No one received medal winning junior women hockey team

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शानदार स्वागत को तरसीं चक दे गर्ल्स

No one received medal winning junior women hockey team

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No one received medal winning junior women hockey team
8/7/2013 1:01:00 AM
No one received medal winning junior women hockey team

नई दिल्ली। जर्मनी के मोनशेनग्लैडबाख में इतिहास रचने के बाद भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम मंगलवार को स्वदेश लौट आई। जब ये चैम्पियन वापस आई तो क्रिकेटरों को दिए जाने वाले शानदार स्वागत के विपरीत न ढोल-नगाड़े बजे, न फूलमालाएं पहनाई गई।

बस, थोड़े-बहुत मीडियाकर्मी और हॉकी इंडिया के चंद अधिकारी इनके स्वागत के लिए मौजूद थे। इसके बावजूद विजेताओं के चेहरे उत्साह से दमक रहे थे, क्योंकि पिछले 15 साल में तो ऎसा भी कभी नहीं हुआ था कि सिर्फ भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए मीडिया के लोग एयरपोर्ट पहुंचे हों।


भारत ने इंग्लैंड को सडनडैथ में इंग्लैंड को 3-2 से पराजित कर कांस्य पदक जीता है। इस टीम और इसकी सदस्यों की खासियत यह है कि कमी में बेहतरीन देना इन सबकी फितरत में शामिल है। इन लड़कियों में से ज्यादातर के पास कोई नौकरी नहीं है।


देश के कोने-कोने से आईं इन लड़कियों ने टूर्नामेंट में उन टीमों को भी हराया, जिन्हें हराना इनके बस में नहीं माना गया था। टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनीं रानी रामपाल कहती हैं कि हमारी पूरी टीम बहुत अच्छी है, खासकर गोलकीपर बिगन सोय ने शानदार प्रदर्शन किया। मुझे लगता है कि हमारी जीत से हॉकी की तस्वीर बदलेगी। कप्तान सुशीला चानू कहती हैं कि हमें हमेशा उम्मीद थी कि हम पहली चार टीमों में स्थान जरूर बना पाएंगे। हमारी टीम बहुत अच्छी है।


बदल सकती है तस्वीर


दरअसल, वर्ष 1975 के विश्वकप में स्वर्ण पदक हासिल करने के बाद से भारत को हमेशा पदकों की तलाश ही रही, चाहे वह पुरूष टीम हो, महिला टीम हो या जूनियर महिला टीम। विश्वकप हॉकी में भारत के पास गिनती के पदक हैं। विश्वकप प्रतियोगिताओं में भारत ने वर्ष 1975 से अब तक कुल चार पदक जीते हैं। वर्ष 1975 में पुरूष टीम ने स्वर्ण पदक जीता था और उसके बाद वर्ष 1997 में जूनियर पुरूष टीम ने रजत पदक हासिल किया।


फिर वर्ष 2001 में जूनियर पुरूष टीम ने ही स्वर्ण पदक जीता और अब वर्ष 2013 में हमारी जूनियर महिला टीम ने कांस्य पदक लाकर सम्मानित किया है। अब इस जीत ने इनके सपने बड़े कर दिए हैं। अब अधिकारी और कॉर्पोरेट जगत भी मैदान पर प्रोत्साहन के लिए चक दे कह दें तो हॉकी की तस्वीर बदल सकती है, क्योंकि खिलाडियों ने तो अपना दम दिखा ही दिया है।


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