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रिच भारतीयों का प्रॉपर्टी में जरूरत से ज्यादा निवेश

Updated: IST
एक सर्वे में अनुसार युरोप में सुपर रिच लोगों, जिनके पास 30 मिलियन डॉलर से अधिक हैं...

रईस लोग चाहे कहीं भी रहे अपने लिए आलीशान घर बनाना कभी नहीं भुलते। एक सर्वे में अनुसार युरोप में सुपर रिच लोगों (जिनके पास 30 मिलियन डॉलर से अधिक हैं) की कुल संपदा का एक-तिहाई यानी 2391 बिलियन डॉलर रियल एस्टेट में निवेश किया गया है। रियल एस्टेट में निवेश करने के मामले में एशिया दूसरे स्थान पर हैं जिनकी कुल संपत्ति का 27 प्रतिशत यानी 1800 बिलियन डॉलर प्रॉपर्टी के रूप में है।

रईस भारतीयों का जरूरत से अधिक प्रॉपर्टी में निवेश

भारत के रईसों की बात करें तो स्वाभाविक रूप से वे प्रॉपर्टी में निवेश के मामले में वैश्विक औसत को काफी पीछे छोड़ देते हैं। सुपर रिच भारतीयों की करीब 44 प्रतिशत संपदा प्रॉपर्टी के रू प में है। इसमें से करीब आधी को आवासीय सम्पत्तियों तथा 30 प्रतिशत को व्यवसायिक सम्पत्तियों में निवेश किया गया है।

इतना ही नहीं, कुछ भारतीयों के लिए प्रॉपर्टी में "औसत" निवेश ही उनकी कुल संपदा का 80 से 90 प्रतिशत है। जानकारों के अनुसार कई रईस भारतीय अपनी आय के एक बड़े हिस्से को रियल एस्टेट में ही निवेश करना पसंद करते हैं क्योंकि उनका विश्वास है कि इसकी कीमत कभी कम नहीं होती। इसकी एक वजह यह भी है कि पहले बैंक से व्यवसाय करने के लिए कर्ज लेना भी आसान नहीं था और बैंक से कर्ज लेने के लिए सम्पत्ति को सिक्योरिटी के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।

एशियाई प्रॉपर्टी बाजारों में उत्साह

एशियाई लोगों में प्रॉपर्टी में निवेश को अधिक पसंद करना काफी हद तक समझ में आता है क्योंकि हांगकांग, चीन तथा सिगापुर जैसे इलाकों में सम्पत्ति के दाम काफी तेजी से बढ़े जहां इन पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार को दखल भी देना पड़ा। एक सर्वे के अनुसार इंडोनेशिया के जकार्ता तथा बाली में सम्पत्ति की कीमतों में वर्ष 2013 के दौरान क्रमश: 27 तथा 22 फीसदी का उछाल आया है परंतु भारतीय रियल एस्टेट बाजार में कीमतों में स्थिरता देखी गई है। वर्ष 2013 के दौरान जहां एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कीमतों में इजाफा 13.5 प्रतिशत रहा वहीं भारत में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले बेंगलूर शहर में यह 5.6 प्रतिशत तक ही सीमित रहा। खास बात है कि भारतीय सम्पत्ति बाजार में विकास की अपेक्षाकृत धीमी गति से भी लोग हतोत्साहित नहीं हुए। बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद करीब दो-तिहाई रईस भारतीय सम्पत्तियों में अपने निवेश को इस साल और बढ़ाना चाहते हैं।

ध्यान देने वाली बात

इस सबके बावजूद आने वाले सालों में रियल एस्टेट बाजार में कई कारक आबंटनों में कमी आने का इशारा कर रहे हैं। भूमि खरीदने तथा इसे अपने पास रखने का मामला ही लीजिए- अभी से लोगों में भूमि में निवेश करने रूचि कम होने लगी है, वह भी जबकि इसकी मांग लगातार बनी हुई है। केवल मुम्बई जैसे शहरों में ही भूमि की कीमत में तेज इजाफा नहीं हुआ है जहां इसकी भारी कमी है बल्कि यह तो बेंगलूर जैसे शहरों में भी बढ़ी है।

अप्रत्यक्ष सौदे का रूझान

जिन लोगों के पास भूमि है वे इसे सीधे-सीधे बेचने में कम रूचि ले रहे हैं। इसके बजाय वे किसी बिल्डर के साथ मिलकर भूमि को विकसित करने में रूचि ले रहे हैं ताकि अधिक मुनाफा कमाया जा सके। साथ ही सीधे प्रॉपर्टी खरीदने के स्थान पर बिल्डर्स को धन कर्ज के रूप में देना भी पसंद किया जाने लगा है।

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