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ये कैसा मास्टर प्लान, अवैध प्लाटों को वैध करने से बिगड़ रही शहर की सूरत

Updated: IST master plan
राजधानी में मास्टर प्लान का पालन ठीक से नहीं हो रहा है। ऊपर से सरकार ने अप्रैल 2016 को अवैध निर्माण को वैध करने का कानून पास कर दिया। इससे राजधानी के विकास का नक्शा ही बिगड़ गया है

रायपुर. राजधानी में मास्टर प्लान का पालन ठीक से नहीं हो रहा है। ऊपर से सरकार ने अप्रैल 2016 को अवैध निर्माण को वैध करने का कानून पास कर दिया। इससे राजधानी के विकास का नक्शा ही बिगड़ गया है। आवासीय और व्यवसायिक दोनों क्षेत्रों में मास्टर प्लान के पालन को दरकिनार कर दिया गया है। निगम के मुताबिक शहर में 45 ऐसी अवैध कॉलोनियां हैं, जहां नक्शे पास नहीं हो सकते, लेकिन मकान-दुकान और मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बना ली गई है। शहर के कई ऐसे इलाके जहां बहुमंजिला इमारतों का प्रावधान नहीं है, लेकिन बिल्डिंगें खड़ी नजर आती हैं। जो सड़क पांच साल पहले ही 20 से 80 फीट हो जानी थी, वह सड़क आज भी जस की तस है।

आबादी बढऩे के साथ मास्टर प्लान का पालन नहीं किया गया। शहर में कई ऐसे भी मामले हैं, जहां मास्टर प्लान में संशोधन किया गया तो वह भी विवादों में आ गया। इन सबके बीच अब सभी अवैध कॉलोनियों को वैध कराने का कानून पास किया जा चुका है, जो कि शहर के मास्टर प्लान के लिए बड़ा खतरा साबित होने वाला है।

एमआर-21 रोड में अवैध निर्माण
राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित एमआर-21 रोड में अवैध निर्माण शुरु हो चुका है, जिस पर नगर-निगम ने पिछले दिनों कार्यवाही की, लेकिन इसका बड़ा असर नहीं हुआ। यह मार्ग मुख्यत: अमलीडीह क्षेत्र में आता है। इस मार्ग से लोगों को नया रायपुर और कमल विहार के लिए कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके कारण यहां सड़कों पर कब्जे कर लिए गए हैं। जोन-4 के अंर्तगत नगर-निगम अवैध निर्माण पर मुंह फेरे हुए है।

भवनों में पार्किंग नहीं
नगर-निगम के मुताबिक शहर में लगभग 140 भवन ऐसे हैं,जिसमें पार्किंग की सुविधा नहीं है। इसमें स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बड़े कामर्शियल काम्पलेक्स, नर्सिंग होम, मल्टीस्टोरी बिल्डिंग आदि शामिल हैं। मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में मास्टर प्लान के मुताबिक पार्किग की पर्याप्त जगह होनी चाहिए, लेकिन यहां लोगों को गार्डन या खेल मैदानों पर पार्किंग करनी पड़ रही है। बड़े रियल इस्टेट प्रोजेक्टों से लेकर छोटे में भी कमाबेश यही स्थिति है।

सुविधाओं का वादा लेकिन नियम दरकि नार
बहुमंजिला इमारतों का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन यहां जैसा बताया गया था, वैसी सुविधाएं नहीं दी गई। कई कॉलोनियों में खेल मैदान, गार्डन, कमर्शियल कॉम्पलेक्स, चिल्ड्रन प्ले एरिया आदि नहीं है।

70कामर्शियल कॉम्पलेक्स में पार्किंग नहीं
व्यवसायिक निर्माण पर गौर करें तो लगभग 50 फीसदी निर्माण कार्यों में मास्टर प्लान का ध्यान नहीं रखा गया। सरकारी आंकड़े हैं, जबकि जमीनी स्तर पर पड़ताल करने पर पता चला कि लगभग 70 फीसदी कामर्शियल कॉम्पलेक्स में पार्किंग, पीने का पानी, फायर फाइटिंग सिस्टम आदि की सुविधा नहीं है।

ग्राम एवं नगर निवेश के संयुक्त संचालक विनीत नायर ने बताया कि मास्टर प्लान के मुताबिक काम होने से शहर का व्यवस्थित विकास होता है। ग्राम एवं नगर निवेश ने 2021 का मास्टर प्लान पेश किया है। अवैध निर्माण पर बीते महीने 100 से अधिक नोटिस जारी किया गया है।

नगर निगम कमिश्नर रजत बंसल ने बताया कि नियमों के मुताबिक कई आवासीय मामले में अवैध निर्माण को वैध करने का कानून पास हो चुका है। इसके आवेदन भी आ रहे हैं। अन्य अवैध निर्माण के मामले पर कार्रवाई की जाएगी।

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