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सहारा-बिड़ला मामले में PM के खिलाफ SC का सुनवाई से इनकार 

Updated: IST Supreme Court terms ‘unfair’ Prashant Bhushan’s de
सुप्रीम कोर्ट ने कम्प्युटर शीट को साक्ष्य नहीं माना और प्रशांत को ठोस सबूत रखने का ऑर्डर दिया था। हालांकि ठोस सबूत नहीं आने पर बुधवार को कोर्ट ने मामला डिसमिस कर दिया।

नई दिल्ली. सहारा-बिड़ला मामले में पर्याप्त सबूतों के अभाव की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री के खिलाफ मामले को डिसमिस कर दिया। कोर्ट ने मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग को भी खारिज कर दिया। बुधवार को जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अमिताव रॉय की नई बेंचने कहा, जो साक्ष्य प्रशांत ने कोर्ट में रखे हैं वह प्रधानमंत्री और अन्य के खिलाफ पर्याप्त नहीं हैं। मौजूदा सबूतों के आधार पर जांच के लिए आदेश देना ठीक नहीं है। उधर, दिल्ली हाईकोर्ट के सीनियर लॉयर अरविंद ने कम्प्यूटर शीट को साक्ष्य नहीं मानने पर सवाल उठाया है। बता दें कि एक एनजीओ की ओर से प्रधानमंत्री पर लोकसभा चुनाव से पहले सहारा और बिड़ला जैसी कंपनियों से करोड़ों रुपये लेने के मामले में याचिका दायर कर प्रशांत ने एसआईटी गठित कर जांच की मांग की थी।

आयकर विभाग की एक कथित कार्रवाई में जब्त कम्प्यूटर शीट की एंट्रीज में कुछ नाम और उन्हें घूस के तौर पर दिए गए रुपयों के डिटेल सामने आए थे। आरोप था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत शीला दीक्षित और कुछ अन्य तत्कालीन मुख्यमंत्रियों को रुपये दिए गए। कम्प्यूटर शीट को साक्ष्य के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था। इससे पहले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इसे साक्ष्य नहीं माना और प्रशांत को दूसरे ठोस सबूत रखने वक्त दिया। पर्याप्त ठोस सबूत नहीं रखने पर बुधवार को कोर्ट ने मामला ही डिसमिस कर दिया। माना जा रहा है कि हवाला केस को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट ने डायरी को सबूत मानने से इनकार कर दिया। सबसे बड़ा सवाल : आखिर कम्प्यूटर शीट साक्ष्य क्यों नहीं ?

प्रशांत की क्रेडिबिलिटी से भी कमजोर था उनका पक्ष

प्रशांत भूषण लगातार पब्लिक इंटरेस्ट एलीगेशन करते रहते हैं। कई बार वे कानूनी तौर पर बेहद कमजोर मामलों को लेकर सामने आते हैं। सीनियर लॉयार अरविन्द जैन के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट की नजर में प्रशांत की क्रेडिबिलिटी वैसी नहीं है। वे कई बार जजों पर आरोप लगा चुके हैं। इस केस में सुनवाई के वक्त जजों की बेंच पर इसका असर हो।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण

प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण कहा। उन्होंने कहा, ये फैसला दिखाता है कि कई बार जब प्रभावशाली लोग आते हैं तो सुप्रीम कोर्ट का नजरिया उन्हीं मुद्दों को लेकर बदल जाता है जिनपर उन्होंने पहले दूसरी तरह के फ़ैसले दिए हैं। इस फैसले के बाद भी आरोपों का जो एक बादल है वो छंटेगा नहीं।

कोर्ट ने साक्ष्य को नजरअंदाज किया

सीनियर लॉयर अरविंद जैन ने कहा, कोर्ट में कम्प्यूटर डाटा को एविडेंस माना जाता है। इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 के सेक्शन 65 B में इसका प्रावधान भी है। यह समझ से परे है कि आखिर जजों की बेंच ने इसे क्यों नहीं माना? इसमें कोर्ट यह कर सकती थी कि सीबीआई या दूसरी एजेंसी से प्रस्तुत साक्ष्य के वैधता की जांच करवा सकती थी। जैन ने कहा, अगर किसी सरकारी एजेंसी की कार्रवाई में साक्ष्य के जब्त होने की बात की जा रही है तो निश्चित की इसकी जांच करवाई जानी थी।

क्या है सहारा-बिड़ला की कथित डायरी

सहारा-बिड़ला की कथित डायरी को वकील प्रशांत भूषण ने प्रधानमंत्री के खिलाफ चल रहे मामले में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किया था। यह एक कम्प्यूटर एंट्री शीट है। इसमें कई लोगों के नाम के दर्ज हैं। दावों के मुताबिक़ प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता शीला दीक्षित समेत तीन मुख्यमंत्रियों के नाम पर भी एंट्री है। इसी शीट के हवाले से पिछले दिनों राहुल गांधी ने गुजरात में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी पर 6 महीने के अंदर नौ बार पैसे लेने का दावा किया था। केजरीवाल भी पंजाब में मोदी पर इसी शीट के हवाले से आरोप लगा चुके हैं।

कैसे मिली थी एंट्री शीट

कथित एंट्री शीट आयकर विभाग की एक रेड में सहारा के ऑफिस से मिलने का दावा किया गया था। एंट्रीज की तारीख के वक्त नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इसमें कुछ और मुख्यमंत्रियों के नाम थे जिनमें कांग्रेस की शीला दीक्षित भी शामिल हैं।

राहुल केजरीवाल ने भी लगाए थे आरोप

पिछले दिनों गुजरात की एक रैली में राहुल ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इन्हीं सबूतों के आधार पर आरोप लगाए थे। उन्होंने आयकर विभाग के हवाले से मोदी के नाम डायरी में दर्ज रकम का खुलासा किया था। केजरीवाल भी इन्हीं सबूतों के आधार पर मोदी पर आरोप लगा चुके हैं।

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