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नोटबंदी की मार से त्रस्त किसानों ने पूछा- कहां गए अच्छे दिन  

Updated: IST farmer
अच्छे दिन के प्रतीक्षा में मार खा रहे किसान...नहीं बिक रहे किसानों के धान...

प्रतापगढ़.अच्छे दिन का इंतजार कर रहे किसानों के ऊपर मोदी सरकारकी काले धन पर अंकुश लगाने से आम जनमानस परेशानियां बढ़ती नजर आ रही है। नोट बंदी का रोजमर्रा के जीवन पर सबसे अधिक असर दिखाई दे रहा है। पट्टी नगर में बंद पड़े एटीएम से पैसे की किल्लत बढ़ती जा रही है।

नोट बंदी का रोजमर्रा के जीवन पर सबसे अधिक असर किसानों पर दिखाई दे रहा है। वहीं पैसा जमा करने और पैसा निकालने के लिए ठंड में सुबह 6 बजे से ही लम्बी लाइन लग जा रही है।

बैंक लाइन में खड़े किसान चर्चा कर रहे हैं कि धान की कटाई के साथ-साथ एवं गेंहू की बुआई व साथ में ये कैसी मुसीबत है आ गई है। सरकार तो वादे कर रही थी अच्छे दिन आने वाले है। विदेश से काला धन आने वाला है, और यहां तो हमारा धन बैंको में जमा हो रहा है और धान घर पर पड़ा हुआ है। धान की खरीददारी करने वाला नहीं है । मोदी सरकार किसान के मेहनत की खेती का धान खरीदने के लिए छलावा कर रही है। अच्छे दिन के वादे कर रही है किसानों के लिए नोट बंदी उनकी फसलों के लिए किसी मंदी से कम नहीं है।

वहीं कुछ किसान गेंहू की बुआई करने की तैयारी में है पैसों की कमी के कारण उन्हें काफी फझीहत झेलना पड़ रहा है। किसानों के धान की खरीददारी न होने से किसान परेशान हो रहे हैं। किसानों की आवाज विभागी आलाधिकारी भी नहीं सुन रहा। यहां तक की किसान बैंको से खेती करने के लिए लिए गए लोन की क़िस्त भी नही जमा कर रहे हैं। क्योंकि बाजार में भी 7 से 8 रूपये का भाव होने की वजह से किसानों की हालत खराब हो चली है। अगर यही हाल रहा तो यहां के किसानों को कर्ज न भर पाने पर मौत को गले लगाने पर मजबूर होना पड़ सकता है। किसान इसे किसी मुसीबत से कम नहीं मान रहे हैं।

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