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डकैतों के कब्जे से 13 दिन बाद छूटे ये युवक, परिजन से मिल बताई आपबीती 

Updated: IST morena
डकैत गिरोह मडरायल व सरमथुरा के जंगल में छोड़कर भाग गए

मुरैना।13 दिन पूर्व सेमई कैलारस से अपहृत हुए सिंचाई विभाग के कर्मचारियों को पुलिस ने गुरुवार को मुक्त करा लिया है। पुलिस अधीक्षक का दावा है कि पुलिस के दबाव के चलते डकैत गिरोह मडरायल व सरमथुरा के जंगल में छोड़कर भाग गए। इनको छुड़ाने के लिए मुरैना, श्योपुर व राजस्थान पुलिस की चार पार्टियां लगाई गई थीं, जबकि केदार जाटव के लड़के मांगी जाटव का कहना है कि दोनों अपहृत तीन लाख में हमने छुड़ाए हैं। विदित हो कि 3-4 फरवरी की दरम्यानी रात को सिंचाई विभाग के चौकीदार केदार जाटव निवासी मानपुर छैरा व बाबूलाल जाटव निवासी कुटरावली सेमई नहर में तिवरिया के अंदर आग जलाकर हाथ सेंक रहे थे। तभी वहां हथियारबंद पांच बदमाश आए और उन्होंने किबाड़ खुलवाए।

बदमाशों ने कहा कि हमको गेल इंडिया कंपनी का काम चल रहा है, वहां का रास्ता बता दो, कर्मचारियों ने कहा हमको नहीं पता। इसी बात पर बंदूकों की बट से हमला कर दोनों की मारपीट की। केदार जाटव की ज्यादा मारपीट की, उसका एक हाथ टूट गया और पसलियों में चोट है। उसके बाद बदमाश दोनों को राजस्थान के जंगल में ले गए। पुलिस अधीक्षक विनीत खन्ना ने पत्रकारवार्ता में बताया कि अपहरण के बाद से ही पुलिस लगातार सर्चिंग कर रही थी। गुरुवार को मुरैना पुलिस, विजयपुर एसडीओपी देवेन्द्र कुशवाह की टीम में श्योपुर कोतवाली टीआई सतीश चौहान, वीरपुर थाना प्रभारी एसएस तोमर और राजस्थान पुलिस सहित चार पार्टियां मडरायल व सरमथुरा के बीहड़ों में सर्चिंग कर रही थीं। तभी मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि किसी डकैत गिरोह का मूवमेंट है। घेराबंदी की तो पुलिस के दबाव के चलते बदमाश अपहृतों को छोड़कर फरार हो गए।

वहीं मांगी जाटव का कहना हैं कि डकैतों ने मेरे पापा केदार जाटव के मोबाइल से फोन किया कि तीन लाख रुपए लेकर मडरायल के जंगल में आ जाओ, नहीं तो दोनों को मार देंगे। एक लाख रुपए हमने और दो लाख बाबूलाल के घरवालों ने व्यवस्था की। गुुरुवार को हम बदमाशों के बताए स्थान (मडरायल के जंगल) पर पहुंचे। वहां हमारी गाड़ी खड़ी करवा दी और फोन पर इधर-उधर आने की बताते रहे। जंगल में कई किमी चलने के बाद एक मंदिर पर तीन बदमाश मुंह बंाधकर आए और हमसे पैसे लिए और मेरे पापा व बाबूलाल को हमारे हवाले कर दिया और कहा कि अगर पुलिस को खबर की तो तुम सबको मार दिया जाएगा।

हम चार लोग थे। उसमें मैं और मेरे मौसाजी, उधर दो आदमी बाबूलाल के तरफ से थे। हम लोग राजस्थान के जंगल से होकर चंबल पार कर मप्र की सीमा में घुसे तभी हमको मुरैना पुलिस मिली और वह अपने साथ रामपुर थाने ले गई। वहां पर काफी देर तक पूछताछ करती रही। वहीं पुलिस अधीक्षक का कहना है कि फिरौती वाली बात अभी हमारे सामने नहीं आई है। अपहरण वकील मल्लाह या बनिया गुर्जर गिरोह में से किसी एक ने किया है, अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।

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