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Video Icon VIDEO: बेहद शर्मनाक! लाश के साथ ऐसी अमानवीयता कोई कैसे कर सकता है!

Updated: IST PM in Sarguja
जंगल में मिले एक युवक के शव का स्वास्थ विभाग ने अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए खुले आसमान के नीचे ही उसका पीएम कर डाला।

अंबिकापुर. सरगुजा में स्वास्थ विभाग के कारनामे ने पूरे छत्तीसगढ़ को शर्मसार कर दिया है। दरअसल जंगल में मिले एक युवक के शव का स्वास्थ विभाग ने अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए खुले आसमान के नीचे ही उसका पीएम कर डाला। यह पूरी वारदात वीडियो में कैद है आप देख सकते है कैसे विभाग का कर्मचारी जंगल में पेड़ के नीचे युवक का पोस्टमार्टम कर रहा है। पुलिस को युवक का शव जिले के बनया गांव के चिरगा गांव के घंटाडीह के जंगल में मिला था। शव से कुछ ही दूरी पर मिली बाइक के आधार पर मृतक की पहचान हुई थी।

जंगल में पेड़ पर लटकता हुआ मिला शव
मृतक की पहचान अजय यादव के रूप में हुई है, वह जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र के बनया गांव का रहने वाला था। जानकारी के मुताबिक अजय वह किसी प्रेस में काम करता था। उसके साथियों का कहना है कि वह काम करने के बाद हमेशा घर वापस लौट जाता था लेकिन जब तीन दिन पहले वह गांव नहीं लौटा तो मृतक के पिता ने बतौली पुलिस थाने में उसकी गुमशूदगी का मामला दर्ज कराया था। जिसके बाद छानबीन में बतौली पुलिस को उसकी लाश जंगल में पेड़ पर लटका हुआ होने की खबर मिली। बाइक के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर उसकी पहचान हो सकी।

विभाग ने खुले में ही कर दिया पोस्टमार्टम
पुलिस ने गांव वाली की सूचना पर अपना काम किया। लेकिन जब शव के पोस्टमार्टम के लिए स्वास्थ विभाग की बारी आई तो उन्होने फिर वही चूक की जो सरगुजा जिले मे बार बार दिखने को मिलती है। दरअसल शव को पोस्टमार्टम के लिए किसी पोस्टमार्टम हाउस नही ले जाया गया , बल्कि वाहन ना होने का बहाना बनाते हुए शव का पोस्टमार्टम घटना स्थल मे ही कर दिया गया। जिसके बाद जब हमने जब डाक्टरो से इस अवमानवीय व्यवहार की वजह जाननी चाही तो उन्होने कहा कि उनके स्वास्थ केन्द्र मे पोस्टमार्टम करने की व्यवस्था नही है। इतना ही नही डाक्टर साहब ने पोस्टमार्टम भी किया तो शव से इतना दूर खडा होकर जितने मे शायद उनको शव का कोई अंग भी ना दिखता हो।

मामले में डॉक्टर का कहना है कि पोस्टमार्टम के लिए अलग से कक्ष न होने के कारण उन्हें खुले में ही घटनास्थल पर पोस्टमार्टम करना पड़ा। लेकिन इस घटना ने न केवल स्वास्थ विभाग के खोखले दावों की पोल खोल कर रख दी है अपितु ये भी जता दिया है कि जब मुर्दों को लेकर वे इतने असंवेदनशील हैं तो इलाज के दौरान आने वाले मरीजों के लिए उनका कैसा व्यवहार होता होगा। विभाग के इस शर्मनाक रवैए को न केवल प्रदेश के मुखिया रमन सिंह को संज्ञान में लेने की जरूरत है अपितु सबका साथ सबका विकास करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी इस तरह की लापरवाहियों और अमानवीयता को रोकने के लिए प्रयास करने होंगे।

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