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युवा इंजीनियरों ने तैयार किया देश को रोशन करने का मॉडल, खूबियां जानकर दंग रह जाएंगे आप

Updated: IST Electric model
मुरादाबाद की तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने एक ऐसा ऑटोमैटिक मॉडल बनाया है, जिससे न सिर्फ बिजली की किल्लत दूर होगी, बल्कि बिजली चोरी और फाल्ट भी चंद मिनटों में पकड़कर दूर किया जा सकेगा।

जय प्रकाश/मुरादाबाद. आजादी के सत्तर सालों बाद भी सूबे में बिजली की किल्लत बरकरार है, जिस पर सरकारें दावा तो करती हैं लेकिन अमल नहीं हो पाता। इसी के तहत मुरादाबाद की तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने एक ऐसा ऑटोमैटिक मॉडल बनाया है, जिससे न सिर्फ बिजली की किल्लत दूर होगी, बल्कि बिजली चोरी और फाल्ट भी चंद मिनटों में पकड़कर दूर किया जा सकेगा। बशर्ते सरकार इस प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाए। टीएमयू के बीटेक इलेक्ट्रिक्ल एंड इलेक्ट्रॉनिक अंतिम वर्ष के छात्र दिवेश कुमार, उमेर खान, और सौरभ सिंह ने ऑटोमेटिक पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंट्रोल एनकोर्डिंग टू लोड नाम का मॉडल बनाया है। बिजली घरों में यह सिस्टम लग जाने से बिजली की सप्लाई जरूरत के अनुसार होगी और सारे बिजली घर मॉर्डन हो जाएंगे। उमेर खान मुरादाबाद के ही रहने वाले हैं और इनके पिता एक बिजनेस मैन हैं। देवेश बरेली के रहने वाले है और इनके पिता स्कूल टीचर है
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ये प्रोजेक्ट कुछ इस तरह काम करेगा
ऑटोमेटिक पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंट्रोल एनकोर्डिंग टू लोड पावर प्लांट से जाने वाली बिजली जब तक अन्य बिजली घरों को पहुंचेगी। उससे पहले ही तार को रिले ओर करंट ट्रांसफॉर्मर से जोड़ दिया जाएगा। रिले और करंट ट्रंसफार्मर को मॉडल से भी जोड़ दिया जाएगा। जब पावर प्लांट के तारों को और तार से लगे रिले ओर करेंट ट्रंसफॉर्मर को मॉडल से जोड़ा जाएगा तो ग्रिड से आगे बढ़ चुकी बिजली के तार में लगे माइक्रो कंट्रोलर को करंट वैल्यू रीड की जानकारी देगा। इसके बाद मॉडल में लगे अन्य उपकरण ट्रंसफॉर्मर से पहले तारों में लगे रिले को संदेश भेजेगा कि पावर प्लांट के तार में कितनी बिजली जानी है, किस लाइन लाइन की बिजली को काट ऑफ करना है। संदेश पहुंचते ही रिले ऑटोमेटिक सभी काम सेकेंडभर में कर देगा।
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बिजली घरों में तैयार करना पड़ेगा ग्रिड
इस मॉडल के अनुसार एक से अधिक पावर प्लांट को एक ग्रिड बनाकर जोड़ना पड़ेगा। ग्रिड में अलग-अलग पावर प्लांटो से आने वाली बिजली का मॉडल से जोड़ा जाएगा। बिजली को मॉडल से जोड़ने के लिए बहुत कम बिजली की आवश्यकता पड़ेगी। यहां तारों को मॉडल से जोड़ने का काम सिर्फ मॉडल को चलाने के लिए डीसी मोड़ में मॉडल से जोड़ा जाएगा। मॉडल में माइक्रो कंट्रोलर ट्रंसफार्मर, रेक्टिफायर, वोल्टेज, रेगुलेटर लगा हुआ है।
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मॉडल के फायदे
1. यह पहले से ही तय होगा कि किस क्षेत्र में कितनी बिजली आपूर्ति करनी है।
2. बिजली चोरी होने पर और ऑवर लोडिंग होने पर रिले लाइन को ऑटोमेटिक कट ऑफ कर देगा।
3. किसी एक पावर प्लांट के खराब होने पर दूसरे पावर प्लांट से बिजली की आपूर्ति शुरू हो जाएगी।
4. ओवर लोडिंग से होने वाले फाल्ट नही होंगे।
5. इस मॉडल से अधिक बिजली घरों की आवश्यकता नही पड़ेगी।
6. जब फाल्ट ही नहीं होंगे तो ठीक करने की जरूरत ही नही पड़ेगी।
7. हादसे नही होंगे।
8. प्रत्येक क्षेत्र में जरूरत के अनुसार ही बिजली की आपूर्ति होगी।

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