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Movie Review: यदि आप अपनी जानू के साथ 'ओके जानू ' देखने जा रहे हैं, तो जाने से पहले यह पढ़ लें

Updated: IST OK JAANU
डायरेक्टर: शाद अली, कलाकार: आदित्य रॉय कपूर, श्रद्धा कपूर, नसीरुद्दीन शाह, रेटिंग: 2/5

मुंबई। साउथ की कई सुपरहिट फिल्मों को हिंदी में रीमेक किया गया है, उनमें से कई फिल्में अपनी छाप छोडऩे में कामयाब रहीं। अब एक और साउथ की सुपर-डुपरहिट फिल्म 'ओके कनमनी' पर बनी ओके जानू रिलीज हुई है। साउथ के जाने-माने फिल्मकार मणिरत्नम ने हिंदी रीमेक के निर्देशन की जिम्मेदारी शाद अली को सौंपी और 'आशिकी 2' के लीड पेयर आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर के साथ शाद ने ये फिल्म बनाई। शाद अली ने जहां एक समय पर मणि रत्नम को 'दिल से', 'गुरु' और 'रावण' जैसी फिल्मों में असिस्ट किया था, तो वहीं 'साथिया' और 'झूम बराबर झूम' जैसी फिल्में डायरेक्ट भी की हैं। बहरहाल, सवाल यह उठता है कि क्या ओके कनमनी की तरह ओके जानू भी हिंदी दर्शकों में छाप छोडऩे में कामयाब होगी या नहीं...। तो आइए, फिल्म की कहानी के साथ अन्य पहलुओं पर नजर डालते हैं...।

कहानी...
फिल्म शुरू होती है आदी (आदित्य रॉय कपूर) से जो उत्तरप्रदेश से मुंबई आता है। उसका सपना है अमेरिका जाकर करोड़पति बनने का। मुंबई में उसे एक शादी में तारा (श्रद्धा कपूर) मिलती है, जो पेरिस जाकर आर्किटेक्चर की पढाई करना चाहती है। दोनों बस कुछ महीनों के लिए ही इंडिया में है। आदी और तारा तय करते हैं कि जब तक वो इंडिया में हैं एक-दूसरे के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहेंगे। दोनों को एक-दूसरे के साथ शादी करने का कोई इरादा नहीं है। दोनों गोपी श्रीवास्तव (नसरुद्दीन शाह) के घर किराए पर एक साथ रहने लगते हैं। धीरे-धीरे दोनों को एक-दूसरे से प्यार होने लगता है, लेकिन दोनों प्यार के चक्कर में अपना सपना नहीं तोडऩा चाहते। अब आदी और तारा शादी करेंगे या फिर अपनी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाएंगे। क्या यह फिल्म लिव-इन को बढ़ावा देती है...ऐसे सब्जेक्ट पर पहले भी कई फिल्में बन चुकी हैं, जिनमें सैफ अली खान और प्रीति जिंटा अभिनीत सलाम-नमस्ते को दर्शकों ने काफी पसंद किया था।

अभिनय...
श्रद्धा कपूर ने फिल्म में अच्छा अभिनय किया है। एक चुलबुली और कॅरियर ओरिएंटेड लड़की के किरदार में वो काफी जमी हैं, लेकिन दिल जीता है आदित्य रॉय कपूर ने। उन्होंने दमदार एक्टिंग की है। वो फिल्म में बेहद क्यूट लग रहे हैं, जिसे देख कई हसीनाएं अपना दिल उन्हें दे बैठेंगी। एक मिडिल क्लास लड़का, जो अमीर बनना चाहता है, लेकिन अपने प्यार को भी नहीं खोना चाहता, इस किरदार में आदित्य खूब सूट हुए हैं।

निर्देशन....
इस फिल्म की कहानी अच्छी है, लेकिन डायरेक्शन में थोड़ी कमी रह गई है। शाद अली अपना 100 परसेंट नहीं दे पाए हैं। कहीं-कहीं ये फिल्म बोर करती है, क्योंकि कई जगहों पर फिल्म स्लो हो जाती है। फिल्म में कोई ट्विस्ट नहीं है। दोनों के पास शादी ना करने की कोई खास वजह नहीं दिखाई गई है और फिल्म के अंत में जो हैपी एंडिंग दिखाई गई है, वह भी बहुत ही आसान और सिंपल दिखाया गया है। यदि सब कुछ इतना ही आसन था, तो पूरी फिल्म का मतलब क्या हुआ।

गीत-संगीत...
फिल्म में एआर रहमान का संगीत थोड़ा-बहुत आकर्षित करता है। हम्मा हम्मा गाने को छोड़ फिल्म के बाकी गाने अच्छे हैं। फिल्म को बैकग्राउंड संगीत भी मधुर है

कमजोर पक्ष
फिल्म की कहानी में नयापन नजर नहीं आता है। लड़का, लड़की, लिव इन रिलेशनशिप और फिर बिखराव। रिश्ते में बिखराव, कहानी में बिखराव...स्क्रिप्ट में कमजोरी साफ झलकती है। इसके अलावा आदित्य और श्रद्धा के बीच की केमेस्ट्री काफी फीकी-सी दिखाई पड़ती है, जिससे रिलेट कर पाना काफी मुश्किल होता है। इनकी कहानी में न रोमांस निकलकर सामने आता, ना ही इंमोशन...।

क्यों देखें...
आदित्य रॉय कपूर, श्रद्धा कपूर या नसीरुद्दीन शाह के दीवाने हैं, तो एक बार जरूर देख सकते हैं। फिल्म का आर्ट वर्क, सिनेमेटोग्राफी बेहतरीन है।

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