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फिर उठने लगी गाडरवारा को जिला बनाने की मांग 

Updated: IST make Gadarwara district
सबसे पहले वर्ष 1987 में मांग को लेकर नागरिकों की बैठक आयोजित की गई

गाडरवारा। बीते विधानसभा चुनाव के पूर्व गाडरवारा को जिला बनाने की मांग अनेक लोगों ने उठाई थी। इसमें जहां नागरिकों ने गाडरवारा जिला बनाओ संघर्ष समिति गठित की थी। वहीं तत्कालीन कांग्रेस विधायक साधना स्थापक ने मुख्यमंत्री के समक्ष भी गाडरवारा को जिला बनाने की मांग उठाई थी। चुनाव के बाद सुप्त पड़ी जिले की मांग पुन: जोर पकड़ती दिख रही है। साहित्यकारों द्वारा बीते दिनों गाडरवारा जिला बनाओ काव्य गोष्ठियों का आयोजन किया गया है। साथ ही अनेक युवा पुन: गाडरवारा को जिला बनाने को लेकर चर्चाएं कर रहे हैं।

1987 में सबसे पहले उठी मांग
नगर के वरिष्ठ साहित्यकार कुशलेंद्र श्रीवास्तव के बताए अनुसार गाडरवारा को जिला बनाने की मांग कोई नई नही है। सबसे पहले वर्ष 1987 में जिला बनाने की मांग को लेकर नागरिकों की एक बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें नगर के अनेक वरिष्ठ अधिवक्ता एवं नागरिक शामिल थे। इसके उपरांत वर्ष 1992 में एसडीएम कार्यालय द्वारा गाडरवारा को जिला बनाने को लेकर दावे आपत्ति मांगे गए थे, जिसमें प्रस्तावित नक्शे दिए गए थे। तदोपरांत समय समय पर गाडरवारा को जिला बनाने की मांग उठाई जाती रही। जो अब विधानसभा चुनाव निकट आने से पुन: जोर पकड़ती दिख रही है।

1818 में था गाडरवारा परगना
नगर की ऐतिहासिक जानकारी के मुताबिक वर्ष 1818 में सीताबर्डी की लड़ाई के बाद क्षेत्र ब्रिटिश राज के नियंत्रण के अधीन था। इस अवधि में क्षेत्र गाडरवारा परगना के रूप में जाना जाता था। 1818 में ब्रिटिश सेना ने चौरागढ़ के किले पर कब्जा कर लिया और 1830 में इस क्षेत्र का नियंत्रण एक समिति को दिया गया था। ब्रिटिश शासन के दौरान इस क्षेत्र का प्रशासनिक सुधार किया गया था और 1836 में क्षेत्र का विभाजन हुआ और गाडरवारा परगना को होशंगाबाद जिले में विलय कर दिया गया था।

गाडरवारा क्यों बने जिला
वर्तमान गाडरवारा तहसील के अनेक गांव जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। इसी प्रकार पड़ोसी जिले रायसेन की तहसील उदयपुरा के लोगों को जिला मुख्यालय बहुत दूर पड़ता है। होशंगाबाद जिले की पिपरिया एवं बनखेड़ी तहसील के लोगों को भी जिला मुख्यालय जाने लगभग 100 किमी दूरी तय करनी पड़ती है। जबकि इन सभी क्षेत्र की तहसीलों के लोगों को गाडरवारा अपेक्षाकृत कम दूरी पर एवं सड़क व रेल मार्ग से जुड़ा होने के चलते सुगम पड़ता है। यदि गाडरवारा को जिला बना दिया जाए तो आसपास के अनेकों लोग सहजता से जिला मुख्यालय पहुंच सकते हैं।

प्रस्तावित जिले की संरचना
वर्ष 2012-13 में नगर के लोगों ने गाडरवारा जिला बनाओ संघर्ष समिति का गठन किया था। उस दौरान समिति द्वारा जिले का एक प्रस्तावित नक्शा सोशल मीडिया पर प्रस्तुत किया था। जिसके अनुसार प्रस्तावित जिले में वर्तमान नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील, तेंदूखेड़ा तहसील, रायसेन जिले की उदयपुरा तहसील, होशंगाबाद जिले की बनखेड़ी तहसील के अलावा सांईखेड़ा को तहसील का दर्जा देकर इसे भी जिले में शामिल किया जा सकता है, वहीं वनांचल गोटीटोरिया से सटे छिंदवाड़ा जिले के गांवों को भी गाडरवारा तहसील में शामिल कर इन्हे जिले में लिया जा सकता है।

जिले को देता है मोटा राजस्व
नरसिंहपुर जिले को खेती से लेकर सभी प्रकार के व्यापार व्यवसाय में सबसे अधिक राजस्व गाडरवारा एवं आसपास के क्षेत्रों से मिलता है। केंद्र सरकार का बड़ा प्रोजेक्ट एनटीपीसी पावर प्लांट गाडरवारा तहसील में होने से नगर का महत्व स्वत: ही बढ़ जाता है। कृषि से लेकर विभिन्न प्रकार के व्यापार, व्यवसाय, दाल मिलें, चीचली का पीतल उद्योग गाडरवारा तहसील की पहचान हैं।

हर क्षेत्र में बनाई अलग पहचान
गाडरवारा की अनेक विभूतियों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिनमें विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक संत आचार्य रजनीश, गांगई गांव के महर्षि महेश योगी, राजनीति के क्षेत्र में राव नीतिराज सिंह, विधानसभा के शेर कहे जाने वाले पूर्व विधायक नगीन कोचर, राष्ट्रीय राजनीति में अलग पहचान बनाने वाले एवं सर्वाधिक बार प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष निर्वाचित होने का रिकार्ड कायम करने वाले पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा, बोहानी के दानवीर चौ राघव सिंह, फिल्मों के क्षेत्र में अनूठा नाम कमाने वाले आशुतोष राणा से लेकर समाजसेवा, प्रशासनिक सेवाओं, व्यापार यहां तक कि अमेरिका की नासा तक में क्षेत्र के लोग कार्यरत हैं। इन सब बातों से स्पष्ट हो जाता है कि गाडरवारा में जिला बनने की पूरी योग्यताएं होने के बावजूद इसे जिला न बनाना क्षेत्र के साथ अन्याय है।

इनका कहना
सबसे पहले जिले की मांग मेरे द्वारा वर्ष 1987 में एक बैठक में उठाई गई थी। इसके उपरांत 1992 में एसडीएम को मैंने एवं अनिल गुप्ता आदि ने प्रस्तावित नक्शा दिया था। समय समय पर निरंतर मीडिया के माध्यम से जिला बनाने की मांग उठाई है। वर्तमान में गाडरवारा जिला बनाओ काव्यगोष्ठियां आयोजित कर जनमानस को जाग्रत कर रहे हैं। गाडरवारा में जिला बनने की सारी योग्यताएं हैं। इसे जिला घोषित न किए जाने से जनजागरुकता शासन को मजबूर करेगी कि गाडरवारा को जिला घोषित करे।
कुशलेंद्र श्रीवास्तव, साहित्यकार

प्रदेश के कई जिले प्रस्तावित गाडरवारा जिले की तुलना में छोटे हैं। गाडरवारा का दाल उद्योग, एनटीपीसी, व्यापारिक महत्व, भौगोलिक संरचना को देखते हुए जिला बनाना निहायत जरूरी है। मुख्यमंत्री से क्षेत्र की जनता का आग्रह है कि प्राथमिकता के आधार पर गाडरवारा को जिला बनाने हेतु कदम उठाएं।
मिनेंद्र डागा, पूर्व अध्यक्ष रोटरी क्लब

मैं हमेशा से गाडरवारा को जिला बनाने की पक्षधर रही हूं। जब मैं विधायक थी तब मैंने पहली बार गाडरवारा को जिला बनाने हेतु विधानसभा में आवेदन लगाया था। इसके साथ हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। विधानसभा में विधेयक लाया गया था, याचिका लगाई थी। गाडरवारा को जिला बनाने का आंदोलन जनांदोलन बनने के पूर्व सभी को दलगत राजनीति से हटकर जिला बनाने आगे आना चाहिए।
साधना स्थापक पूर्व विधायक

गाडरवारा जिला बनाने की स्थिति में पहुंच चुका है, हमारे द्वारा भी मुख्यमंत्री के समक्ष गाडरवारा को जिला बनाने की मांग रखी जाएगी।
गोविंद सिंह पटैल विधायक गाडरवारा

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