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कर बचत के लिए निवेश, परंपरागत बीमा पॉलिसी से मिलते हैं कम रिटर्न व कवर

Updated: IST Investment
हर साल हजारों लोग परंपरागत बीमा पॉलिसी में निवेश करते हैं। ऐसा वे तीन तरह के फायदों के लिए करते हैं- कर छूट, पॉलिसी अवधि के दौरान लाइफ कवर और मैच्युरिटी पर करमुक्त आय। हालांकि जहां तक रिटर्न की बात है तो परंपरागत बीमा सह निवेश पॉलिसी से अक्सर लोगों को निराशा ही हाथ लगती है। लगभग 10 परंपरागत बीमा योजनाओं के विश्लेषण से साफ है कि इनपर औसत रिटर्न लगभग 4.8 फीसदी ही है।

नई दिल्ली.हर साल हजारों लोग परंपरागत बीमा पॉलिसी में निवेश करते हैं। ऐसा वे तीन तरह के फायदों के लिए करते हैं- कर छूट, पॉलिसी अवधि के दौरान लाइफ कवर और मैच्युरिटी पर करमुक्त आय। हालांकि जहां तक रिटर्न की बात है तो परंपरागत बीमा सह निवेश पॉलिसी से अक्सर लोगों को निराशा ही हाथ लगती है। लगभग 10 परंपरागत बीमा योजनाओं के विश्लेषण से साफ है कि इनपर औसत रिटर्न लगभग 4.8 फीसदी ही है।

रिटर्न की गणना इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (आईआरआर) मेथल से किया गया। बेशक इस मामले में अलग-अलग कंपनियों का रिटर्न अलग-अलग है, लेकिन कुल मिलाकर किसी भी परंपरागत पॉलिसी के रिटर्न को आकर्षक नहीं कहा जा सकता है। कुछ प्लान तो महज 2-3 फीसदी रिटर्न ही देते हैं और 20 साल का एक परंपरागत प्लान 4.5-5 फीसदी से अधिक रिटर्न नहीं देता है।

महंगाई का नहीं करते मुकाबला

परंपरागत बीमा योजनाओं से आने वाला रिटर्न महंगाई को मात देने में अक्सर असफल रहता है। ऐसी योजनाओं में शामिल एलआईसी के न्यू जीवन आनंद का 35 साल के बाद का रिटर्न महज 4.26 फीसदी है। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के स्मार्ट गारंटीज सेविंग्स प्लान 15 साल के पॉलिसी टर्म पर महज 4.66 फीसदी और बजाज एलियांज लाइफ इंश्योरेंस के सेव के तहत 17 साल के पॉलिसी टर्म पर 4.24 फीसदी रिटर्न मिलता है।

इसी तरह रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस के सुपर एंडोमेंट प्लान के तहत 20 साल के पॉलिसी टर्म पर 5.04 फीसदी, आईंसीआईसीआई लाइफ प्रूडेंशियल के यूचर परफेक्ट के 20साल के पॉलिसी टर्म पर 5.12 फीसदी रिटर्न मिलना ही संभव होता है।
कम है लाइफ कवर भी
ये जीवन बीमा प्लान भले ही कम रिटर्न देते हों, लेकिन ये खरीदारों को लाइफ कवर भी मुहैया कराते हैं। और कोई भी अन्य इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट इतनी लंबी अवधि के लिए लाइफ कवर नहीं देता है, जो फाइनेंशियल प्लानिंग का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन ये प्लान जो आपको कवर देते हैं, वे आपके लिए अपर्याप्त ही साबित होते हैं।

एक व्यक्ति जो प्रति महीने लगभग 80 हजार रुपए कमाता है, उसे लगभग एक करोड़ रुपए के कवर की जरूरत होती है। टर्म इंश्योरेंस के तहत 30 साल के एक व्यक्ति को हर साल लगभग 12-15 हजार रुपए चुकाने पर एक करोड़ रुपए का कवर मिल जाता है। लेकिन परंपरागत प्लान के तहत इतनी राशि के कवर के लिए आपको कम से कम 10 लाख रुपए सालाना देने होंगे।

कर छूट ही है पहला मकसद

वास्तव में परंपरागत बीमा लेने वालों के जेहन में बीमा कवर सबसे आखिर में आता है। उनका प्राथमिक मकसद सेक्शन 80सी के तहत कर छूट पाने का रहता है। अक्सर लोग टैक्स सेविंग, पैसे की सुरक्षा, तय रिटर्न और लाइफ इंश्योरेंस कवर के लिए परंपरागत पॉलिसी लेते हैं। बीमा कंपनियां और उनके एजेंट अक्सर लोगों के दिमाग में कर छूट की बात ही घुसाने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि जीवन बीमा कंपनियों के लगभग 70 फीसदी बिजनेस ट्रांजेक्शंस वित्त वर्ष के आखिरी तीन महीनों में होते हैं, जब अधिकांश निवेशक सेक्शन 80सी के तहत निवेश करके कर छूट पाना चाहते हैं।

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