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कम रिस्क लेने वालों के लिए बेहतर है यह इन्वेस्टमेंट टूल

Updated: IST Investment Risk
लोअर रिस्क कैपेसिटी वाले निवेशकों के लिए बैंक फिक्स डिपॉजिट ही एकमात्र विकल्प नहीं है, ऐसे निवेशक फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी) पर भी विचार कर सकते हैं...

नई दिल्ली. लोअर रिस्क कैपेसिटी वाले निवेशकों के लिए बैंक फिक्स डिपॉजिट ही एकमात्र विकल्प नहीं है, ऐसे निवेशक फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी) पर भी विचार कर सकते हैं। हालांकि कुछ मायनों में ये बैंक एफडी की तुलना में कम सुरक्षित हैं, लेकिन रिटर्न काफी अच्छा देते हैं। इसके अलावा इसमें टैक्स लाभ भी ज्यादा अच्छा है। दूसरी ओर, इक्विटी म्युचुअल फंड की तुलना में यह काफी सुरक्षित है।

ऐसे समझिए एफएमपी को
म्युचुअल फंड्स के फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान्स (एफएमपी) के जरिए क्लोज एंडेड डेट फंड्स में निवेश करते हैं। यह निवेश मैच्योरिटी के बराबर या उससे कम अवधि वाले डेट इंस्ट्रुमेंट्स में होता है। यह अवधि एक महीने से पांच साल तक हो सकती है। एफएमपी में निवेश का मकसद पूंजी की सुरक्षा के साथ-साथ बेहतर रिटर्न हासिल करना है।

टैक्स लाभ में बैंक एफडी से आगे
जो निवेशक टैक्स बचाने के लिए निवेश करते हैं उनके लिए बैंक एफडी की तुलना में एफएमपी बेहतर विकल्प है। 30 फीसदी टैक्स स्लैब में आने वालों के लिए यह और भी ज्यादा फायदेमंद है। इसके अलावा इसमें इंडेक्सेशन का भी फायदा मिलता है, जिससे टैक्स अमाउंट कम करने में मदद मिलती है।

इक्विटी से कम रिस्की
एफएमपी इक्विटी की तुलना में कम रिस्की होता है। एफएमपी में निवेश डिपॉजिटरी सर्टिफिकेट्स, मनी मार्केट इंस्ट्रुमेंट्स, कमर्शियल पेपर्स और हाई सिक्युरिटी वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में निवेश होता है। फंड मैनेजर मैच्योरिटी पीरियड की अवधि के हिसाब से डेट इंस्ट्रुमेंट्स में निवेश करते हैं। एफएमपी में पूंजीगत नुकसान की संभावना इक्विटी फंड्स की तुलना में बेहद कम होती है, क्योंकि इसमें पूंजी का निवेश डेट फंड्स में होता है जो मैच्योरिटी पीरियड तक सिक्योर होती है। इससे निवेशक का खर्च भी काफी हद तक कम हो जाता है।

मजबूत होता है पोर्टफोलियो
डेट प्रोडक्ट होने के चलते एफएमपी में ब्याज दरों का जोखिम न के बराबर होता है और एसेट क्लास का परफॉर्मेंस अच्छा रहता है, जिससे पोर्टफोलियो को मजबूती मिलती है। मार्केट रेगुलेटर्स के मुताबिक, म्युचुअल फंड में रिटर्न की गारंटी नहीं दी जा सकती है, ऐसे में एफएमपी सिर्फ निवेशक को होने मिलने वाले संभावित रिटर्न के संकेत दे सकता है।

प्री-मैच्योर विड्रॉल के लिए एफडी बेहतर
यदि निवेशक को अमाउंट लिक्वि़डिटी चाहिए तो बैंक डिपॉजिट ही बेहतर विकल्प है क्योंकि इसमें थोड़े-बहुत नुकसान के साथ प्री-मैच्योर विड्रॉल की सुविधा मिलती है लेकिन एफएमपी में यह सुविधा नहीं होती है। एफएमपी केवल उन्हीं स्टॉक एक्सचेंजों पर ट्रेड कर सकते हैं, जहां वे सूचीबद्ध होते हैं। चूंकि भारत में वैकल्पिक बाजार विकसित नहीं हुआ है ऐसे में भी ट्रेडिंग थोड़ी मुश्किल हो जाती है।

एफडी में मूलधन ज्यादा सुरक्षित
मूलधन की सुरक्षा के मामले में भी बैंक डिपॉजिट एफएमपी की तुलना में बेहतर है। डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (डीआईसीजीसी) के तहत बैंक डिपॉजिट के मामले में प्रत्येक डिपॉजिटर को मूलधन और ब्याज दोनों पर अधिकतम एक लाख रुपए तक की सुरक्षा मिलती है। भारत के सभी कमर्शियल बैंक, विदेशी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की शाखाएं आदि डीआईसीजीसी के तहत इंश्योर्ड होती है। इसके अलावा भी कई वित्तीय संस्थाएं इसके दायरे में आती हैं। जबकि एफएमपी में इस तरह की कोई गारंटी नहीं मिलती है। ऐसे में फंड हाउस पर आर्थिक संकट की स्थिति में निवेशक को नुकसान की संभावना रहती है।

आपके लिए क्या बेहतर?
यदि आप 10-20 फीसदी तक के टैक्स दायरे में आते हैं तो ट्रिपल ए रेटिंग वाली कॉर्पोरेट एफडी या बैंक एफडी बेहतर है। लेकिन यदि आपको अमाउंट लिक्विडिटी की जरूरत नहीं है और 30 फीसदी टैक्स दायरे में आते हैं तो तीन साल तक की एफएमपी बेहतर विकल्प लेना ठीक रहेगा।

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