Now the state animal camel

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अब ऊंट भी राजकीय पशु

Now the state animal camel

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Now the state animal camel
7/1/2014 3:38:36 AM
बीकानेर/जयपुर। अब चिंकारा के साथ-साथ ऊंट भी राजकीय पशु होगा। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अध्यक्षता में सोमवार को बीकानेर में हुई केबिनेट बैठक में ऊंट को राजकीय पशु घोषित किया गया। चिंकारा वन्यजीव श्रेणी में राजकीय पशु रहेगा, जबकि ऊंट पशुधन श्रेणी में। संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने यह जानकारी दी।
सरकार ऊंटों के लिए प्रजनन नीति भी बनाएगी। इसके साथ ही राजस्थान ऊष्ट्रवंशीय पशु (वध एवं प्रतिषेध और अस्थायी प्रजनन एवं निर्यात का विनियमन) अधिनियम 2014 को भी मंजूरी दे दी गई। इस फैसले से ऊंटों के पलायन और तस्करी पर रोक लग सकेगी।
ऊंट भी बना राज्य पशु
आखिर "राजस्थान पत्रिका" की मुहिम रंग लाई और राज्य सरकार ने ऊंट को राजकीय पशु का दर्जा देने की घोषणा कर दी। पत्रिका ने "डूब रहा रेगिस्तान का जहाज" शीर्षक से प्रदेश में ऊंटों की तस्करी, वध और कानून नहीं होने के बारे में खुलासा कर इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद कई सामाजिक संगठन ऊंट को बचाने सड़क पर उतर आए। फिर तो पूरे प्रदेश में ऊंटों की तस्करी, वध रोकने और उसे राज्य पशु का दर्जा दिलाने के लिए मांग उठी।
इस अभियान के बाद राज्य सरकार ने भी ऊंटों की सुध ली और गौवंश कानून की तरह की ऊंटों के संरक्षण के लिए कानून बनाने पर मुहर लगा दी। साथ ही राजकीय पशु का दर्जा भी दे दिया। डायबिटीज समेत अन्य बीमारियों के इलाज के लिए ऊंटनी के दूध का औषधीय अनुसंधान भी किया जाएगा। राज्य सरकार ने ऊंटनी के दूध को राष्ट्रीय खाद्य पदार्थो में शामिल करने के लिए केन्द्र सरकार से विशेष आग्रह भी किया है।
अभियान में ये खुलासे
ऊंटों के संरक्षण को लेकर चलाए गए अभियान में खुलासा किया गया था कि उत्तरप्रदेश और हरियाणा के तस्कर राज्य से कैसे ऊंटों को मारने ले जा रहे हैं। राज्य से कौडियों में ऊंट को खरीदकर उसके मांस, खाल और हड्डी को खाड़ी देशों में बेचकर तस्कर कैसे लाखों रूपए कमा रहे हैं। राज्य में हर साल कम हो रही ऊंटों की तादाद का भी उल्लेख किया गया था। यह भी बताया था कि खाड़ी देशों में ऊंटनी के दूध की डेयरियां चलाई जा रही हैं और हमारे देश में इसके दूध को मान्यता ही नहीं मिली हुई है। यह भी बताया गया था कि कैसे राजस्थान फिर से जहाजिस्थान बन सकता है।
यह होगा फायदा : राजकीय पशु का दर्जा मिलने के बाद अब ऊंटों की तस्करी और वध पर रोक लगेगी, विलुप्त होते ऊंट को बचाया जा सकेगा।
चिंकारा को वन्यजीव श्रेणी में राज्य पशु का दर्जा मिला हुआ है। अब ऊंट को पशुधन की श्रेणी में राज्य पशु का दर्जा दे दिया है। गौवंश की तरह ही ऊंटों के संरक्षण के लिए भी कड़ा कानून बना दिया गया है। ऊंटों के संरक्षण को लेकर पत्रिका का अभियान "डूब रहा रेगिस्तान का जहाज" सराहनीय था। इन खबरों से हमें भी मार्गदर्शन मिला। मीडिया की सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए पत्रिका को बधाई।-प्रभुलाल सैनी, कृषि मंत्री

ये बड़े फैसले हुए
स्टेट हाईवे अथॉरिटी
20 हजार किमी की जिला सड़कें व राज्य मार्ग मेगा हाइवे की तर्ज पर विकसित होंगे। राज्य में ईस्ट-वेस्ट मेगा हाइवे कोरिडोर का निर्माण होगा। एक लाख किमी ग्रामीण सड़कों के रखरखाव का ठेका दिया जाएगा। संवेदक को 8 वर्ष तक इन सड़कों की मेंटीनेंस करनी होगी।
यहां रजिस्ट्री से रोक हटी

यहां रजिस्ट्री से रोक हटी बाड़मेर में गत सरकार के कार्यकाल में पचपदरा व जसोल में रिफाइनरी लगाने की घोषणा के साथ अवैधानिक जमीन बेचे जाने के खुलासे के बाद पंजीयन पर रोक लगाई गई थी। यह रोक पहले हटा ली गई थी, केबिनेट बैठक में इसका अनुमोदन किया गया।

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