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पंच पर्वत और साइको पिलयिन वाल को विश्व हेरिटेज साइट घोषित करने होगी पहल

Updated: IST Patna Museum
बुद्ध की अस्थि आज भी पटना के पुराने म्यूजियम में है, पर उसे देखने की छूट सभी को नहीं है।

पटना। बिहार में कई ऐसी धरोहरें हैं जो प्राचीन काल से हैं। जिनकी देखरेख और उन्हें लोगों के देखने लायक बनाने की पहल लगातार की जाती रही है। लेकिन इसके बाद भी उन्हें विश्व हेरिटेज साइट घोषित कराने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता है। मंगलवार को यक्षिणी की मूर्ति मिलने के शताब्दी वर्ष को लेकर आयोजित कला उत्सव को संबोधित करते हुए सीएम नीतीश ने कहा कि नालंदा विवि के खंडहर को यूनेस्को से विश्व हेरिटेज साइट घोषित कराने के लिए बिहार सरकार को लंबा संघर्ष करना पड़ा था।

हालांकि इसके लिए वोटिंग की भी नौबत आयी थी, जिसमें सफलता हासिल हुई। अब राज्य सरकार राजगीर के पंच पर्वत और साइको पिलयिन वाल को विश्व हेरिटेज साइट घोषित कराने की पहल करेगी। उन्होंने राजगीर में पांडू पोखर और घोड़ा कटोरा के विकास के साथ ही वहां बुद्ध की सबसे ऊंची प्रतिमा लगाने की भी घोषणा की है।

उन्होंने कहा कि राजगीर के विकास के लिए केंद्र सरकार तैयार नहीं होगी, तो हम अपने बूते विकास करेंगे। वैशाली, बक्सर,

मधुबनी और बलराजगढ़ को भी विश्व पर्यटन के मानचित्र पर लाने के लिए हम संघर्ष करेंगे। इस समारोह में मुख्यमंत्री ने 42 वरिष्ठ कलाकारों को सम्मानित किया और ‘बिहार कला पुरस्कार’ और ‘दीदारगंज यक्षिणी’ पुस्तक का लोकार्पण भी किया।

नई पीढ़ी होगी संस्कृति से रूबरू

सीएम ने कहा कि नयी पीढ़ी में हमारी सरकार ने इतिहास व कला-संस्कृति के प्रति जागृति पैदा करने का संकल्प लिया है। बिहार कला दिवस एक साल तक मनाने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान हर जिले में कार्यक्रम होंगे और विभिन्न कला से जुड़े कलाकारों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ कमाई की मानसिकता को त्यागना होगा।

इसके साथ ही आगे बढ़ने के लिए हमें इतिहास को भी जानना होगा। बिहार के गर्भ में इतिहास की अमूल्य धरोहरें है। प्राचीन तेलहड़ा विवि को लेकर राज्य सरकार खुद खुदाई करा रही है। नालंदा और बिहारशरीफ में भी खुदाई हो रही है। समारोह में कला-संस्कृति मंत्री शिवचंद्र राम ने कहा कि बिहार कला-संस्कृति, पेंटिंग और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर का म्यूजियम

सीएम ने कहा कि पटना में बन रहा बिहार म्यूजियम अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जाएगा। म्यूजियम में जगह के संकट को

देखते हुए इसके निर्माण का निर्णय लिया है। इसमें कई दुर्लभ और अमूल्य धरोहरें होंगी। जिससे नयी पीढ़ी इतिहास से रू-ब-रू होगी। बुद्ध की अस्थि आज भी पटना के पुराने म्यूजियम में है, पर उसे देखने की छूट सभी को नहीं है। नए म्यूजियम में सभी लोग इसका दीदार कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि वैशाली में मड स्तूप और बुद्ध सम्यक भी बनेगा।

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