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महाराष्ट्र : मजबूर किसान की बेटी ने की खुदकुशी

Updated: IST Suicide
एक किसान की बेटी ने अपनी पिता के कर्ज का बोझ कम करने के लिए मौत का दामन थाम लिया

मुंबई. महाराष्ट्र में आए दिन कर्ज में डूबे किसानों का दर्द झलक ही आता है। जी हां, कर्ज से कंगाल होते किसानों की बेबसी उनके घरों को तबाह कर रही है। एक ऐसी ही तबाही की कहानी महाराष्ट्र के लातूर से आई है, जिसे जानकर आपकी रूह

कांप जाएगी। आंखें नम हो जाएंगी और किसानों की हालत व उनकी परेशानियां देखकर आप भी शर्मिंदा होंगे। एक किसान की बेटी ने अपनी पिता के कर्ज का बोझ कम करने के लिए मौत का दामन थाम लिया। दरअसल, मजबूर किसान बाप को

उसके ब्याह की फिक्र थी और अब वो कर्जदार किसान बेटी के कफन के इंतजाम में लगा है। अपनी जान देते हुए उसने आखिरी चिट्ठी में लिखा है कि जान दे रही हूं, ताकि पिता का बोझ कम हो जाए।

शीतल द्वारा लिखित पत्र...

मैं शीतल वायाल चिट्ठी लिख रहीं हूं , मेरे पिता मराठा कुनबी समाज, यानी किसान है। पिछले पांच वर्षों से पड़े अकाल के चलते हमारे परिवार की हालत बद से बदतर हो चुकी है। कभी अकाल तो कभी कोहरे की वजह से खेती में बड़ा नुकसान हुआ है। कुछ साल पहले ही मेरी दो बहनों की शादी पापा ने साहूकार से कर्ज लेकर की है। सिर पर कर्जा और आमदनी शून्य होने की वजह से हमारे परिवार में आर्थिक संकट आ चुका है। हमारी हालत दिन-प्रतिदिन नाजुक होती जा रही है। कोई बैंक या साहूकार भी अब कर्जा देने को तैयार नहीं...। इसीलिए पिछले दो सालों से मेरी शादी नहीं हो रही थी। मराठा समाज की रूढि़ परंपरा है कि शादी में दहेज के नाम पर बड़ी रकम की मांग होती है। समाज में चल रही दहेज की परंपरा और किसान पिता की गरीबी कम हो, इसीलिए मैं अपनी मर्जी से जान दे रही हूं।

कुएं में कूदकर दी जान

विदित हो कि शीतल (21) अपने घर में सभी की लाडली थी और बड़े होते ही मां-बाप को उसके ब्याह की चिंता सताने लगी। जमीन कभी सूखे तो कभी कोहरे की भेंट चढ़ गई थी। एक दिन दिल को हल्का करने के लिए शीतल के पिता ने उसकी मां से दिल का दर्द साझा किया था। कहा था कि साहूकारों का कर्ज बढ़ता जा रहा है। सिर पर शीतल की शादी की फिक्र है, कैसे होगा। शीतल ने मां-बाप की बात सुन ली। पिता की मजबूरी ने शीतल का दिल ऐसा तोड़ा कि उसने कुएं में कूदकर उनसे मौत का दामन थाम लिया।

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