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गर्भ में बच्चियों के हत्यारों का पर्दाफाश

Updated: IST Female Foeticide
कोर्ट ने डॉक्टर सुमित देओरे और उनके रेडियोलॉजिस्ट भाई डॉक्टर अभिजीत देओरे को पीसीपीएनडीटी कानून के तहत दोषी मानते हुए सजा का ऐलान किया

मुंबई. मालेगांव के एक स्कैनिंग सेंटर में 6 महीने के गर्भ का लिंग परीक्षण करा बाहर आने वाली पत्रकार प्रगति जाधव पाटिल के चेहरे पर कोई मलाल नहीं, बल्कि गर्व का भाव था। दरअसल, प्रगति अपने पत्रकार पति के साथ उस स्टिंग ऑपरेशन का हिस्सा थीं, जिसका मकसद लिंग निर्धारण और अबॉर्शन के नेटवर्क को ध्वस्त करना था। इस मामले में एक स्थानीय अदालत ने इस स्टिंग में दिखे डॉक्टर और उसके भाई को 3 साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने डॉक्टर सुमित देओरे और उनके रेडियोलॉजिस्ट भाई डॉक्टर अभिजीत देओरे को पीसीपीएनडीटी कानून के तहत दोषी मानते हुए सजा का ऐलान किया।

प्रगति आज 3 साल की बच्ची की मां हैं, जिन्हें अपने काम पर गर्व है। प्रगति और उनके पति शैलेंद्र, दोनों ही पत्रकार हैं और सतारा जिले में काम करते हैं। प्रगति ने कहा कि मेरे प्रयास का असर हुआ और मुझे खुशी है कि मैंने इस स्टिंग ऑपरेशन में शामिल होकर कुछ जिंदगियां बचाईं। इसके अलावा 'अखिल भारतीय महिला संगठन' और 'तथापि' जैसे 2 एनजीओ और हैं, जो इस दिशा में काम कर रहे हैं। इस संगठन ने पुणे में डॉक्टर मकरंद रणाडे के अस्पताल का स्टिंग किया था। डॉक्टर रणाडे की मौत हो गई पर केस अभी भी चल रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रजक्ता ऊषा विनायक और उनके पति अच्युत बोरगांवकर ने इस स्टिंग में कपल की भूमिका निभाई थी।

स्टिंग ऑपरेशन से हुआ था खुलासा

इन सबके पीछे वकील वर्षा देशपांडे और उनके 'लेक लड़की अभियान' (नॉन प्रॉफिट संगठन) नाम के संगठन की बड़ी भूमिका है। प्रगति वकील वर्षा देशपांडे के उस अभियान का हिस्सा थीं, जिसमें गर्भ में बच्चों के लिंग जांच में शामिल डॉक्टरों को बेनकाब करने के लिए करीब 50 स्टिंग ऑपरेशन किए गए। महाराष्ट्र स्टेट टेक्स्टाइल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन रविकांत तुपकर की पत्नी श्रवरी तुपकर भी 3 स्टिंग ऑपरेशन में शामिल थीं। उन्होंने 2011 में अपनी पहली प्रेग्नेंसी के दौरान ठाणे, रसायनी और पनवेल में हुए स्टिंग ऑपरेशन में हिस्सा लिया। आज उनकी एक 5 साल की बिटिया है और वह दूसरी बार प्रेगनेंट हैं।

सब कुछ किया रिकॉर्ड

उन्होंने बताया, 'तीनों ही मामलों में डॉक्टरों ने सहजता से भ्रूण के सेक्स का खुलासा कर दिया। साथ ही, सस्ते में अबॉर्शन करा देने के विकल्प भी दिए। मैंने सब कुछ रिकॉर्ड किया। केस अभी चल रहा है, लेकिन मुझे लगता है कि हम उन्हें हरा दिया है।' एनजीओ का कहना है कि वह अपने अभियान में शामिल होने के लिए आगे आने वाली महिलाओं से ऐफिडेविट भी लेता है।

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