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आरएसएस ने कहा- समय चाहे जो लगे, पर राममंदिर जरूर बनेगा

Updated: IST ram mandir
राममंदिर के सहारे यूपी में वापसी करने की कोशिश में भाजपा

नई दिल्ली/नोएडा। राममन्दिर बनाना आरएसएस और इस देश के करोड़ों हिंदुओं की प्रमुखता में शामिल है। निर्माण में समय चाहे जो लगे, यह किसी भी कीमत पर बनेगा। आरएसएस के प्रमुख विचारक राकेश सिन्हा ने यह बात बुधवार को दिल्ली में कही।

अयोध्या में राम से जुड़े म्यूजियम को लॉलीपॉप करार दे चुके भाजपा नेता विनय कटियार की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि राममन्दिर का रामायण म्यूज़ियम से कुछ भी लेना-देना नहीं है। दोनों ही अलग-अलग विषय हैं। जहां तक राममन्दिर निर्माण की बात है, उसके निर्माण के लिए किसी को सरकार की कार्रवाई का इंतजार नहीं है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक और हिन्दू समाज मन्दिर निर्माण के लिए कटिबद्ध है और वह इसे अवश्य करेगा। हांं, इसके लिए समय चाहे जो भी लगे।

केंद्र सरकार बढ़ चुकी है आगे
आरएसएस की ये बातें इस सन्दर्भ में महत्वपूर्ण हो जाती हैं कि यूपी चुनाव चन्द दिनों की दूरी पर रह गए हैं। इस चुनाव से पहले ही यूपी की सत्ता की प्रमुख दावेदार समझी जा रही सपा और बीजेपी दोनों ही राम से जुड़े विषयों को लेकर आगे बढ़ने लगी हैं। यूपी की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी जहां अयोध्या में राम मेले के आयोजन पर काम कर रही है, वहीं भाजपा की केंद्र सरकार के सहारे रामायण संग्रहालय बनवाने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है।

चुनाव से पहले का तय कर रखा है समय

यहां यह भी जानना महत्वपूर्ण है कि तमाम हिन्दू संगठनों ने राममन्दिर के निर्माण के लिए नवम्बर-दिसम्बर का समय तय कर रखा है। इससे यूपी चुनाव में इसके महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में उछलने की पूरी सम्भावना है। लखनऊ में रामलीला के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा रावण का दहन करना और उनके भाषण के प्रारम्भ और अंत में जय श्री राम का उद्घोष करना इस बात का संकेत माना जा रहा था कि यूपी चुनाव राम मन्दिर के मुद्दे पर ही केंद्रित होने जा रहा है।

राममन्दिर आंदोलन से ही आगे आई भाजपा

भारतीय जनता पार्टी अपने जन्म से ही राममन्दिर निर्माण को प्रमुख मुद्दा बनाए हुए है। विश्लेषकों का मानना है कि यह राममन्दिर का मुद्दा ही था जिसकी वजह से भारतीय जनता पार्टी इतने कम समय में देश की सबसे पहली पार्टी बन गई। किसी भी अन्य मुद्दे के आधार पर किसी पार्टी का इतनी बड़ी सफलता हासिल करना सम्भव नहीं है। उत्तर प्रदेश की सत्ता से लगभग पन्द्रह साल से बाहर चल रही बीजेपी को लगता है कि यूपी में वापसी के लिए उसे इसी मुद्दे को आगे रखना पड़ेगा। इसीलिये अपने तमाम नेताओं के द्वारा वह बार-बार राममन्दिर मुद्दे को उठवा रही है।

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