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कांग्रेस ने घोषित कर दी कैंडिडेट्स की लिस्‍ट!

Updated: IST congress flag
अपने क्षेत्रों में जमकर प्रचार कर रहे हैं कांग्रेसी

सौरभ शर्मा, नोएडा।कांग्रेस की ओर से यूपी बेहाल यात्रा व खाट पर चर्चा अपने स्टार प्रचारकों के साथ जमकर चल रही है। कांग्रेस अपनी ओर से कोई कसर छोड़ने को तैयार नहीं है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस के नेता बिना टिकट मिले ही अपने आपको दावेदार मान बैठे हैं। उनके प्रचार को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे कांग्रेस की लिस्‍ट में उनका नाम फाइनल होगा। जबकि पार्टी की ओर से अभी कोई टिकट बांटने की सामने नहीं आई है। जानकारों की मानें तो ऐसा हो सकता है कि जो लोग प्रचार कर रहे हैं, उन्हें बाद में टिकट ना मिले। ऐसा हाेने पर वे बाद में पार्टी से नाराज होकर दूसरी पार्टी के नेताओं या उम्मीदवारों की मदद करने में जुट जाएं। ऐसा पहले कई बार भी हो चुका है।

बिना टिकट कर रहे हैं प्रचार
अगर बात वेस्ट यूपी की करें तो कई विधानसभाओं में कांग्रेस के नेताओं ने अपने आपको दावेदार मान लिया है। उसी के दम से उन्होंने उसी विधाानसभा में अपना प्रचार अभियान भी शुरू कर दिया है। कहीं-कहीं तो एक से ज्यादा कांग्रेसी दावेदार एक ही सीट से जुटे हुए हैं। अगर बात मेरठ कैंट विधानसभा सीट की बात करें तो वहां से तीन दावेदारों ने अपनी ओर से प्रचार करना शुरू कर दिया है, जिनमें से दो युवा नेता हैंं। इनमें एक उज्ज्वल अरोड़ा और दूसरे अवनीश काजला हैं। पिछले दो-तीन विधानसभा चुनावों से कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ चुके रमेश ढींगरा भी अंदरखाने प्रचार में जुटे हैं। राजबब्बर के करीबी माने जाने वाले रमेश ढींगरा का टिकट कंफर्म माना जा रहा है। ऐसा ही कुछ हाल सिवालखास सीट का भी है। वहां से भी कांग्रेस की ओर के कई नेता अपने आपको दावेदार मानकर चल रहे हैं।

अभी किसी के नाम की घोषणा नहीं

ताज्जुब की बात तो ये है कि अभी तक किसी के नाम भी घोषणा नहीं हुई है। पार्टी जानकारों की मानें तो अक्टूबर के अंत में लिस्ट आने की पूरी संभावना है, लेकिन उससे पहले ही अपने आपको दावेदार मानकर अपने उम्मीदवार घोषित कर देना कहां तक उचित है? ये बात गले से नहीं उतर रही है, क्योंकि प्रचार के दौरान अभी से रुपया पानी की तरह बहाया जा रहा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो हाईकमान की नजर में आने का एक तरीका है, ताकि पार्टी हाईकमान को लगे कि क्षेत्र में उसकी पकड़ बेहतर है, इसलिए टिकट उन्हें दिया जाए। जबकि पार्टी टिकट काफी सोच समझकर देगी। चुनाव भी उसी को लड़ाएगी, जिसे ऑफिशियली टिकट दिया जाएगा।

पार्टी की ओर है ध्यान, उसी का हो रहा प्रचार
इस बारे में अवनीश काजला कहते हैं कि टिकट देना या ना देना पार्टी हाईकमान के हाथों में है। हम क्षेत्र में पार्टी का प्रचार कर रहे हैं। हमारा काम पार्टी की पकड़ को आम लोगों तक मजबूत करना है। उसी दिशा की ओर काम चल रहा है। पार्टी के किसी भी कार्यकर्ता का ध्यान टिकट की ओर नहीं है। हम घर-घर जाकर लोगों से मिल रहे हैं। उन्हें राहुल गांधी और कांग्रेस की योजनाओं के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। लोगों में इस बात का विश्वास पैदा कर रहे हैं कि अगर यूपी में कांग्रेस की सत्ता आती है तो आम लोगों का कितना फायदा होगा। अभी काम पार्टी को आगे बढ़ाने का है। पार्टी आगे बढ़ेगी तो पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता आगे की ओर अग्रसर होंगे।

इसमें कोई बुराई नहीं

किठौर विधानसभा से चुनाव लडऩे की तैैयारी कर रहे अभिमन्यु त्यागी इस बारे में कहते हैं कि इस तरह से प्रचार करने में कोई बुराई नहीं है। इस बात को हर कोई जानता है हर विधानसभा से हर पार्टी से कई लोग टिकट के दावेदार होते हैं। ऐसे में सभी लोग अपने मजबूत इलाकों में अपना प्रचार करने में जुट जाते हैं। ये प्रचार कुछ दिन या कुछ महीनों का नहीं होता है। ये सालों का होता है। इससे संभावित कैंडीडेट का प्रचार तो होता ही है, साथ पार्टी का भी प्रचार होता है। इससे लोगों मैसेज जाता है कि पार्टी और उनके लोग फील्ड में एक्टिव हैंं। बात टिकट की करें तो वो पार्टी हाईकमान ही तय करेगी, जिसे टिकट मिलेगा वो ही चुनाव लड़ेगा।

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