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चील कथा और करिश्मा

Updated: IST opinion news,
सैंकड़ों बरस पहले हमारे बड़के एक से बढ़कर एक ऐसी कहानियां लिख गए जो गाहे-बगाहे आज के माहौल में भी सटीक बैठती है। ऐसी ही एक कथा है चील कथा। आप भी सुनिए

व्यंग्य राही की कलम से

सैंकड़ों बरस पहले हमारे बड़के एक से बढ़कर एक ऐसी कहानियां लिख गए जो गाहे-बगाहे आज के माहौल में भी सटीक बैठती है। ऐसी ही एक कथा है चील कथा। आप भी सुनिए। राजाओं के दौर में एक देश में नए सेनापति का चुनाव होना था। दुश्मनों से कब युद्ध हो जाए कहा नहीं जा सकता। इसलिए महामात्य के मुंहलगे जोर दे रहे थे कि जल्दी से जल्दी इस पद पर बेहतर चुनाव किया जाए। लेकिन महामात्य निश्चिंत था। उसने कहा, मैंने सोच लिया कि नये सेनपाति का चुनाव कैसे होगा?

महामात्य के एक खासमखास ने पूछा, महाराज! यह तो बताइए तो सही कि यह चुनाव कैसे करेंगे? महामात्य ने कहा- चील उड़ाएंगे। राज्य में ढिंढोरा पिटवा दो कि सारी प्रजा किले के सामने मैदान में इक_ा हो जाए। सुबह के डंके के साथ ही किले की मीनार से एक चील उड़ेगी और वे जिस भी व्यक्ति के सिर पर जा बैठेगी वही नया सेनापति होगा।

खासमखास तो घबरा गया, बोला- स्वामी यह तो एक जुआ है। आप चील पर भरोसा कैसे कर सकते हैं। चील तो विरोधियों के सिर पर भी बैठ सकती है। महामात्य ने कहा- मेरा करिश्मा तो देखो। ठीक एक सप्ताह बाद चील उड़ाई गई। हवा में कई चक्कर लगाने के बाद चील एक आदमी के सिर पर जा बैठी। जैजैकार मच गई। नया सेनापति मिल गया। चमचे अचरज में थे। पूछने लगे, महामात्य! यह करिश्मा आपने कैसे किया? नया सेनानति चुनने में तो आपने चील से ही करतब करा दिया।

महामात्य ने कहा- मैंने जिसे पहले ही तय कर रखा था उसके माथे पर मिठाई रख दी थी। चमचों ने फिर डर कर सवाल किया, लेकिन चील तो मिठाई खाती ही नहीं। महाअमात्य ने कहा- मैंने गुलाबजामुन रखा था, जो दूर से चील को गोश्त-सा लगा। अब चमचे गद्गद् थे धन्य हो महामात्य आपने तो चील को भी बुद्धु बना दिया। अब सब आपकी ही मु_ी में रहेंगे, आपके सेवक जो ठहरे। कहानी खतम, पैसा हजम।

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