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इस बाहुबली ने खुलेआम दी थी मुलायम को चुनौती

Updated: IST Mulayam Singh Yadav
पूर्व विधायक की हत्‍या में उम्रकैद की सजा काट रहा है यह पूर्व सांसद

नोएडा। पूर्व विधायक की हत्‍या में दोषी पाए गए और अब उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद ने कभी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव को खुलेआम चुनौती दी थी। इस चुनौती में उसे हार का सामना करना पड़ा था। पूर्व सांसद ने अपनी दबंगई के बल पर अपना सियासी मुकाम बनाया था और राजनीति में अपराध का चेहरा बन गया था। आज भले ही कोई राजनीतिक दल उसकी खबर लेने से गुरेज कर रहा हो, लेकिन सच यही है कि वह समय-समय पर सपा, बसपा से लेकर भाजपा तक के मंच की शोभा बढ़ा चुका है।

हम बता कर रहे हैं पूर्व विधायक महेंद्र सिंह भाटी की हत्या के मामले में दोषी पाए गए और देहरादून जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे डीपी यादव के बारे में। 1998 में लोकसभा चुनाव में उसने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव को चुनौती दी थी। संभल जिला मुलायम सिंह यादव का गढ़ माना जाता रहा है। मुलायम के अलावा उनके भाई प्रोफेसर रामगोपाल यादव को यहां की जनता ने लोकसभा में पहुंचाया है। 1998 में मुलायम यहां से पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरे थे। उनको यहां से डीपी यादव ने चुनौती दी लेकिन हार गए।

गौतमबुद्ध नगर जिले के सर्फाबाद गांव का रहने वाला है डीपी

डीपी यादव गौतमबुद्ध नगर जिले के सर्फाबाद गांव का रहने वाला है। इस गांव से कई पहलवानों ने नाम कमाया है। डीपी ने दबंगई के बूते राजनीति में अलग पहचान बनाई। बताया जाता है कि उसके काफिले में लग्जरी गाड़ियां शामिल रहती थी। साथ ही कई बंदूकधारी व्‍यक्ति भी साथ में चलते थे, जिनके खौफ के चलते लोग उसके खिलाफ जाने से बचते थे। दबंगई के साथ राजनीति में चमकने वाले डीपी का अपराधिक इतिहास भी बढ़ता चला गया। हत्या जैसे मामले भी डीपी पर चल रहे हैं।

दूध की बजाय शराब बेचने के धंधे में उतरा

सर्फाबाद में पैदा हुए डीपी यादव को शुरू से ही अपराध की दुनिया आकर्षित करने लगी थी। कभी दूध बेचने का कारोबार करने वाला डीपी अपनी आपराधिक सोच के कारण जल्द ही पुलिस के लिए जाना-पहचाना नाम बन गया, लेकिन जल्दी से जल्दी ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में वह दूध की बजाय शराब बेचने के धंधे में उतर आया। डीपी यादव का पूरा नाम धर्म पाल यादव है। शराब के कारोबार से उसने दौलत कमाई और फिर राजनीति में कदम रखा। आरोप लगाए जाते हैं कि उसकी शराब ने काफी लोगों की जान भी ले ली थी।

विधायक बनने के बाद बन गया मुलायम का खास

शराब माफिया की छवि बनने के बाद यूपी का जातीय समीकरण देखते हुए उसे समाजवादी पार्टी अपने लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त लगी। साथ ही अपने साथी बाहुबली महेंद्र भाटी को राजनीति में फलता-फूलता देखकर उसे भी राजनीति सुरक्षित जगह लगने लगी। डीपी 1989 में पहली बार विधायक बना और मुलायम सिंह यादव का खास बन गया। बताया जाता है कि उस समय डीपी यादव ने चुनाव में खुलेआम वोटरों को धमकाकर अपने पक्ष में वोट डलवाए थे। यह भी बताया जाता है कि उस समय डीपी के गुर्गे खुली जीप में सवार होकर वोटरों को धमकाते थे।

सपा सरकार में रहा पंचायती राज मंत्री

मुलायम सिंह के सरकार में वह भले ही सिर्फ पंचायती राज मंत्री रहा हो, लेकिन सत्ता के गलियारों में उनके नाम की धमक बिल्कुल आसमान पर थी। हर महकमे का आला अधिकारी उसे सलाम ठोंकता था। माना जाता था कि मुलायम सरकार में कोई भी काम कराना हो तो उसका रास्ता डीपी के द्वार से ही होकर जाता था।

अखिलेश ने दिखाया बाहर का रास्ता

गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर और आसपास के क्षेत्रों में जनता पर अच्छी धमक रखने वाला डीपी यादव 1991 और 1993 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की विधानसभा के लिए विधायक चुना गया। 1996 में वह लोकसभा का सदस्य बन गया, लेकिन इसी बीच समाजवादी पार्टी में रामगोपाल यादव, अखिलेश यादव और मोहन सिंह की नाराजगी उससे बढ़ती चली गर्इ और अंततः पार्टी की साफ छवि रखने की कोशिश के नाम पर उन्हें सपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

भाजपा ने पहले लगाया गले आैर फिर निकाला

2004 में भाजपा ने उसे गले लगाया, लेकिन एक कुख्यात बाहुबली के पार्टी में आने से भाजपा में बवाल मच गया और अंततः पार्टी ने उसे बाहर कर दिया। इसके बाद उसने बसपा से भाग्य आजमाया। 2009 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के धर्मेन्द्र यादव ने उसे हरा दिया। हालांकि, उसकी खराब छवि एक बार उसके रास्ते का रोड़ा बनी और बहुजन समाज पार्टी ने 2012 में उसका टिकट काटकर उसका पत्ता साफ कर दिया। इसी बीच किसी राजनीतिक पार्टी से भाव न मिलते देखकर उसने अपनी राजनीतिक पार्टी भारतीय परिवर्तन दल बना ली।

नीतीश कटारा हत्याकांड से डूब गए सितारे

दर्जनों आपराधिक मामलों में नामजद रह चुके डीपी यादव का नाम जब नीतीश कटारा हत्याकांड में आया, तब वह राष्ट्रीय मीडिया के निशाने पर आ गया। बताया जाता है कि डीपी यादव की बेटी भारती यादव नीतीश कटारा से प्रेम करती थी। जब इस बात की भनक यादव परिवार को लगी तो उन्होंने नीतीश को भारती के रास्ते से हटाने की सोची। गाजियाबाद में एक शादी में पहुंचे नीतीश कटारा का डीपी यादव के बेटे विकास और भतीजे विशाल ने अपहरण कर लिया। कुछ दिनों बाद उसका शव बुलंदशहर के खुर्जा इलाके से बरामद किया गया।

उम्रकैद की सजा काट रहा है देहरादून जेल में

नीतीश कटारा की मां नीलम कटारा ने अपने इकलौते बेटे की हत्या का मामला पूरी सिद्दत से उठाया और उसके लिए हर लड़ाई लड़ी। नीतीश की प्रेमिका भारती अपने पहले के बयान से मुकर गर्इ और 2006 में इंग्लैंड चली गर्इ, लेकिन राष्ट्रीय मीडिया के साथ मिलने के कारण यह मामला अपने अंजाम तक पहुंचा और नीतीश कटारा हत्याकांड में विकास और विशाल को उम्रकैद की सजा हुई। डीपी यादव का नाम भी शीघ्र ही विधायक महेंद्र भाटी की हत्या में सामने आया और उसे हत्या की साजिश का दोषी पाया गया। अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

पत्‍नी को लड़वाया चुनाव

इस चुनाव में भी उसने अपनी पत्‍नी उमलेश यादव को बदायूं से चुनाव लड़ाया। उसकी पत्‍नी उमलेश यादव राष्ट्रीय परिवर्तन दल से चुनाव लड़ रही हैं। हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान उसके बेटे कुणाल यादव ने अपने ऊपर जानलेवा हमले का आरोप लगाया था। कुणाल यादव का आरोप था कि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार और राज्य मंत्री ओंकार सिंह के बेटे ब्रजेश यादव ने उन पर हमला करवाया था।

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