Patrika Hindi News

> > > > Notbandi hoped would end the arrears, even if the trouble in demand

नोटबंदी से उम्मीद थी कि खत्म होगा एरियर्स, यहां तो डिमांड में भी परेशानी

Updated: IST Notbandi hoped would end the arrears, even if the
नोट बंदी के दौरान सरकारी वसूली काउंटरों पर जमकर हरियाली देखी गई। यदि निगम की ही बात की जाए तो जो वसूूली साल में होती थी वो दस से 15 दिनों मेें हो गई।

रायगढ़. नोट बंदी के दौरान सरकारी वसूली काउंटरों पर जमकर हरियाली देखी गई। यदि निगम की ही बात की जाए तो जो वसूूली साल में होती थी वो दस से 15 दिनों मेें हो गई।

क्योंकि इन जगहों पर पुराने नोट से शुल्क पटाने की छूट दी गई थी। लेकिन नोटबंदी ने अभी तक की स्थिति में बिजली विभाग के अरमानों पर पानी फेर दिया है।

बकौल अधिकारी, हमें इस बात की उम्मीद थी कि पुराने बकायदारों की ओर से पूर्ण भुगतान किया जाएगा जिससे हमारा एरियर्स कम हो जाएगा। पर स्थिति यह रही कि डिमांड तक की पूर्ण वसूली की स्थिति नहीं बन रही थी। पर जैसे-तैसे मंगलवार तक डिमांड के आंकड़े को वसूली ने पार कर लिया था।

हलंाकि अब विभाग को उम्मीद है कि दिसंबर माह तक एरियर्स की राशि में कमी आएगी। मिली जानकारी के अनुसार बिजली विभाग पर साढ़े 15 करोड़ का एरियर्स है।

दरअसल एरियर्स वो राशि है जो डिमांड से बच जाती है, ेिजसकी वसूली नहीं हो पाती है। हर माह की डिमांड औसतन सात करोड़ के आसपास है। नोट बंदी के दौरान काउंटर पर पुराने नोट लेकर लोग जब पहुंचने लगे तो विभाग को इस बात की उम्मीद थी कि इतनी वसूली होगी कि डिमांड के अलावे एरियर्स भी पट जाएगा।

पर ऐसा नहीं हुआ है। वर्तमान स्थिति में शहर के दोनों जोनों को मिलाकर डीमांड तक की वसूली हो सकी है। जबकि साढ़े 15 करोड़ का एरियर्स बचा हुआ है।

आए पुराने वाले

बिजली काउंटर पर पुराने नोट के भुगतान की छूट मिलने के साथ पुराने से पुराने बकायदा काउंटर पर पहुंचे और अपना भुगतान चुकाया। पर इनकी संख्या भी अपेक्षाकृत काफी कम रही।

ऐसे में बड़े बकायादारों की ओर से पुराना और अटका हुआ बिल तो मिल गया पर दिक्कत यह हो गई कि जो रेगुलर वाले उपभोक्ता हैं उनका बिल नहीं आ सका है।

एक अनुमान के मुताबिक रेगुलर वालों की ओर से नोट बंदी के पहले तक 90 प्रतिशत का भुगतान विभाग को इनसे मिल जाता था। वर्तमान में जो स्थिति है वह काफी कम है। इसका प्रभाव वसूली पर दिख रहा है।

ये भी नहीं आ सके

नोट बंदी के बाद विभाग को उन उपभोक्ताओं के काउंटर पर आने की उम्मीद थी जो इन एक्टिव की श्रेणी में डाले जा चुके हैं।

यदि पिछले साल के आंकड़े पर गौर करें तो जिले में इन एक्टिव कंज्यूमर की संख्या 5 हजार 893 थी, जिन पर नौ करोड़ रुपए का बकाया था।

ये वो उपभोक्ता हैं जिनके विषय में विभाग को भी पता नहीं है कि ये आखिर कहां गए। वर्तमान स्थिति में विभाग के खाते में चार हजार के आसपास इन एक्टिव कंज्यूमर हैं। जिन पर चार से साढ़े करोड़ रुपए का बकाया है।

अपने विवाह के सपने को सपने भारत मैट्रीमोनी से साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!

Latest Videos from Patrika

Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???