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रामपुर में आजम खान की डगर आसान नहीं, उलटफेर की चर्चाओं ने पकड़ा जोर

Updated: IST azam khan
बड़ी तादाद में पड़े हिन्दू वोटों ने समाजवादी खेमे को तनाव में डाला

रामपुर। क्या रामपुर की नगर विधान सभा सीट पर उलटफेर हो सकता है..ये चर्चाएं आजकल यहां जोर पकड़ रही हैं...उसकी वजह है कि रामपुर सीट पर हिन्दू मतदाताओं द्वारा जमकर वोटिंग करना। खासकर इस सीट से जुड़े ग्रामीण इलाकों में। ये वही हाईप्रोफाइल सीट है, जहां से राज्य सरकार के ताकतवर मंत्री आजम खां लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। वहीं ये खबरें भी हैं कि मुस्लिम वोटों का भी यहां बंटवारा हुआ है, इस आधार पर कहा जाने लगा है कि तस्वीर इस बार कुछ बदलेगी।

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वोटिंग के बाद भाजपा खेमा उत्साहित

शहर सीट पर भाजपा प्रत्याशी शिव बहादुर सक्सेना के बेटे आकाश सक्सेना हनी, जिन्होंने यहां भाजपा चुनाव प्रचार की कमान संभाल रखी थी, का कहना है कि जिस तरह इस बार रामपुर में वोटिंग हुई है, उसके आधार पर हम हार-जीत का दावा बेशक नहीं करें लेकिन ये कह सकते हैं कि इस सीट पर पहली बार उलटफेर की संभावना बन गई। उनका दावा है कि इस बार रामपुर में बीजेपी उम्मीदवार को जितने वोट मिलने जा रहे हैं, उतने पार्टी को रामपुर में अब तक के इतिहास कभी नहीं मिले होंगे। कहना नहीं होगा कि शहर का भाजपा खेमा उत्साहित है। उसे इस चुनाव में उम्मीद की किरणें दिखने लगी हैं।

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साइकिल को नहीं मिली वैसी रफ्तार

आजम खान पिछले बीस सालों में यहां से आठ बार जीत चुके हैं। उन्होंने यहां केवल एक बार हार का मुंह देखा है। पिछली चार बार से वह यहां से समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत रहे हैं। उनकी जीत का अंतर इतना अधिक रहता आया है कि ये माना जाने लगा कि उन्हें यहां चुनौती देना किसी भी हालात में आसान नहीं। लेकिन मुकाबले की गंभीरता का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि आजम खां सपा के स्टार प्रचारक होते हुए पहले दो चरणों में पार्टी के प्रचार के लिए रामपुर से बाहर निकल ही नहीं सके। जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। उन्हें इस बार कहीं ज्यादा ताकत लगानी पड़ी तो ज्यादा विरोध का भी सामना करना पड़ा। रिपोर्ट ये भी आईं हैं कि रामपुर के मुस्लिम इलाकों में इस बार वैसी वोटिंग नहीं हुई है, जैसी हर बार होती रही है। यानि हर बार से हल्की वोटिंग देखी गई है। इस ट्रेंड ने कहीं न कहीं आजम के खेमे में तनाव तो भर ही दिया है।

क्या कटे हैं मुस्लिम वोट

रामपुर में त्रिकोणीय मुकाबला था, जो भाजपा, सपा और बसपा के बीच था। बहुजन समाज पार्टी से तनवीर मैदान में थे। हाथी पर बैठकर उन्होंने साइकिल की रफ्तार को काबू में करने का काम किया है। अगर भाजपा के सक्सेना की शहर में अच्छी पकड़ और छवि है तो कुछ ऐसा ही हाल तनवीर का है। मुस्लिमों के बीच उनकी भी अच्छी छवि है। ये कहा जा रहा है कि रामपुर में इस बार तनवीर के चलते मुस्लिम वोट बंटे हैं। अगर वाकई ऐसा हुआ है तो इसकी आंच आजम पर पड़ सकती है। वैसे तनवीर के बारे में ये भी कहा जा रहा है कि उन्हें केवल मुस्लिमों के ही नहीं बल्कि सारी बिरादरी के वोट मिले हैं।

वोटों का समीकरण

वोटों का समीकरण अगर सीधे-सीधे देखें तो लगता है कि हिन्दू मतदाताओं की एकछत्र पसंद अगर भाजपा के शिवबहादुर रहे तो मुस्लिम वोटों में आपस में ही सेंध लग गई। रामपुर में ऐसी कांटे की टक्कर की स्थिति लंबे समय बाद बनी है। लिहाजा चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। पहली बार ऐसा कहने वाला कोई नहीं है कि आजम आराम से ये सीट निकाल रहे हैं या उनकी जीत तय है। हालांकि अगर परिणामों की बात की जाए तो इस पर पक्की मुहर तो मतगणना के दिन यानि 11 मार्च को ही लगेगी।

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