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हताश पाकिस्तान की बौखलाहट (प्रो. आलोक बंसल )

Updated: IST opinion news
पाकिस्तान की ओर से आतंकी हमलों में कमी नहीं आ रही। सर्जिकल स्ट्राइक का भी उस पर कोई असर नहीं हुआ। हमारे सैन्य शिविरों पर फिदायीन हमले की कोशिश की जा रही है

एक बार फिर पाकिस्तान से आए फिदायीन आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के नगरोटा और चमलियान में हमला किया। नगरोटा में जहां 16वीं कोर का मुख्यालय है, 166 मीडियम आर्टिलरी रेजीमेंट पर हमला किया गया। इसमें हमारे सैन्य अफसर व जवान शहीद हुए। चमलियान में हालांकि सीमा सुरक्षा बल ने तीन आतंकियों को मार गिराया गया और जब हमारे जवान आतंकी का शव उठाने जा रहे थे, तब सुनियोजित तरीके से आतंकियों ने विस्फोट किया जिससे हमारे जवान घायल हो गए। सवाल यह उठता है कि आखिर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज क्यों नहीं आ रहा?

क्या सर्जिकल स्टाइक का उस पर कोई असर नहीं हो रहा? और उससे भी महत्वपूर्ण बात यह कि आखिर अब हमारे सैन्य कैंपों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? उल्लेखनीय पूर्व में उरी में इसी तरह का हमला हुआ था। हमारे सैनिक का शव क्षत-विक्षत करने के विरोध में जब माछिल में भारतीय सेना की ओर से मुंहतोड़ जवाब दिया गया तो घबराहट में पाकिस्तान की ओर से ही कार्रवाई रोकने का आग्रह किया गया। तब जाकर भारत ने जवाबी कार्रवाई बंद की थी।

इन सारी स्थितियों को देखकर तो ऐसा लगता है कि पाकिस्तान और उसकी सेना में जबर्दस्त हताशा का माहौल है। भारत द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए आतंकी शिविरों को निशाना बनाए जाने के बाद से वह बौखलाया हुआ है। न तो पाकिस्तान सेना इसे स्वीकार कर पा रही है और न ही इसका पूरी तरह से खंडन कर पा रही है। सर्जिकल स्ट्राइक पर अलग-अलग किस्म के बयान इसी बात को दर्शाते हैं। अपनी निराशा को छुपाने के लिए पाकिस्तान की ओर से इस तरह की कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है।

इसके अलावा एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान के जनरल राहील शरीफ 29 नवंबर को सेवानिवृत्त तो हो गए और पाकिस्तान में उनके काम को लेकर कई कसीदे पढ़े जा रहे हैं लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक, उनके कामकाज में नाकामयाबी के तमगे की तरह है। वे इस बात को कैसे भूल सकते हैं।

यद्यपि उन्होंने अपनी ओर से कुछ नहीं कहा कि वे अपने कार्यकाल को बढ़ाना चाहते हैं लेकिन वे चाहते यही रहे कि उन्हें कुछ कहना न पड़े और सीमा पर ऐसे हालात उत्पन्न कर दें ताकि उनका कार्यकाल बढ़ा दिया जाए। पाकिस्तान की ओर से उरी हमला हुआ और इसके जवाब में हुए सर्जिकल स्ट्राइक ने पाकिस्तान सेना और आतंकियों को हताशा में डुबो दिया। पाकिस्तानी जनमानस के टूटते मनोबल को संभालने की आड़ में लाभ उठाने के उद्देश्य से राहील शरीफ सीमा पर अधिक तनाव उत्पन्न कर, कार्यकाल में विस्तार पाने के इच्छुक रहे। कार्यकाल के आखिरी दिन तक उन्होंने भारत के विरुद्ध जहर उगला और इस तरह की कार्रवाई को अंजाम दिया।

भारतीय सेना के बेस कैंपों पर हमले करके पाक सेना समर्थित फियादीन आतंकी यह भी जताने की कोशिश करना चाहते हैं कि भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक में उनके शिविरों पर हमला किया तो वे भी उसी तरह का बदला लेंगे। एक तो यह समझने की फियादीन हमले में नुकसान तो ज्यादा होता ही है। लेकिन, चिंता की बात यह भी है कि हमारी सतर्कता में कहीं तो चूक हो ही रही है। इसे और कड़ी किए जाने की आवश्यकता है। इस तरह का हमला बेहद गंभीर मामला है। भारत क्या, कोई भी देश नहीं चाहेगा कि उसके सैन्य ठिकाने पर किसी किस्म का हमला हो। हालांकि आतंकियों को सेना की ओर से उचित जवाब दिया गया है लेकिन इस तरह के हमले अधिक सतर्कता रखने की चेतावनी देते हैं।

जहां तक हमारे सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान को मिलने वाले सबक का सवाल है, तो उसे समझ आने में अभी और समय लगने वाला है। जरूरत इस बात की है कि भारत एक सर्जिकल स्ट्राइक से चुप न बैठे बल्कि जरूरत पड़ते ही और सर्जिकल स्ट्राइक भी करे। इसके अलावा पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार घेरने की आवश्यकता है। उसे कूटनीतिक और आर्थिक तौर पर अलग-थलग करने की आवश्यकता है। उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएं, इस बात के प्रयास करने होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधु नदी के जल संदर्भ में कहा है कि भारत के अधिकार वाले पानी को वहां नहीं जाने देंगे। वास्तव में यह प्रायोगिक हथियार नहीं बल्कि कूटनीतिक दबाव का हथियार है। मुझे लगता है कि दबाव बनाने के लिए पाकिस्तान के साथ वार्ता के दौर में यह विकल्प हमेशा खुला रखना चाहिए।

एक सवाल यह भी है कि राहील शरीफ के बाद पाकिस्तान सेना के नए चीफ बने कमर जावेद बाजवा का रुख भारत के लिए कैसा रहेगा? उन्हें बहुत ही अनुशासित और लोकतंत्र का समर्थक माना जाता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में भारत के पूर्व सेना प्रमुख बिक्रम सिंह के साथ काम किया था, उनके मुताबिक बाजवा का प्रदर्शन सराहनीय था। मेरा मानना है कि नया पद हासिल करते ही व्यक्ति का व्यक्तिव बदल जाता है। यद्यपि वे भारत को घृणा की नजर से नहीं देखते लेकिन हमें सावधान रहने की तो जरूरत है।

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