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चिकित्सक की लापरवाही के कारण युवक की मौत

Updated: IST Neemuch
किया हंगामा, मौके पर अपर कलेक्टर विनयकुमार धोका ने दिया जांच का आश्वासन

जीरन/नीमच। जिला चिकित्सालय में गुरुवार सुबह एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। काफी देर तक परिजनों ने जिला चिकित्सालय में चिकित्सक की लापरवाही के कारण युवक की मृत्यु होना को लेकर हंगमा कर दिया। इस बीच हंगामे की सूचना मिलते ही मौके पर अपर कलेक्टर विनयकुमार धोका पहुंचे और मामले की जांच करने का आश्वासन दिया इसके बाद परिजन शव को लेकर रवाना हुए।

जानकारी के अनुसार दुर्गाशंकर उर्फ सोनू पिता मोड़ीराम प्रजापति (25) निवासी जीरन बुधवार को खेत में कीटनाशक का छिड़काव कर रहा था। इस दौरान मुंह पर किसी प्रकार का मास्क नहीं पहनने के कारण कुछ दवाई युवक के मुंह में तली गई। इसपर पहले युवक को जीरन में प्राथमिक उपचार के लिए ले जाया गया, जहां से उसे नीमच करीब बुधवार शाम 07.30 बजे भेज दिया गया।

परिजन सुरेश व ओम प्रजापति ने बताया कि हम दुर्गाशंकर को लेकर आए थे। उस समय चिकित्सक आशीष अग्रवाल थे, जिन्होंने कहा कि दुर्गाशंकर को 500-500 रुपए के पांच इंजेक्शन लगाने पड़ेंगे, लेकिन हमने कहा कि हमारे पास इतने अधिक रुपए नहीं है, आप उपचार करो, जो भी होगा सुबह देखेंगे। लेकिन उन्होंने उपचार नहीं किया और अपशब्द बोलते हुए जो ट्रीप लगी थी, उसे भी निकाल दी। परिजनों ने बताया कि दुर्गाशंकर रात करीब 2 बजे तक बातचीत करता रहा, लेकिन सुबह 4 बजे उसकी मृत्यु हो गई। परिजनों ने यहां तक कहा कि दुर्गाशंकर रात में स्वस्थ था, स्वस्थ अवस्था में उसकी मृत्यु हुई है अगर उसे थोड़ा उपचार मिल जाता तो वह बच जाता।

व्यक्ति ने अत्यधिक कीटनाशक पिया था। इस कारण जब उसे परिजन लेकर आए थे, तब उसकी पलकें भी नहीं खुल रही थी, हमने किसी प्रकार की कोई राशि नहीं मांगी। चिकित्सालय में ही सभी प्रकार के इंजेक्शन उपलब्ध हैं। यहां तक की उपचार के समय पूर्ण रूप से कागजी कार्रवाई करते हुए शपथ पत्र पर भी परिजनों के हस्ताक्षर करवाए गए हैं। मेरे ऊपर लगाए गए आरोप पूर्ण रूप से गलत है।

- डॉ. आशीष अग्रवाल, चिकित्सक जिला चिकित्सालय

जिला चिकित्सालय में आए दिन चिकित्सकों की लापरवाही के कारण मरीजों को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ रहा है। जिसका मुख्य कारण चिकित्सकों पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं होना है। जब तक चिकित्सकों पर अनुशासनात्क कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ये मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करेंगे। चंूकि हमने सात दिनों तक आंदोलन किया था। इसके बाद डिलेवरी वाली महिलाओं से पैसे लेने के मामले में थोड़ा सुधार तो आया है, लेकिन चिकित्सकों में सुधार नहीं आ रहा है। कोई मामला भी होता है तो उसकी लंबे समय तक जांच चलती रहती है। इस कारण चिकित्सकों के हौसले भी बुलंद हो जाते हैं। इन चिकित्सकों पर अनुशासनात्क कार्रवाई होनी चाहिए।

-तरुण बाहेती, प्रदेश सचिव, युवा कांग्रेस

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