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अब 42 हजार के फंड से रोकेंगे जिले में पौने दो अरब रुपए के शराब का कारोबार

Updated: IST Twenty-two thousand, now 42 billion in funds from
शराब बिक्री और बंदी को जिले में उठा पटक का दौर जारी है। इस बीच अब प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि शराब की बंदी धीरे-धीरे होगी।

रायगढ़. शराब बिक्री और बंदी को जिले में उठा पटक का दौर जारी है। इस बीच अब प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि शराब की बंदी धीरे-धीरे होगी।

वहीं मौजूदा समय में कोचियों पर लगाम लगाने पर जोर रहेगा। प्रतिवर्ष शराब के करीब पौने दो अरब के व्यवसाय पर 42 हजार रुपए का फंड भी स्वीकृत किया गया है।

यह फंड भारत माता वाहिनी के लिए है, जो गांवों में रैली, जुलूस व अन्य माध्यम से नशे को रोकने के लिए प्रयास करेंगी।

प्रदेश सरकार एक ओर शराब के कारोबार में ठेकेदारों को हटा कर स्वयं संचालित करने का मन बना चुकी है। वहीं प्रदेश में नशा बंदी करने की बात भी कह रही है।

शराब के कारोबार पर गौर करे तो वैध रूप से जिले में पिछले बार एक अरब 66 करोड़ का ठेका हुआ था। वहीं करीब प्रतिवर्ष नव करोड़ के करीब अवैध रूप से शराब का कारोबार होता है।

इस तरह कुल करीब पौन दो अरब का व्यवसाय जिले में ही होता है। वहीं इस वर्ष इस कारोबार को कम से कम 10 फीसदी अधिक का कारोबार करना है।

वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग अब अवैध शराब को रोकने बेचने वाले कोचिए पर रोक लगाने के लिए भारत माता वाहिनी का सहारा लेगी। इसके लिए करीब 42 हजार का फंड भी जारी किया गया है।

हालांकि यह फंड करोड़ों के शराब कारोबार की तुलना में कुछ भी नहीं है। इस फंड से भारत माता वाहिनी ढोल, मंजीरा व दरी सहित अन्य सामान खरीदती है।

जिसके माध्यम से रैली व अन्य कार्यक्रम आयोजित कर नशा से होने वाले नुकसान की जानकारी गांव-गांव में दी जाती है। इसके साथ ही भारत माता वाहिनी कोचियों की सूचना भी आबकारी विभाग को देती है।

40 गांवों में बनाई गई है टीम, करेंगे एक्टिव

शुरुआत में ही भारत माता वाहिनी का गठन प्रदेश के साथ-साथ जिले में भी वर्ष 2011 से किया गया। इसकी शुरुआत 28 गांवों से की गई।

वहीं वाहिनी की सक्रियता को देखते हुए विभाग लगातार इसमें बढ़ोत्तरी भी करता रहा। वहीं धीरे-धीरे 40 गांवों में भारत माता वाहिनी का

गठन किया गया, लेकिन फिर आबकारी विभाग व भारत माता वाहिनी के बीच सामांजस्यता की कमी की वजह से संख्या आगे नहीं बढ़ सकी।

पांच साल पहले गठन

भारत माता वाहिनी गठन के संबंध में गौर करे तो यह करीब पांच साल पहले गठित की जा चुकी है। गठन होने के बाद भारत माता वाहिनी लगातार नशा के खिलाफ अभियान चलती थी।

इसमें कई बार कोचियों की सूचना भी शामिल है। शुरुआत में विभाग के द्वारा कार्रवाई की जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे कोचियों पर कार्रवाई का अभाव भी हो गया।

ऐसे में भारत माता वाहिनी भी निष्क्रिय हो गई। वहीं बीते 2014 व 15 को भारत माता वाहिनी समाज कल्याण विभाग के अधीन कर दिया गया था।

वहीं 2016 जनवरी से यह वाहिनी फिर आबकारी विभाग के पास आ गया है। अब विभाग इसे सक्रिय करने में जुटा हुआ है।

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