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राष्ट्रपति चुनाव: आडवाणी.. जो हो ना सका

Updated: IST advani not race in rashtrpati chunav
बीजेपी के लौहपुरुष माने जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर प्रेसिडेंट इन वेटिंग हो गए।

नई दिल्ली:बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद एनडीए ने अगले राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बिहार के राज्यपाल और बीजेपी के दलित चेहरा रामनाथ कोविंद के नाम की घोषणा की गई है। लेकिन पिछले कुछ समय से बीजेपी या संघ के भीतर राष्ट्रपति पद की दौड़ में कई महारथियों के नाम के कयास लगाए जा रहे थे। इसमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और दलित चेहरा थावरचंद गहलोत के नाम सुर्खियों में थे। इसके बाद आदिवासी चेहरा द्रोपद्री मुर्मू का नाम भी जोरों से उछला। इसके अलावा राष्ट्रपति की रेस में मोहन भागवत, सुषमा स्वराज समेत कई नाम चल सुर्खियों में बनते रहे। लेकिन अचानक लो प्रोफाइल और दलित चेहरा रामनाथ कोविंद के नाम पर मोदी ने मुहर लगा दी।

आडवाणी गुट को बड़ा धक्का
गौरतलब है कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह माना जा रहा था कि देश के अगले राष्ट्रपति लालकृष्ण आडवाणी होंगे । लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लाल कृष्ण आडवाणी के लिए बीजेपी और संघ के तमाम नेता लामबंद थे। सभी ने कोशिश की देश के अगले राष्ट्रपति के तौर पर आडवाणी नजर आएं। लेकिन राष्ट्रपति उम्मीदवार के ऐलान के बाद आडवाणी गुट को बड़ा धक्का लगा है।

आडवाणी समर्थकों का क्या?
आडवाणी गुट के शत्रुघ्न सिन्हा राष्ट्रपति पद के लिए आडवाणी को सबसे योग्य उम्मीदवार बता चुके हैं। शत्रुघन सिन्हा ने कई ट्वीट कर कहा था कि राष्ट्रपति पद के लिए आडवाणी से बेहतर विकल्प कोई और नहीं हो सकता। इसके अलावा बीजेपी कार्यालय के बाहर आडवाणी के पक्ष में पोस्टर भी लगाए गए थे। लेकिन, अब देखना दिलचस्प होगा कि एक पहले पीएम इन वेटिंग फिर प्रेसिडेंट इन वेंटिग के बाद अब आडवाणी और उनके समर्थक क्या कदम उठाते हैं।

थावरचंद गहलोत थे पसंद
वहीं थावरचंद गहलोत के नाम पर भी चर्चा काफी जोरों पर चल रही थी। माना जाता रहा कि मोदी अगर किसी दलित चेहरे को राष्ट्रपति भवन में भेजने का मन बनाते हैं तो थावर चंद गहलोत उनकी पसंद हो सकते हैं। क्योंकि थावर चंद गहलोत दलित हैं।

द्रोपदी मुर्मू पर भी सहमति नहीं
इधर झारखंड की राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू का भी नाम राष्ट्रपति पद के लिए सुर्खियों में रहा। बताया जा रहा था कि द्रोपदी मुर्मू आदिवासी नेता हैं और बेदाग छवि की महिला हैं। उनका जीवन सादगी भरा है। उनके पास अभी तक बैंक अकाउंट नहीं है। उम्मीद की जा रही थी मोदी इस पर विचार कर सकते हैं। लेकिन कहते हैं कि पीएम मोदी की सूची वहां शुरू होती है जहां बाकी लोगों की सूची खत्म हो जाती है। मोदी ऐसे लोगों को ज़्यादा पसंद करते आए हैं जो बोलें कम और काम ज़्यादा करें। संघ भी इस नाम से खुश है क्योंकि कोविंद की जड़ें संघ में निहित हैं। रामनाथ कोविंद स्वयंसेवक हैं। भाजपा के पुराने नेता हैं। संघ और भाजपा में कई प्रमुख पदों पर रहे हैं।

2019 की तैयारी
रामनाथ कोविंद फिलहाल बिहार के राज्यपाल हैं। गरीब और दलित पृष्ठभूमि के साथ-साथ वे गरीबों, पिछड़ों और दलितों के लिए हमेशा संघर्ष करते रहे हैं। बीजेपी इसे एक ओर दलित वोट बैंक तो दूसरी ओर 2019 में सत्ता वापसी को भी देख रही है। साथ ही बिहार जैसे राज्य में अपनी ज़मीन तैयार करने में फिर से जुटी है।

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