की अपील की है।

अधिकारी ने कहा कि छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करवाई गई। हालांकि, इस मामले में प्रशासन पुलिस को कई बार लिख चुका है और हम पुलिस से इस मामले को लेकर संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि यह कुछ नहीं, बस गैर-कानूनी तरीके से जेएनयू के अधिकारियों को बंधक बनाया गया। इस मुद्दे को राजनैतिक रंग देकर सांप्रदायिक बनाया जा रहा है ताकि कैंपस पर अशांति फैलाई जा सके।

वीसी कुमार ने कहा था कि छात्रों ने हमें 2.30 बजे से बंधक बनाकर रखा हुआ है। उनकी जो मांग है उसका कोई तुक नहीं है। नजीब के मामले को लेकर हम पुलिस के संपर्क में हैं। ऐसी घटनाएं हमारे हाथ में नहीं है, बल्कि यह काम पुलिस का है। हम जो कर सकते हैं, कर रहे हैं। हम भी चाहते हैं कि नजीब सही सलामत लौट आए। लेकिन, छात्र हमारी बातों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

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