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हिसाब मांगने पर स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बीईओ कार्यालय किया घेराव

Updated: IST mahila morcha
जिले के प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने वाले स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बीईओ कार्यालय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

नारायणपुर. जिले के प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने वाले स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बीईओ कार्यालय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

जानकारी के अनुसार जिले के प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने का जिम्मा 2004 से महिला स्व-सहायता समूह को सौंपा गया है।

इसके लिए महिला स्व-सहायता समूह को बच्चों की दर्ज संख्या के हिसाब से मध्याह्न भोजन बनाने के लिए चावल व राशि प्रदान की जाती है। जिसमें चावल का उठाव सहकारी समितियों से करने के लिए चावल का कूपन बीईओ कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा प्रदान किया जाता है।

इसके साथ मध्याह्न भोजन बनाने के लिए लगने वाली सामग्री को खरीदी करने के लिए स्कूलों में बच्चों की दर्ज संख्या के हिसाब से राशि स्व-सहायता समूह के खाते में जमा की जाती है। इस तरह 2004 से जिले के करीब 140 महिला स्व-सहायता समूह द्वारा मध्याह्न भोजन बनाने का कार्य किया जा रहा है।

इस दौरान करीब 12 साल तक महिला स्व-सहायता समूह को मध्याह्न भोजन की राशि के आय-व्यय का हिसाब संबंधी बाउचर बीईओ कार्यालय द्वारा कभी मांगने की जरूरत नहीं समझी थी।

अचानक 12 साल बाद नींद से जागकर स्व-सहायता समूह की महिलाओं को 12 साल के आय-व्यय का हिसाब मांगकर बिल बाउचर जमा करने के लिए कहा गया है। इतने पूराने बिल बाउचर को महिलाएं कहा से लाकर देगी।

लेकिन 12 साल आय व्यय खर्च का विवरण देना महिला स्व-सहायता समूह के लिए संभव नहीं है। वही मध्याह्न भोजन की राशि को प्रति माह खाते में जमा नहीं किया जाता है। इसके कारण मध्याह्न भोजन बनाने के लिए लगने वाली सामग्री की खरीदी उधारी में करनी पड़ती है।

दो-तीन माह तक राशि नहीं मिलने पर दुकान संचालक भी उधारी देने से मना कर देते है। इसके कारण मध्याह्न भोजन बनाने के लिए कई तरह से परेशान होना पड़ता है। इसमें स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने मुख्यालय पहुंचकर बीईओ कार्यालय के कार्यप्रणाली का विरोध किया है।

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