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नोटबंदी के 22 दिन बाद कृषि उपज मंडी में शुरू हुई खरीदी, चेक से किया भुगतान

Updated: IST Grain purchase
जो किसान 8 नवम्बर से पहले अपना अनाज बेचने लाए थे, उन्हें नोटबंदी के कारण अपना अनाज वापस ले जाना पड़ा था। गुरुवार को मंडी खुलने से किसानों के चेहरे पर चमक आ गई।

मुंगेली. नोट बंदी के 22 दिन बाद गुरुवार को कृषि उपज मंडी में खरीदी प्रारम्भ हो गई। 20 दिनों से वीरान पड़ी मंडी में काफी हलचल रही। किसान अपना अनाज लेकर आए और व्यापारियों ने खरीदा भी, लेकिन भुगतान चेक से किया गया। किसानों को नकदी के लिए अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा। पिछले 20 दिनों से सूना पड़ी आदर्श कृषि उपज मंडी में गुरुवार रौनक रही। मंडी खुलने से किसानों के चेहरे पर चमक दिखी।

ज्ञात हो कि 8 नवम्बर को नोट बंदी के बाद मंडी में व्यापारियों द्वारा अनाज खरीदी बंद कर दी गई थी। जो किसान 8 नवम्बर से पहले अपना अनाज बेचने लाए थे, उन्हें नोटबंदी के कारण अपना अनाज वापस ले जाना पड़ा था। गुरुवार को मंडी खुलने से किसानों के चेहरे पर चमक आ गई। जो किसान अपना अनाज लेकर आए थे, वे अपना अनाज बेचे पर उन्हें नकद रुपए नहीं मिले। व्यापारियों ने किसानों को चेक से भुगतान किया। नकदी भले ही न मिली हो, लेकिन अनाज बिकने से किसानों में खुशी है।

लोरमी में नोटबंदी के चलते किसान 8 सौ में बेच रहे धान

नोट बंदी के चलते किसानो को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सहकारी समितियों में धान की खरीदी जरूर की जा रही है, लेकिन भुगतान नहीं होने के कारण किसानों की झोली खाली ही है। इधर कोचिए के पास किसानों को 8 से 10 रुपए प्रति किलो के भाव से धान बेचकर परिवार चलाना पड़ रहा है। किसानों की मजबूरी का फायदा कोचिए व अनाज व्यापारी जमकर उठा रहे है। लोरमी क्षेत्र के अधिकांश गांव में इन दिनों नोटबंदी के चलते खुले बाजार में धान की कीमत 8 सौ से 1 हजार रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। नकद भुगतान के चलते मजबूरीवश किसानों को कम कीमत में ही धान बेचना पड़ रहा है। गांव गांव में सक्रिय कोचिए किसानों की परेशानियों का खुल कर फायदा उठा रहे हैं।

गौरतलब है कि राज्य शासन द्वारा 15 नवबंर से सहकारी समितियों पर धान की खरीदी कार्य शुरू कर दिया गया है। बड़े किसान अपना धान लेकर समितियों में पहुंचने भी लगे हैं। वहीं धान बिक्री के बाद किसानों को भुगतान नहीं हो पा रहा है, क्योंकि सहकारी बैंको में अभी तक नए नोट नहीं पहुंच पाये हैं। एक किसान ने बताया कि उसके पास अपने घर का खर्च चलाने के लिए पैसा नहीं है, इसलिए नकद भुगतान पाने के लिए वे 9 सौ रुपए की दर पर दो क्विंटल धान कोचिए के पास गांव में ही बेच दिए। इसी तरह बहुतेरे किसान बेच रहे हैं।

बताया जा रहा है कि क्षेत्र के दूरस्थ गाव में यह धान आठ सौ रूपये तक प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है. नोट बंदी का पूरा फायदा कोचिए व अनाज ब्यापारी उठा रहे है। इन दिनो क्षेत्र में किसानो का खुलकर शोषण हो रहा है. और प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। यदि धान बेचने वाले कृषको को यथाशीघ्र भुगतान की ब्यवस्था नही की गई तो शोषण का यह सिलसिला यूं ही अनवरत चलता रहेगा।

धान खरीदी केन्द्र में ही हो भुगतान-राज्य सरकार द्वार सरकारी कर्मचारियों को जिस तरह 10 हजार रूपये का नगद भुगतान उनके वेतन से किया जा रहा है ठीक इसी तरह धान खरीदी केन्द्रेा में धान बेचने आने वाले किसानो को मात्रा के हिसाब से 3 से 10 रूपये की नगद भुगतान करने की ब्यवस्था की जाये तो परेशानी कुछ कम हो सकती है। प्रशासन को इस परिपेक्ष्य में तत्काल उचित निर्णय लेना चाहिऐ।

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