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अब भी कठघरे में शरीफ

Updated: IST Nawaz Sharif,
भ्रष्टाचार के आरोपों से शरीफ बरी नहीं हुए हैं। जब से उन्होंने सत्ता की बागडोर संभाली, घरेलू राजनीतिक विरोधाभासों ने उन्हें चैन से काम नहीं करने दिया

नवाज शरीफ और पाकिस्तान फिलहाल बड़े संकट से बच गए लगते हैं। भ्रष्टाचार के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री की कुर्सी तो नहीं ली पर जांच आयोग के गठन का आदेश देकर शरीफ को आरोपों के कठघरे में रखा है। पनामागेट मामले में शरीफ पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने संयुक्त जांच दल के गठन के आदेश दिए हैं। दल दो माह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा कि भ्रष्टाचार में शरीफ और उनका परिवार लिप्त है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में हालांकि दो न्यायाधीशों ने शरीफ को प्रधानमंत्री पद के अयोग्य ठहराए जाने की बात कही थी लेकिन तीन न्यायाधीशों का मत था कि जांच के लिए संयुक्त दल का गठन किया जाए। मतलब साफ है कि भ्रष्टाचार के आरोपों से शरीफ अभी बरी नहीं हुए हैं और तलवार उन पर लटकी रहेगी। शरीफ ने 2013 में पाकिस्तान की बागडोर संभाली थी लेकिन आंतरिक राजनीति के विरोधाभासों ने उन्हें कभी चैन से काम करने नहीं दिया।

क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने शरीफ को पद से हटाने को लेकर देशव्यापी आंदोलन चलाए। इमरान को लोगों का समर्थन हासिल भी हुआ। शरीफ के खिलाफ जांच दल की रिपोर्ट उनका राजनीतिक भविष्य तय करेगी। रिपोर्ट में अगर शरीफ अथवा उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित हो जाते हैं तो उनकी स्थिति कमजोर होगी। पाकिस्तान में अगले साल आम चुनाव होने हैं।

इस एक साल के भीतर अगर शरीफ कानूनी दांवपेंचों में घिरे तो ये उनके साथ पाकिस्तान के लिए भी संकट का कारण बनेगा। न्यायाधीशों ने शरीफ और उनके परिवार का पैसा कतर पहुंचने के आरोपों की गहराई से जांच करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से शरीफ को तात्कालिक राहत तो मिली है लेकिन कानूनी लड़ाई अभी बंद नहीं हुई।

भविष्य में अगर शरीफ को कुर्सी छोडऩी पड़ी तो उनकी जगह लेने वाला उनकी पार्टी में कोई दिखाई नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को शरीफ और उनके समर्थक भले अपनी जीत के रूप में देख रहे हों लेकिन पाकिस्तान के विपक्षी दल शांत बैठने वाले नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्षी दलों ने शरीफ से इस्तीफे की मांग कर डाली है। ये मांग और जोर पकड़ेगी। हालात को देखकर कहा जा सकता है कि पाकिस्तान एक बार फिर उठापटक के लंबे दौर से गुजरने वाला है।

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