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शर्मनाक बयान !

Updated: IST digvijay singh
महासचिव दिग्विजय सिंह ने फिर अजीब बयान दे डाला। कह रहे हैं कि आतंककारी भी कश्मीरी युवकों को मारते हैं और सेना भी यानी कांग्रेस के महासचिव देश की सेना की तुलना आतंककारियों से कर रहे है

सब कुछ लुटाकर भी होश में नहीं आने वाले को अगर इन दिनों कांगे्रस कहें तो शायद कुछ गलत नहीं होगा। लोकसभा चुनाव बाद तीन सालों में महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, असम और उत्तराखंड, मणिपुर सरीखे राज्यों की सत्ता से बेदखल हो चुकी कांग्रेस अब भी नहीं संभलना चाहती। मतदाता कांग्रेस को नकार रहे हैं पर कांग्रेस नेता हैं कि बड़बोलेपन से बाज ही नहीं आ रहे।

पहले भी बड़बोले बयानों से पार्टी को असमंजस में डालते रहे पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने फिर अजीब बयान दे डाला। कह रहे हैं कि आतंककारी भी कश्मीरी युवकों को मारते हैं और सेना भी यानी कांग्रेस के महासचिव देश की सेना की तुलना आतंककारियों से कर रहे हैं। इसके पीछे दिग्विजय का खुराफाती दिमाग है या वे किसी की शह से ऐसा कह रहे हैं, ये तो कांग्रेस जाने लेकिन देश की जनता ऐसे बयान सुनकर जरूर गुस्से में है।

पार्टी लाइन के खिलाफ बाटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी कह चुके दिग्विजय सेना के बारे में ऐसे शर्मनाक बयान क्यों देते हैं? देश दिग्विजय नहीं बल्कि कांग्रेस से जानना चाहता है। दिग्विजय जैसे नेता ये समझते हैं कि ऐसे बयानों से अल्पसंख्यक वोट उन्हें मिल जाएंगे तो वे मुगालते में हैं।

उत्तरप्रदेश के चुनाव नतीजे कांग्रेस को आईना दिखा रहे हैं लेकिन पार्टी है कि हकीकत समझना ही नहीं चाहती या उसे स्वीकारना नहीं चाहती। कश्मीर में जो हो रहा है, देश उसे देख रहा है। स्कूली छात्र उन्हीं सुरक्षा बलों पर पथराव कर रहे हैं जिन्होंने पिछले साल कश्मीर में आई बाढ़ में इन्हीं कश्मीरियों को डूबने से बचाया था।

घाटी में सुरक्षा बलों के साथ सरेआम दुव्र्यवहार किया जा रहा है। इसकी निंदा के बजाय दिग्विजय सिंह सरीखे नेता पत्थरबाजों का समर्थन कर रहे हैं। कश्मीर मुद्दा, राजनीतिक मुद्दा नहीं है। केन्द्र या कश्मीर में किसी भी पार्टी की सरकार रही हो लेकिन इस मुद्दे पर पूरा देश एकजुट रहा है।

यह जानते-समझते हुए कि देश पहले है, राजनीतिक दल बाद में। कांग्रेस ने तो पांच दशकों तक देश पर शासन किया है। पार्टी नेता कश्मीर घाटी के हालात अच्छी तरह से समझते हैं। फिर क्यों दिग्विजय सरीखे नेताओं की जुबान पर लगाम नहीं लगाई जा रही। देश के खिलाफ बोलने वाले किसी भी व्यक्ति का समर्थन करना भी देशद्रोह से कम नहीं माना जा सकता।

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