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UP Election 2017

कांग्रेस के गढ़ में इस सड़क पर जाते है मजदूरी करने के लिए मजदूर

Updated: IST Cyclist
रायबरेली में एक ऐसी सड़क है जहां से कांग्रेस परिवार का पुराना सम्बन्ध है। मां और बेटे के संसदीय क्षेत्र को जोड़ती है जो रायबरेली परसदेपुर रोड कहलाती है।

रायबरेली. रायबरेली में एक ऐसी सड़क है जहां से कांग्रेस परिवार का पुराना सम्बन्ध है। मां और बेटे के संसदीय क्षेत्र को जोड़ती है जो रायबरेली परसदेपुर रोड कहलाती है। आप इस सड़क पर सुबह और शाम रोज गरीब मजदूरों को ज्यादातर अपनी साइकिल में या हाथ में खाने का टिफिन ले जाते देख सकते है। यह अपने घर से इस आशा के साथ रोजगार के लिए मजदूरी के लिए निकलते हैं, कि आज अगर रोजगार मिल गया तो अपने परिवार का भोजन का इंताजम हो जायेगा। पर यह पक्का नहीं होता कि मजदूरी मिलेगी ही और दो पैसा लेकर घर लौटेंगे।

क्या यह वही सड़क और वही रायबरेली जिला है जहां इंदिरा गांधी जी ने कभी विकास और रोजगार को लेकर अभियान छेड़ रखा था। इस रायबरेली जिले में बहुत सारी फैक्ट्रियों थी, जिसमें दूर-दूर से लोग अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए रोजगार पाने के लिए यह मजदूरी और काम करने आते थे, पर क्या आज यह हालात हो चुकी हैं की स्व.श्रीमती इंदिरा गांधी जी के जाते ही इस जिले में रोजगार का अकाल पड़ गया है।
रायबरेली की कुछ जनता के लोंगो का कहना कि ऐसा नहीं है जो भी विकास करना चाहिए वह कांग्रेस करती है। लेकिन रोजगार को लेकर सोनिया गांधी जी ने यहां पर रेल कोच को बनाया रेलवे का कार्य खाना भी बनाया एम्स की स्थापना हो रही है , पर रायबरेली के लोगों को रोजगार मिलना बहुत ही मुश्किल हो गया है रायबरेली में इंदिरा गांधी के समय की कुछ फैक्ट्रियां अभी तक जीवित थी पर आज बंद होने के कगार पर है और कुछ तो पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं। जिसमें से एक आई टी आई एक है जो अभी कुछ कर्मचारियों को काफी समय बाद में सेलरी देती है पर दे रही है।लेकिन पर यह लोग युवा बेरोजगार और मजदूर लोग सुबह कितनी उम्मीदों से अपनी साइकिल से और दूसरे वाहनों से दो जून की रोजी रोटी के लिए निकलते हैं। पर उनको यह उम्मीद नहीं होती है की शाम को रोजगार मिलेगा भी या नहीं पर रायबरेली में कांग्रेस का आज कारखानों और बेरोजगारों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है । माना जाता है कि सत्ता गए ढाई साल हो गए हैं । पर इससे पहले भी कांग्रेस की ही सत्ता रही और कांग्रेस के सांसद श्रीमती सोनिया गांधी की सांसद हैं और पहले भी रही पर क्या उन्होंने यहां के बेरोजगारों को और उन गरीब मजदूरों के बच्चों को कितना रोजगार दिया यह जमीनी हकीकत गांव में जाकर उन गरीब परिवारों से पता चलता है । जिनके बच्चे न जाने किन किन शहरों में किसकी किसकी मजदूरी करते मिल जाएंगे पर यहां पर रेल कोच तो डाल दिया गया है , रेल पहिया बनने का कारखाना भी बना दिया लेकिन उनमें रायबरेली की जनता के लोग कितने काम करते मिलेंगे शायद यह नहीं पता है।

रेल कोच में रायबरेली की जनता और किसानों की जमीन तो ली गई थी पर उनको मुआवजा भी मिला पर आज किसानों के पास का पैसा जब खत्म हो गया तो वह गरीब मजदूर गरीब किसान दर दर की ठोकरें खाते मिलेंगे यही हाल उनके बच्चों का भी है कि दूसरे की मजदूरी करते करते खुद किस हालात में हो गए हैं। यह शायद यहां के सांसद को पता होगया । कि अगर उस मुआवजे के साथ लोंगो को काफी तादाद में रोजगार दिया होता तो शायद उन किसान के बेटे रोजगार प् चुके होते और मजदूर नही होते । श्रीमती सोनिया गांधी जी गाँव गाँव जाकर यहां की जनता से मुलाकात करती है ,और भरोसा भी देती हैं कि हम आपका सहारा बनेंगे , हां विकास तो किया है सड़के, स्कूल , पानी और बिजली की सुविधा मिली है। जनता को एम्स अस्पताल भी मिला है । लेकिन बजट न मिलने से एम्स आधार में लटक गया गया है । क्योंकि कांग्रेस लोगों का मानना है कि केंद्र सरकार पूरी तरह से इसमें पैसा देने में भेदभाव कर रही है जब तक एम्स के लिए बजट नहीं होगा तब तक इलाज मरीजों का कैसे होगा । लेकिन भाजपा के लोंगो का कहना है कि बजट आने वाला है और एम्स जल्द बनेगा।

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