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..तो बीजेपी को इसलिए पसंद आए कोविंद

Updated: IST rashtrapati chunav ramnath kovind
बीजेपी ने एक तरफ जहां दलित चेहरा को राष्ट्रपति बनाकर खुद को दलित हितैषी बताने की कोशिश की है वहीं आने वाले चुनाव में दलित वोटों को साधने का भी काम किया है।

नई दिल्ली। राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद का नाम पेश कर भाजपा ने तुरुप का ऐसा पत्ता चला है जो उसके राजनीतिक सफर में कई तरह से मददगार साबित होगा। इस तरह से भाजपा ने अपनी जीत का अंतर बढ़ाने से ले कर दलितों को अपनी ओर करने तक की कोशिश की है।

बड़ी जीत दर्ज कर सकें
भाजपा को अपनी जीत का तो विश्वास पहले ही हो चुका था।लेकिन वह अपने पक्ष में बने राजनीतिक माहौल को और मजबूत करने के इरादे से इस जीत को भी जोरदार बनाना चाहती थी। ऐसे में उसने वो उम्मीदवार पेश कर दिया है जिससे उसे अधिकतम वोट मिल सकें।

दलितों में बढ़े समर्थन
कोविंद को भले ही देश में बहुत कम लोग जानते रहे हों, लेकिन भाजपा उन्हें दलित नेता के तौर पर प्रचारित करेगी। अभी से उसके नेताओं ने कहना शुरू कर दिया है कि कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बना कर भाजपा ने साबित कर दिया है कि
दलितों की सबसे बड़ी हितचिंतक वही है। भाजपा को उम्मीद है कि उत्तरप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में वह दलित वोटबैंक में अपना वर्चस्व कायम कर सकेगी।

विपक्षियों की मुश्किल बढ़ी
भाजपा की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर दलित नेता का नाम लाने के बाद विपक्षियों के लिए इसका विरोध मुश्किल हो गया है। पहले से तय गोपाल गांधी की बजाय अब उसे किसी दलित नेता का नाम ही पेश करने की मजबूरी होगी। ऐसे में वे
एकमत हो कर किसी नाम पर पहुंच सकेंगे यह जरूरी नहीं रह गया है।

कानूनी जानकारी
देश में कोई भी कानून संसद में पारित होने के बाद तो मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास जाता ही है, कई बार देश के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति के लिए नियम-कानूनों की बारीकियां समझना बहुत जरूरी हो जाता है। कोविंद का वकालत के
पेशे में भी रहना उनके लिए मददगार साबित हुआ है।

विवादों से दूर
लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में होने के बावजूद कोविंद पर कोई गंभीर आरोप नहीं हैं ना ही वे कभी किसी बड़े विवाद में रहे हैं।

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