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तेलंगाना के विधायकों का मासिक वेतन 163 प्रतिशत बढ़ा

Updated: IST Telangana Assembly
विधानसभा क्षेत्र भत्ता 83 हजार रुपए से बढ़ाकर 2.30 लाख रुपए कर दिया गया है

हैदराबाद। नव निर्मित राज्य तेलंगाना में विधायकों को अब पहले के 95 हजार रुपए मासिक वेतन-भत्ते की जगह 2.50 लाख रुपए मिलेंगे। विधानसभा ने मंगलवार को वेतन-भत्ता बढ़ाने से संबंधित एक विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर

दिया। राज्य के दोनों सदनों के सदस्यों को अब पहले से 163 फीसदी अधिक वेतन-भत्ता मिलेगा।

तेलंगाना पेमेंट ऑफ सैलरीज एंड पेंशन एंड रिमूवल ऑफ डिस्क्वालिफिकेशंस (अमेंडमेंट) विधेयक-2016 के मुताबिक, मासिक वेतन को 12 हजार रुपए से बढ़ाकर 20 हजार रुपए कर दिया गया है। विधानसभा क्षेत्र भत्ता 83 हजार रुपए से

बढ़ाकर 2.30 लाख रुपए कर दिया गया है। विधेयक में विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, मुख्य मंत्री, मंत्रियों, मुख्य सचेतक, सचेतक और दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों का वेतन बढ़ा दिया गया है।

मुख्यमंत्री और अन्य के वेतन-भत्ते में 60 से 72 फीसदी की वृद्धि की गई है। विधायी कार्य मंत्री हरीष राव ने विधेयक पेश किया, जिसे हर पार्टी के सदस्यों ने समर्थन दिया और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने इस वृद्धि को सही ठहराया।

मुख्यमंत्री का वेतन-भत्ता 2.44 लाख रुपए से बढ़ाकर 4.21 लाख रुपए कर दिया गया। वेतन 16 हजार रुपए से बढ़ाकर 51 हजार रुपए कर दिया गया, जबकि विधानसभा क्षेत्र भत्ता 83 हजार रुपए से बढ़ाकर 2.30 लाख रुपये कर दिया गया।

देश में होगा सर्वाधिक वेतन

विधायकों के लिए इसे देश में सर्वाधिक वृद्धि बताया जा रहा है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने गत वर्ष विधायकों का वेतन-भत्ता बढ़ाकर 2.10 लाख रुपए मासिक कर दिया था। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने वृद्धि की आलोचना को

खारिज करते हुए संवाददाताओं को इसे तूल न देने की सलाह दी और कहा, ऐसा कर आप अपने ही विधायकों को नीचा दिखा रहे हैं।

1.30 लाख करोड़ के बजट के आगे कुछ नहीं

इस वृद्धि से राज्य का सालाना खर्च 42.67 करोड़ रुपए बढ़ जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राशि 1.30 लाख करोड़ रुपए के बजट के सामने कुछ भी नहीं है। उन्होंने वृद्धि को वाजिब ठहराते हुए कहा कि यह विधायकों के लिए भ्रष्टाचार से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय और सकारात्मक योगदान करने के लिए और उनकी जरूरतें पूरी करने के लिए आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा, आज का युग आजादी के बाद के दिनों से अलग है। आज त्याग की जरूरत नहीं है। हम सभी राष्ट्र निर्माण कार्य में संलग्र हैं।

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