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मांझे के इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर होगी सजा

Updated: IST china kite door, kite flying
उच्चतम न्यायालय ने मांझे/चीनी धागे का इस्तेमाल और बिक्री दोनों पर ही लगाई रोक

नई दिल्ली/नोएडा. आज मकर संक्रांति पर पतंग प्रेमियों को बिना मांझे के ही पतंग उड़ानी पड़ेगी. उच्चतम न्यायालय ने एनजीटी के उस आदेश पर प्रतिबन्ध लगाने से इनकार कर दिया है, जिसमें उसने मांझे के इस्तेमाल और बिक्री पर प्रतिबन्ध लगा दिया था. बता दें कि यह आदेश मांझे के साथ ही साथ चीनी धागे पर भी लगाया गया है. अगले आदेश तक मांझे/चीनी धागे का इस्तेमाल और बिक्री दोनों पर ही रोक है और ऐसा करना दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आएगा.

दरअसल राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने पेटा और कुछ पर्यावरणवादियों की अपील पर मांझे के इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध लगा दिया था. पेटा ने मांझे से पक्षियों की मौत का मामला एनजीटी के समक्ष उठाया था. वही कुछ अन्य लोगों ने मांझे के धागे से लोगों की मौत का मामला भी एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाया था.

इसके पूर्व के घटनाक्रम में एनजीटी ने एक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली सहित पूरे देश में मांझे (कांच के टुकड़े लगे हुए पतंग उड़ाने के विशेष धागे) के इस्तेमाल और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबन्ध लगा दिया था. इसके पीछे तर्क यह दिया गया था कि यह अक्सर जानलेवा साबित हो रहा है. जानकारी के अनुसार सिर्फ पिछले दो सालों में ही कम से कम पचास लोगों की जान मांझे के धागे से गला कट जाने से हो चुकी है.

बता दें कि चीनी धागे और मांझे से जब लोग पतंग उड़ाते हैं, तब पतंग काटने के बाद ये धागे अक्सर पेड़ से लटकते रहते हैं. अक्सर मोटरसाइकिल चलाने वाले लोगों के गले में फंस जाते हैं. चूंकि ये धागे आसानी से टूटते नहीं हैं, इसलिए अक्सर ये बाइक सवार के गले में फंसकर उसका गला काट देते हैं जिससे उसकी तत्काल मौत हो जाती है. पिछले साल पंद्रह अगस्त के दिन दिल्ली के एक परिवार की बेटी का गाला इसी वजह से कट गया था, तब यह मामला पूरे देश में उठा था और लोगों ने मांझे पर प्रतिबन्ध की मांग की थी.

बता दें कि पर्यावरणविदों ने कहा था कि ये धागे बरसात में भी गलते नहीं हैं, और अक्सर ये पेड़ से लटकते रहते हैं. इनके जाल में आकर अक्सर पक्षियों की मौत हो जाती है, इसलिए भी इन धागों के उपयोग पर रोक की मांग उठायी गयी थी.

मांझे के विक्रेताओं ने प्रतिबन्ध के खिलाफ उठायी थी आवाज

वहीं मांझे के विक्रेताओं ने यह कहा था कि चूंकि वे लोग पहले ही चीन से अपने सामान खरीद चुके हैं, इसलिए उनके न बिकने से उन्हें भारी नुक्सान होगा, उन्होंने इस आदेश पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग की थी. लेकिन एनजीटी ने इस आदेश को रोक लगाने से इनकार कर दिया था. इसके बाद मांझा विक्रेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में यह मांग उठायी थी. लेकिन शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मांग को खारिज कर दिया. फिलहाल अभी इस मामले पर सुनवाई जारी है और एक तारीख को एनजीटी इस मामले पर दुबारा सुनवाई करेगा.

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