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महाराष्ट्र में फिर परेशान हुए किसान

Updated: IST Arhar Dal
सरकार ने कहा है कि जिन किसानों को 22 अप्रैल तक खरीद केंद्र से टोकन मिला है, उस किसान से ही सरकार अरहर खरीदेगी

मुंबई। महाराष्ट्र में अरहर खरीद का मुद्दा तूल पकड़ रहा है। सरकार ने 22 अप्रैल से अरहर दाल खरीदना बंद कर दिया है, जिसकी वजह से हजारों क्विंटल अरहर सरकारी केंद्रो के बाहर पर पड़ी हुई है और परेशान किसान अब आंदोलन पर उतारू हो गए हैं। सरकार ने कहा है कि जिन किसानों को 22 अप्रैल तक खरीद केंद्र से टोकन मिला है, उस किसान से ही सरकार अरहर खरीदेगी। इससे पहले भी सरकारी बदइंतजामी से किसान परेशान थे। खास बात ये भी है की सरकार ने पहली बार दालों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया है और पहली बार सरकार दालों के दाम न बढ़े, इसलिए 2 मिलियन टन का स्टॉक पहले से कर रही है।

उसी के तहत ये खरीदारी चल रही थी। दालों के इस साल के ज्यादा उत्पादन के लिए केवल अच्छी बारिश जिम्मेदार नही है। पिछले साल दालों के दामों ने जो डबल सेंचुरी लगाई थी, उसकी वजह से अच्छे दामों की उम्मीद में किसानों ने भी दालों की बुआई ज्यादा की, लेकिन अब सरकारी खरीदारी बंद होने से दालों का मुद्दा महाराष्ट्र में गरमा गया है।

सरकारी बदइंतजामी से किसान खफा

महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में अमरावती में हजारों क्विंटल अरहर की बोरियां सरकारी खरीद केंद्रों के बाहर पड़ी हैं। किसानों को इंतजार था कि किसी तरह सरकार इस अरहर दाल को खरीद ले, लेकिन 22 तारीख से सरकार ने तुअर खरीद बंद कर

दी है। सरकार ने साथ ही ये ऐलान कर दिया है की 22 तारीख तक जिस किसान को टोकन मिला है, उसी की अरहर खरीदी जाएगी। सरकार के इस ऐलान से किसानों मे हड़कंप मच गया है। सरकार किसानो से 5050 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अरहर खरीद रही थी। अब तक महाराष्ट्र सरकार ने करीब 4 लाख टन अरहर खरीद ली है।

सरकार दलील दे रही है कि महाराष्ट्र सरकार ने बाकी राज्यों से ज्यादा यानी करीब 45 फीसदी अरहर दाल खरीदी है, लेकिन सरकार के इस फैसले से किसान आंदोलन पर उतारू हो गए हैं। फैसले से खफा किसानों ने लातूर के पास चाकूर और जलकोट गांवों में अरहर जलाने का आंदोलन किया। लातूर जिले में भी हजारों क्विंटल अरहर सरकारी केंद्रो के बाहर खरीद का इंतजार कर रही है। किसानों का कहना है कि इससे पहले भी सरकारी केंद्रो पर बारदान नही होने से कई केंद्रो पर अरहर खरीदी बंद हो जाती थी और फिर किसानों को दूसरे केंद्रो के चक्कर काटने पड़ते थे। वहीं ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ता था। किसान सरकारी बदइंतजामी से पहले से ही खफा थे और अब तो खरीदारी ही बंद हो गई है।

भुगतान न होने का आरोप

अमरावती के किसानों का कहना है कि वो एक-डेढ़ महीने से उनकी अरहर दाल खरीद का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कई किसानों को अरहर बेचने के बाद अब तक भुगतान नहीं हुआ, इसलिए कई किसान खेतों से खरीद केंद्र तक तुअर लाए ही नहीं। यही हालात मराठवाड़ा के बीड़ जिले के हैं। बीड़ के किसान मंडी के ये किसान अपनी अरहर बेचने के लिय आए हैं, लेकिन अरहर खरीद बंद होने से तुअर से भरी ये बोरियां धूप से खराब होकर फटने लगी हैं। पहले खाली बोरियां नहीं होने से किसानो को यहां कई दिन रुकना पड़ा था।

फैसले के बाद शुरू होगी खरीददारी

दरअसल, अच्छी बारिश से इस साल तुअर का बंपर उत्पादन हुआ है, सरकार भी दालों के उत्पादन को बढ़ावा मिले। इसलिए किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अरहर खरीद रही है, लेकिन सरकारी बदइंतजामी से किसानों को कई दिनों तक खरीद केंद्रो पर ही रहना पड़ रहा है। बीड़ मे भरत अडाले नाम के इस किसान ने पिछले 8 दिनों से मंडी को ही अपना घर बना लिया है। इन मंडियों में किसानों के लिए ना खाने की सुविधा है न पानी की। किसान यहा गाडिय़ों में अपनी अरहर लेकर आए हैं, जिसका भाड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता रहता है, जिसे देना भी किसानों के लिए मुमकिन नहीं है। वहीं अधिकारी कह रहे हैं कि अब अरहर की खरीददारी सरकार के फैसले के बाद ही शुरू होगी।

34 फीसदी ज्यादा उत्पादन

दूसरी तरफ सरकार के खरीद बंद करने से बाजार में तुअर के दाम गिरने लगे हैं। सरकारी दाम 5050 है तो बाजार में व्यापारी करीब 4000 के दाम से किसानों से अरहर खरीद रहे हैं। यानी किसान अगर बाजार में अरहर बेचता है तो उसे प्रति

क्विंटल 1000 रुपए का नुकसान है, इसलिए अब किसान नेता भी सरकार के खिलाफ आंदोलन की धमकिया दे रहें हैं। इस साल देश में अरहर का उत्पादन 22.14 मिलियन टन हुआ है, जो पिछले साल 16.35 मिलियन टन था, यानी करीब 34 फीसदी ज्यादा उत्पादन।

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