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महाकाल के आंगन में 17 क्विंटल फूलों से खेली होली

Updated: IST mahakal holi
भगवान महाकालेश्वर मंदिर में महाराष्ट्र के भक्तों की ओर से 17 क्विंटल फूल उडाकर होली खेली गई

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर मंदिर में महाराष्ट्र के भक्तों की ओर से 17 क्विंटल फूल उडाकर होली खेली गई। महाकाल के पुजारी प्रदीप गुरू ने बताया कि नांदेड़ (महाराष्ट्र) के महाकाल भक्त केशव मालेवार की ओर से बाबा महाकाल का भांग, सुखे मावे का श्रृंगार किया गया और 17 क्विंटल कुंद, गुलाब, मोगरे, गेंदे के फूल के साथ गुलाल उड़ाकर होली खेली गई।

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उन्होंने बताया कि यह भक्तमंडली पिछले 17 वर्षों से बाबा महाकाल के साथ होली खेलने आते हैं। इस बार 70 भक्तों की टीम महाराष्ट्र से होली खेलने आई थी। उन्होंने बताया कि वे कोलकाता से मखमली जरी के वस्त्र लाए जो गर्भगृह में महाकाल, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय व नंदी को पहनाए गए और एक क्विंटल प्रसादी का वितरण किया गया।

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आनंदपुर साहिब में भी मनाया 'होला मोहल्ला'

सोमवार को सिखों के पवित्र शहर आनंदपुर साहिब में हुए 'होला मोहल्ला' में लाखों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। होला मोहल्ला के अवसर पर सैकड़ों की संख्या में निहंग सिखों ने रणकौशल गतके का प्रदर्शन किया। यहां स्थित तख्त केशगढ़ साहिब के आस-पास जनसमुद्र नजर आ रहा था। हर तरफ पुरुष, महिलाएं व बच्चों का हुजूम था।

अमृतसर स्थित हरमिंदर साहिब (स्वर्ण मंदिर) के बाद सिखों के दूसरे सर्वाधिक पवित्र धर्मस्थल तक के सभी रास्तों पर सिख श्रद्धालु नजर आ रहे थे। बसें, ट्रक, ट्रैक्टर ट्राली, दोपहिया और तमाम अन्य वाहनों पर लोग सवार होकर यहां पहुंचे।

कुछ विदेशियों के साथ यहां पहुंचे पर्यटक हरकीरत सिंह ने कहा, ''यह सच में उल्लास व पर्व की रंगारंग स्थिति है। कुछ निहंगों ने बेहद मजेदार और विशाल पगडिय़ां बांध रखी थीं, जिन्हें धार्मिक प्रतीकों से सजाया गया था।''

इसी धर्मस्थल पर सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह ने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की थी, जिसे आज सिख धर्म के नाम से जाना जाता है। होला मोहल्ला की शुरुआत गुरु गोविंद सिंह ने साल 1701 में की थी। अपने साथियों को युद्ध के लिए सदैव तत्पर रखने के उद्देश्य से उन्होंने युद्धकौशल के अभ्यास के लिए इसकी शुरुआत की थी।

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