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Video Icon बानीपाथर में 13 गांव के ग्रामीणों ने रुकवाया रेल कारिडोर का कार्य

Updated: IST  The Centre plans
किसानों का आरोप है कि रेल कारिडोर के निर्माण में जिस किसान की जमीन आ रही थी और उसमें पेड़ लगे हुए थे उसे बिना किसान की सहमति और बिना कोई मुआवजा दिए ही काट दिया गया है।

रायगढ़. रेल कारिडोर प्रभावित 13 गांव के ग्रामीणों ने रेल करिडोर निर्माण कार्य को फिर से रुकवा दिया है। पिछले दो दिनों से ग्रामीण बकायदा निर्माण स्थल पर धरना भी प्रारंभ कर चुके हैं। किसानों का आरोप है कि जो मांगे की जा रही है उसके बदले सिर्फ प्रशासन की ओर से आश्वासन ही दिया जा रहा है इसके पूर्ति की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार जिला के खरसिया से घरघोड़ा, धरमजयगढ़ तक प्रस्तावित 120 किलोमीटर लम्बी शासन की महत्वकांक्षी परियोजना प्रशासन और ग्रामीणों के गतिरोध के कारण खटाई में पड़ती नजर आ रही है। इस परियोजना की लागत लगभग १७ सौ करोड़ है।

उक्त परियोजना में किसानों को शासन द्वारा दिए गए मुआवजा एवं बकाया पूरक मुआवजा सहित बोनस की मांग को लेकर पिछले 1 वर्षों से गतिरोध जारी है। आलम यह है कि पिछले छह माह के अंदर दो से तीन बार ग्रामीण काम बंद करवा चुके हैं और अपनी मांगों को पूरा करने की मांग करते रहे हैं। हर बार ग्रामीणों की प्रशासन के साथ बैठक हुई और उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया गया, समय भी दिया गया लेकिन कभी उसे तय समय में पूरा नहीं किया गया। किसानों को 20 जून तक पूरक मुआवजा एवं बोनस देने आस्वासन दिया गया था । अनेक बार खरसिया एसडीएम को ज्ञापन दिया है चुका है ।

पर इसकी कोई सुनवाई प्रशासन की ओर से नहीं की गई है। दूसरी ओर केंद्र सरकार की उक्त योजना को पूर्ण करने के लिए लगातार राज्य सरकार एवं स्थानीय प्रसाशन के ऊपर दबाव है। भूमि अधिग्रहण के वक्त चार गुना मुआवजा देने एवं प्रभावित परिवार के प्रति बालिग सदस्य को 5.5 लाख बोनस देने का वादा सरकार द्वारा किया गया था । किंतु आज तक प्रभावित सभी किसानों को पूर्ण मुआवजा राशि का भुगतान नही किया गया है ।

पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम

निर्माण कार्य के दौरान जब शासकीय भूमि पर कारिडोर के निर्माण कार्य आरंभ हुआ तो इस दौरान ग्रामीण इकट्ठे हो गए और निर्माण कार्य को रुकवा दिया। काम के रुकने के बाद मौके पर पुलिस की टीम और प्रशासन की टीम पहुंच गई थी। ग्रामीणों को हर विद्या से मनाने का प्रयास किया गया लेकिन ग्रामीण टस से मस नहीं हुए। एक ओर प्रशासन निर्माण कार्य को बाधित नहीं करने की बात कह रहा था तो दूसरी ओर ग्रामीण पहले अपनी मांग को पूरा करने की बात कर रहे थे। ेदेर तक चली बैठक में भी कोई समाधान नहीं निकल सका था।

बिना मुआवजा काट दिया पेड़

किसानों का आरोप है कि रेल कारिडोर के निर्माण में जिस किसान की जमीन आ रही थी और उसमें पेड़ लगे हुए थे उसे बिना किसान की सहमति और बिना कोई मुआवजा दिए ही काट दिया गया है। ऐसे में किसान अपने जमीन में काटे गए पेड़ों का मुआवजा मांग रहे हैं।

कहा था बोनस देंगे

काम रोको आंदोलन कर रहे किसानों ने बताया कि प्रशासन की ओर से रेल कारिडोर में प्रभावित किसानों के परिवार में एक एक वयस्क को पांच लाख रुपए बोनस देने की बात कही गई थी। बकायदा इसके लिए प्रक्रिया प्रारंभ करने का आश्वासन भी दिया गया था। पर आज तक ऐसा नहीं हो सका है। वहीं प्रभावित क्षेत्र में कई किसानों की जमीन डूबान में आ रही है। जिसके कारण उनकी फसल चौपट हो गई है, ऐसे में किसानों का कहना है कि फसल नुकसान का मुआवजा दिया जाए और पानी निकासी की व्यवस्था की जाए ताकि उनकी फसल सही सलामत रह सके।

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