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भाजपा की ये हाई प्रोफाइल महिला नेता पकड़ेंगी अखिलेश का साथ, रामगोपाल से हुई मुलाकात

Updated: IST akhilesh yadav
कुसुम राय अखिलेश यादव के साथ जा सकती हैं

अमित शर्मा, नई दिल्ली/नोएडा। ऐसे समय में जब यूपी में सब कुछ भाजपा के मन मुताबिक चल रहा है, एक ऐसी भी खबर आ रही है जो उसके पैरों तले से जमीन खिसका देगी. खबर है कि भाजपा की हाई प्रोफाइल महिला नेता कुसुम राय अखिलेश यादव के साथ जा सकती हैं. जानकारी है कि इस बात को लेकर दोनों पक्षों में मुलाकात भी हो चुकी है. मामला केवल तब तक के लिए रुका है जब तक कि चुनाव आयोग से समाजवादी पार्टी के सिम्बल का मामला तय नहीं हो जाता. एक बार जैसे ही यह मामला तय होगा, कुसुम राय के सपा में जाने की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी.
सपा (अखिलेश खेमा) के एक शीर्ष नेता से मिली जानकारी के अनुसार कुसुम राय सपा नेता रामगोपाल यादव से इस सन्दर्भ में मुलाकात भी कर चुकी हैं. जानकारी के अनुसार लखनऊ में दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात में कुसुम राय ने अपने लिए एक सीट के साथ पार्टी में महत्त्वपूर्ण पद की भी मांग की है. और उनके लिहाज से ये एक अच्छी खबर है कि खुद अखिलेश ने भी उनकी इस मांग पर सहमति जता दी है.

बता दें कि मूलतः आजमगढ़ की रहने वाली कुसुम राय भाजपा के शीर्ष महिला नेताओं में शुमार हैं. वे कल्याण सिंह की सबसे करीबी नेता मानी जाती थीं. वे राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रहने के साथ ही कैबिनेट स्तर के अनेक पदों को सम्भाल चुकी हैं. जब कल्याण सिंह भाजपा पार्टी की तरफ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, तब कुसुम राय की तूती बोलती थी. वे राज्य की प्रमुख हस्तियों में एक हुआ करती थीं. हालांकि जब खुद कल्याण सिंह की शख्सियत भाजपा में प्रभावित होने लगी और उन्होंने अलग पार्टी बना ली, तब वे कल्याण सिंह के ही साथ राष्ट्रीय क्रान्ति पार्टी के साथ चलीं गयी. बाद में जब कल्याण सिंह की भाजपा में वापसी हुई तब उनके साथ ही कुसुम राय भी भाजपा में वापस आयीं.

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यहां यह भी जानना आवश्यक है कि बीच में कल्याण सिंह एक बार सपा के बहुत करीब आये थे और सपा में खुद मुलायम सिंह ने उसका स्वागत किया था, तब कुसुम राय भी सपा के सम्पर्क में आ गयीं. लेकिन बाद में जब मुलायम सिंह के इस फैसले का इस आधार पर विरोध होने लगा कि कल्याण सिंह बाबरी मस्जिद गिराने में बराबर के हिस्सेदार थे और उनके सपा के साथ आने से मुस्लिम वोटबैंक प्रभावित हो सकता है, तब उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. इसके बाद कल्याण सिंह के बेटे राजबीर सिंह के साथ ही कुसुम राय जैसे लोग भी सपा से बाहर हो गए. लेकिन बदले हालात में एक बार फिर वे सपा के दरवाजे को खटखटाते हुए अपनी किस्मत सपा में खोज रही हैं.

बड़ा नुकसान बाद में सामने आएगा

सपा नेता की बात को मानें तो कुसुम राय के सपा में आने का असर सिर्फ उन्हीं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके साथ ही कुछ अन्य भाजपा के बड़े चेहरे सपा में सकते हैं. और अगर ऐसा होता है तो भाजपा के लिए यह एक बहुत बड़ी चोट होगी. फिलहाल तो इस चुनावी गणित तक पहुंचने के लिए पहली कड़ी यानी कुसुम राय की डील ही तय होने का इंतज़ार किया जा रहा है.

भाजपा को क्या नुकसान

भाजपा के एक नेता ने इस खबर पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर कहा कि कुसुम राय पार्टी की मास लीडर कभी भी नहीं रही हैं, इसलिए उनके सपा में जाने से पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. लेकिन इसी के साथ यह भी तय है कि कुसुम राय अपने गृहक्षेत्र आजमगढ़ और वाराणसी के आसपास की कुछ सीटों पर असर रखती हैं. खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी के आसपास फैले भूमिहार वोटों पर उनका अच्छा असर माना जाता है. अगर वे सपा के साथ जाती हैं तो इस वोट बैंक पर असर पड़ना तय है.

इसी के साथ सपा में एक महिला के चेहरे की कमी जरूर पूरी हो जायेगी. सपा में महिला नेता के नाम पर अकाल है. मुलायम सिंह की बहुओं के आलावा सपा में कोई महिला नेता अच्छी राजनीतिक हैसियत के रूप में नहीं उभर सकी है. कुसुम राय के आने से सपा की यह आवश्यकता अवश्य ही पूरी हो हो जायेगी.

इसलिए नाराज हैं कुसुम राय

भाजपा के एक शीर्ष सूत्र से मिली जानकारी के मुताबिक अब जबकि भाजपा के साथ सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है, कुसुम राय खुश नहीं हैं. इसका कारण बताया जा रहा है कि वे अपने लिए राज्य के साथ-साथ केंद्र में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका की तलाश कर रहीं थीं. लेकिन कुछ ख़ास कारणों से यूपी भाजपा की ओबीसी लॉबी ने उनकी इस मांग का पुरजोर विरोध किया और उनकी योजना सफल नहीं हो पायी. इसके बाद से ही नाराज कुसुम राय अपनी भूमिका कहीं अन्य जगह पर खोज रहीं थीं. फिलहाल उनकी इच्छा के मुताबिक़ उन्हें अखिलेश के साथ जाने में सहूलियत महसूस हो रही है.

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