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सरकारी उपेक्षा से टूटी पूनम अब नहीं मांगेगी नौकरी

Updated: IST poonam chauhan
सरकारी उपेक्षाओं से हारी यूपी की अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉलर अब सरकार से कोई नौकरी नहीं मांगेंगी, क्योंकि वो जिंदगी से हार गई हैं।

नई दिल्ली। वो टूटी थी, हारी नहीं। वो सिस्टम से खफा थी, लेकिन हालात से नहीं। सपनें उसने भी देखे थे, उनको पूरा भी किया, लेकिन बदले में उसको मिली सिर्फ बेरूखी। हारना उसने छोड़ा नहीं था। हां सरकारी उपेक्षा से टूटी उत्तर प्रदेश के वाराणसी की पहली अंतर्राष्ट्रीय महिला फुटबॉलर पूनम अब नौकरी नहीं मांगेगी, क्योंकि पूनम हालातों से नहीं जिंदगी से हार गई।

अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉलर का दुख

पूनम चौहान का मंगलवार रात बनारस के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। बुधवार को पूनम को अंतिम विदाई देने के लिए वाराणसी के शिवपुर स्थित विवेक सिंह मिनी स्टेडियम में पूनम के पार्थिक शरीर को रखा गया। जहां खिलाड़ियों समेत अन्य लोगों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। दो मिनट का मौन रखकर मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना किया गया।

काफी समय से थी बीमार

यूपी की पहली महिला इंटरनेशनल फुटबालर पूनम चौहान पिछले हफ्ते से डेंगू के चलते बीमार थीं, सोमवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। खराब तबीयत की जानकारी मिलते ही वहां कई अधिकारी और खिलाड़ी भी मदद के लिए पहुंचे थे। सभी ने आश्वस्त किया था की पूनम की जान बचाने के लिए जितने खून की जरूरत है वह देने के लिए तैयार हैं, लेकिन सारे इंतजाम कम पड़ गए।

सिस्टम से हारकर स्टेशनरी की दुकान संभाल रही थी

पूनम ने कई अंतराष्ट्रीय फ़ुटबाल प्रतियोगिताओ में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। कई बार नौकरी की गुहार लगाने के बाद भी पूनम को नौकरी नहीं मिली थी। उसके साथ की सभी खिलाड़ियों की सरकारी नौकरी लग गई थी, जिससे पूनम की उम्मीदें टूटने लगी थी। उसने कई बार अखिलेश सरकार से भी गुहार लगार्इ्, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आखिरकार वह अपने पिता की स्टेशनरी दुकान में ही अपने पिता का साथ देने लगी।

पिता भी रहे फुटबॉलर

वाराणसी के शिवपुर के चुप्पेपुर में पूनम का परिवार रहता है। 28 वर्षीय पूनम अविवाहित थीं। पांच भाई बहनों में पूनम सबसे बड़ी थीं। पूनम के पिता मुन्नालाल फ़ुटबाल खिलाडी रहे हैं। पिता मुन्नालाल की शिवपुर बाजार में स्टेशनरी की दुकान है। जहां पूनम भी फुर्सत के समय में पिता की मदद किया करती थी। पूनम की बहन संध्या चौहान यूपी फ़ुटबाल टीम की कप्तान है और छोटी बहन पूजा चौहान अंतराष्ट्रीय फ़ुटबाल की जूनियर खिलाड़ी हैं। भाई कृष्णा चौहान राष्ट्रीय सब जूनियर कैम्प में है और एक भाई प्रशांत चौहान स्पोर्ट्स हास्टल लखनऊ में हॉकी का खिलाड़ी है। पूनम वाराणसी के संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में अंशकालिक प्रशिक्षक थीं। अभी मंगलवार को ही पूनम को दो महीने के मानदेय का चेक मिलना था।

कई प्रतियोगिताओं में दिखाया जौहर

पूनम ने 2010 में ढाका में हुई साऊथ एशियन गेम्स में टीम का हिस्सा थी। इस टीम ने गोल्ड मेडल जीता था। नई दिल्ली में 2007 एशियन फेडरेशन कप टीम की भी सदस्य थी। 2007 मलेशिया में हुए एशियन चैम्पियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। सीनियर नेशनल चैम्पियनशिप उत्तर प्रदेश 2002, 2003, 2004, 2005, 2008, 2009, 2010, 2016 में भी अपने टीम के लिए खेला था। पूनम ने 2002 और 2003 में जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप के लिए खेला था। पूनम कोचिंग के लिए "सी" और "डी" लाइसेंस कोर्स करने वाली उत्तर प्रदेश की पहली महिला फ़ुटबाल कोच बनी थी।

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