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नोएडा से भी पुराना इतिहास है इस मंदिर का, जानिए इस मंदिर के बारे में

Updated: IST temple
कांवड़ियों के आगमन की तैयारी शहर के सबसे पुराने मंदिर ‘लाल मंदिर’ में भी खूब जोर-शोर से की जा रही है।

नोएडा। सावन का महीना शुरु होते ही कांवड़ियों के जत्थे भी कांवड़ लेने के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं कांवड़ियों के आगमन की तैयारी शहर के सबसे पुराने मंदिर ‘लाल मंदिर’ में भी खूब जोर-शोर से की जा रही है। इस प्राचीन मंदिर का इतिहास शहर से भी पुराना है, इसलिए ही इसका विशेष महत्व है।

सेक्टर-2 स्थित प्राचीन लाल मंदिर की स्थापना 1963 में हुई थी। इसमें नवदुर्गा के विभिन्न रूपों की मूर्तियां व शिव परिवार व अन्य देवी-देवताओं की आकर्षक प्रतिमाएं मौजूद हैं। जानकारों के मुताबिक जिस समय ये मंदिर बना था उस समय नोएडा का अस्तित्व भी नहीं था। जिस जमीन पर इस मंदिर का निर्माण हुआ वह किसी समय पर हरौला ग्राम सभी की जमीन हुआ करती थी और इसकी स्थापना गांव अंन्तराम अवाना ने की थी। जानकारों ने बताया कि मंदिर में सबसे पहले शिवलिंग की स्थापना की गई थी। बाद में यहां उत्तराखंड से प्रसिद्ध संत मथुरा दास आए और यहीं रहकर उन्होंने मंदिर का विस्तार करना शुरु किया। वर्ष 1985 में मंदिर में दुर्गा दरबार की स्थापना की गई। जिसके लिए स्वर्गीय गुलशन कुमार ने भी अर्थदान किया था। इसी के बाद यहां राधा-कृष्ण व अन्य प्रतिमाओं की स्थापना की गई।

क्या हैं विशेषताएं

जैसा की नाम से ही प्रतीत होता है, यह मंदिर लाल पत्थरों से बना है इसलिए ही इसका नाम लाल मंदिर रखा गया है। मंदिर की खूबसूरती भी भक्तों को यहां आने के लिए आकर्षित करती है। दरअसल, गुलशन कुमार ने फिल्मों की शूटिंग के लिहाज से इस मंदिर के आंगन को बनवाया था। यहां सुंदर क्यारियां, कई प्रकार के पेड़-पौधे व फूल लगाए गए हैं। मंदिर की इस खूबसूरती को देखकर यहां आकर फूलों की तरह ही खिल उठते हैं।

शिवरात्रि पर लगता है भक्तों का तांता

शहर का सबसे पुराना मंदिर होने के चलते यहां हर साल शिवरात्रि पर भक्तों का तांता लगता है। इस दौरान मंदिर में विशेष तैयारियां की जाती हैं। वहीं सुरक्षा के मद्देनजर भी मंदिर पर पुलिस की तैनाती की जाती है।

यहां के पुजारी पंडित विनोद शास्त्री ने बताया की मंदिर में कावड़ियों के ठहरने की व्यवस्ता की जा रही है और इस बार पीछे साल से जयदा कावड़ियों का अनुमान है। उन्होंने बताया की इस मंदिर के कपाट सुबह 4 बजे खोल दिए जाते हैं और 4:30 बजे भोलेनाथ का रुद्राभिषेक किया जाता है।

पंडित जी ने बताया की मंदिर में रोजाना सुबह 6:30 बजे यज्ञ का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया की 21 की सुबह कावड़ियां भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे और उसके बाद मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मंदिर में दूर से लोग पूजा करने आते हैं।

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