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किसानों को 6000 करोड़ की जरूरत, सहकारी बैंकों को मिले सिर्फ 220 करोड़

Updated: IST 2000 rs
सहकारी बैंकों को लेनदेन के लिए आरबीआई से फिलहाल 220 करोड़ रुपए मिले हैं। दावा किया जा रहा है कि इससे किसानों के भुगतान की समस्या हल हो जाएगी।

रायपुर. सहकारी बैंकों को लेनदेन के लिए आरबीआई से फिलहाल 220 करोड़ रुपए मिले हैं। दावा किया जा रहा है कि इससे किसानों के भुगतान की समस्या हल हो जाएगी। जबकि, फरवरी 2016 तक किसानों को भुगतान के लिए 6000 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी।

बैंकों में स्थिति सामान्य होने का दावा

प्रदेश में ज्यादातर किसानों के बैंक खाते जिला सहकारी बैंकों में ही खुले हुए हैं। 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बाद किसान भुगतान के लिए भटक रहे हैं। जबकि अधिकारिक सूत्रों का दांव है कि आरबीआई नेअपेक्सबैंक के माध्यम से सहकारी बैंकों के लिए 220 करोड़ रुपए पहुंचाया हैं। मांग के हिसाब से स्थिति नियंत्रण में है। सहकारी बैंकों को प्रतिदिन 11 से 20 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ रही है। इस हिसाब से राशि पर्याप्त मात्रा में हैं। जबकि कांग्रेस का आरोप है कि नोटबंदी के उपजे हालात के बाद किसान और मजदूरों को खाने के लाले पड़ रहे हैं।

कर्मचारियों की कमी बड़ी समस्या

इस संबंध में जिला सहकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अशोक धनकर का कहना है कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की पहल के बाद बैंक में भुगतान के लिए पर्याप्त राशि है। फिलहाल कर्मचारियों की कमी की वजह से भुगतान का काम धीमा चल रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति और बेहतर होगी।

पीसीसी मीडिया चेयरमैन ज्ञानेश शर्मा ने कहा कि किसानों को अपने ही बेचे हुए धान का पैसा नहीं मिल पा रहा है, इसलिए प्रदेश में पलायन शुरू हो गया है। सहकारी बैंक जितनी रकम मांग रहे उसका एक तिहाई ही बैंकों को दिया जा रहा है। जबकि अभी सरकार की धान खरीदी चल रही है। इसका खामियाजा गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि अभी ही धान उत्पादक किसानों के करीब डेढ़ हजार करोड़ का भुगतान बाकी है।

अपेक्स बैंक के अध्यक्ष अशोक बजाज सहकारी बैंकों में आरबीआई से राशि मिलनी शुरू हो गई है। धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होते जा रही है। सभी किसानों को समय पर राशि का भुगतान करने का प्रयास किया जा रहा है।

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