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अब हर दंगे और प्रदर्शन पर रहेगी तीसरी आंख की नजर

Updated: IST
शहर के चौराहे और मुख्य मार्ग रहेंगे सीसीटीवी की जद में,पुलिस कंट्रोल रूम में रखी जाएगी नजर

नीमच/रतलाम। निकट भविष्य में जितने भी दंगे या प्रदर्शन होंगे उनपर पुलिस जवानों के साथ तीसरी आंख की भी नजर रहेगी। यदि सबकुछ योजना अनुसार हुआ तो आने वाले कुछ महीनों में पुलिस प्रशासन को अत्याधुनिक संसाधनों से लेस 3 चार पहिया वाहन मिलने वाले हैं। इनसे हर विषम परिस्थिति में बदमाशों और उपद्रव फैलाने वालों पर नजदीक से नजर रखी जा सकेगी।

हंगामा करने वाले नहीं बच सकेंगे

शासन स्तर पर लागू की गई योजना अनुसार जल्द ही नीमच जिले में अत्याधुनिक संसाधनों से लेस 3 वाहन पुलिस को मिलने वाले हैं। ये वाहन तकनीक से लेस होंगे। इनमें सीसीटीवी कैमरे भी लगे होंगे। इनकी मदद से उग्र प्रदर्शन के दौरान हंगामा करने वालों पर नजदीक से नजर रहेगी। इसका लाभ यह होगा कि पुलिस को अलग से वीडियोग्राफी कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। साथ ही हंगामा करने वालों को यह पता नहीं चलेगा कि वे कैमरे की जद में हैं। इन वाहनों के पुलिस अमले में शामिल होने से हंगामा करने वालों पर नकेल कस सकेगी। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों वृहद स्तर पर हुए किसान आंदोलान से सबक लेने हुए शासन स्तर पर भी पुलिस प्रशासन को अत्याधुनिक तकनीक से लेस करने की योजना पर काम चल रहा है।

30 से अधिक स्थानों पर लगेंगे कैमरे

चेन स्नेचिंग, छेड़छाड़, राहजनी, लूट आदि वारदातों को नियंत्रित करने के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रूडोल्फ अल्वारिस ने भी शहर में करीब 60 से अधिक स्थानों पर जनसहयोग से सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रयास किया था, लेकिन कैमरे की क्वालिटी ऐसी नहीं थी कि इनकी मदद से आरोपियों तक पहुंचा जा सकता था। जहां तक उच्च गुणवत्ता वाले कैमरों का प्रश्न था तो इनकी कीमत सामान्य कैमरों से कहीं अधिक थी। ऐसे में जनभागीदारी से इतनी अधिक कीमत के कैमरे लगाना संभव नहीं हो सका और योजना अधर में अटक गई। अब नए सिरे से सीसीटीवी कैमरे लगाने की कवायद तेज हुई है। इस बार शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। शहर के संवेदनशील और प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं। इसके लिए 30 स्थानों का चयन किया गया है। वर्तमान में करीब छह स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।

अपराधों पर नजर रखने में मिलेगी मदद

जिला मुख्यालय में डायमंड ज्वेलर्स के संचालक पर हुए हमले का मामला हो या दशहरा मैदान के समीप राजेंद्र जारोली पर बदमाशों द्वारा किए गए प्राणघातक हमला। चेन स्नेचिंग या राहजनी के मामले हों सीसीटीवी कैमरे आरोपियों तक पहुंचने में मददगार साबित होते हैं। यह प्रमाणित हो चुका है। अपराध करने के बाद कैमरों में जितनी भी वारदात कैद हुई उनमें आरोपियों तक पहुंचने में काफी समय लग गया। इसकी प्रमुख वजह कैमरे की क्वालिटी थी। इस बार जो कैमरे शहर में लगाए जाना है उनकी गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जानकारों की माने तो प्रत्येक कैमरे की कीमत कम से कम 60 हजार से अधिक ही होगी। ऐसे में अपराधी के एक बार कैमरे की जद में आने के बाद उसका बचना मुश्किल हो जाएगा।

पुलिस कंट्रोल रूम से रहेगी शहर पर नजर

जिन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे वहां से पुलिस की शहर पर पेनी नजर रहेगी। इसके लिए पुलिस कंट्रोल रूम के पीछे सीसीटीवी कैमरों के लिए अलग से कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। यहां कर्मचारी तैनात रहेंगे जो 24 घंटे नजर रखेंगे। जिस स्थान पर जहां भी संदिग्ध गतिविधि नजर आएगी पुलिस पेट्रोलिंग टीम को सूचना दे दी जाएगी। इतना ही नहीं कैमरों में कैद फुटेज एक महीने तक सुरक्षित भी रखे जाएंगे।

सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना प्रस्तावित

आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए शहर के प्रमुख स्थानों और चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना प्रस्तावित है। योजना को मूर्तरूप देने के लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। सीसीटीवी कैमरों पर नजर रखने के लिए पुलिस कंट्रोल रूम में सेंटर बनाया जाएगा। यहां से हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।

- तुषारकांत विद्यार्थी, पुलिस अधीक्षक

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